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Wednesday, August 19, 2026
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लखपति दीदी योजना: छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर, लाखों की कमाई से बदल रही जिंदगी

Lakhpati Didi Yojana: भारत सरकार की महत्वाकांक्षी लखपति दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में सफल साबित हो रही है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, तकनीकी और वित्तीय सहायता देकर सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित करने का लक्ष्य दिया जाता है। छत्तीसगढ़ के जिला गरियाबंद के छुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सरकड़ा में कई महिलाएं इस योजना के जरिए लखपति दीदी बन चुकी हैं। ये महिलाएं विभिन्न छोटे-मोटे व्यवसायों से लाखों रुपये सालाना कमा रही हैं और आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम कर रही हैं।

Lakhpati Didi Yojana: नर्मदा निषाद, सिलाई से ईंट भट्ठा तक का सफर

जय मां भवानी स्वयं सहायता समूह की सदस्य नर्मदा निषाद ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद पहले सिलाई मशीन से काम शुरू किया और कमाई से किराना दुकान खोली। अब वे ईंट भट्ठे का काम कर रही हैं। समूह के माध्यम से लोन लेकर व्यवसाय बढ़ाया और आज सालाना डेढ़ लाख रुपये तक कमा रही हैं। नर्मदा कहती हैं, “पहले घर चलाना मुश्किल था, लेकिन अब मैं आत्मनिर्भर हूं और परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हूं।” उनकी सफलता से गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिल रही है।

Lakhpati Didi Yojana: लीना साहू, घरेलू स्टोर और कृषि से डेढ़ लाख की कमाई

जय मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की लीना साहू ने समूह से मिले लोन से घर में ही फैंसी स्टोर और किराना दुकान शुरू की। साथ ही वे कृषि कार्य करती हैं और कृषि मित्र, महतारी वंदन योजना तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ ले रही हैं। इन सब से उनकी सालाना आय डेढ़ लाख रुपये के करीब पहुंच गई है। लीना खुशी से कहती हैं, “लखपति दीदी बनकर अब परिवार के साथ सुखी जीवन जी रही हूं। पहले घर की जरूरतें पूरी करना चुनौती थी, लेकिन योजना ने सब बदल दिया।” उनकी दुकान गांव की महिलाओं के लिए रोजगार और सुविधा का केंद्र बन गई है।

Lakhpati Didi Yojana: फुलेश्वरी निषाद, सब्जी और धान की खेती से आत्मनिर्भरता

राधारानी स्वयं सहायता समूह की फुलेश्वरी निषाद ने सब्जी और धान की खेती को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया। समूह से लोन लेकर उन्होंने हरी सब्जियों की खेती शुरू की, जो साल भर उत्पादन देती है। बाजार में बेचकर वे सालाना एक लाख रुपये आसानी से कमा लेती हैं। फुलेश्वरी बताती हैं, “सब्जी की खेती से ताजी आय होती है और धान से स्थिर कमाई। अब परिवार आत्मनिर्भर है और कोई आर्थिक तंगी नहीं।” उनकी सफलता से गांव में जैविक खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है।

Lakhpati Didi Yojana: क्लस्टर समन्वयक झरना साहू का योगदान

क्लस्टर समन्वयक झरना साहू ने बताया कि सरकड़ा में कई स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं और महिलाएं लोन लेकर छोटे व्यवसाय जैसे दुकानदारी, खेती, पशुपालन और हस्तशिल्प कर रही हैं। लखपति दीदी योजना के तहत आने वाले सभी कार्यों से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। झरना कहती हैं, “समूह की एकजुटता और सरकारी सहायता से ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल रही है। कई दीदियां अब लाखों की कमाई कर परिवार और समाज की प्रगति में योगदान दे रही हैं।”

Lakhpati Didi Yojana: योजना का व्यापक प्रभाव

लखपति दीदी योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत चलाई जा रही है, जिसका लक्ष्य 3 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना है। छत्तीसगढ़ में हजारों महिलाएं इस योजना से जुड़कर सफल हो रही हैं। गरियाबंद जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में यह योजना विशेष रूप से प्रभावी साबित हो रही है, जहां महिलाएं पारंपरिक कौशल को आधुनिक व्यवसाय में बदल रही हैं।

सरकड़ा की ये लखपति दीदियां साबित कर रही हैं कि सही सहायता और दृढ़ इच्छाशक्ति से ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज को मजबूत कर सकती हैं। उनकी सफलता की कहानियां अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन रही हैं। सरकार की यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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