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Wednesday, June 24, 2026
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छत्तीसगढ़ कैबिनेट: आत्मसमर्पित नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की समीक्षा से लेकर कानून सुधार तक, 14 कानूनों में संशोधन

Chhattisgarh Cabinet: कैबिनेट ने उन नक्सलियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरणों की समीक्षा एवं संभावित निरस्तीकरण (रिवर्सल) प्रक्रिया को मंजूरी दी, जो आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

Chhattisgarh Cabinet: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बुधवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण और व्यापक फैसलों को मंजूरी दी गई है। इनमें नक्सल बहाली की प्रक्रिया, कानूनों में सुधार, और शासन-प्रशासन में सुगम बदलाव शामिल हैं।

Chhattisgarh Cabinet: नक्सलियों के लिए नया प्रस्ताव

कैबिनेट ने उन नक्सलियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरणों की समीक्षा एवं संभावित निरस्तीकरण (रिवर्सल) प्रक्रिया को मंजूरी दी, जो आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके लिए एक मंत्रिपरिषद उप-समिति का गठन भी तय किया गया है, जो इन मामलों की पड़ताल करेगी, और न्यायपूर्ण पाए जाने पर उन्हें वापसी की सिफारिश करेगी। इस कदम का आधार है “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति‑2025” – जो नक्सली उन्मूलन और पुनर्वास दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है। इसके तहत, जिला स्तरीय समितियों की रिपोर्ट के बाद मामला पुलिस एवं विधि विभाग की समीक्षा से गुजरेगा। कुछ मामलों में, यदि प्रकरण केंद्र सरकार के अधीन हैं, तो केंद्र से भी अनुमति ली जाएगी।

Chhattisgarh Cabinet: कानूनों में सरलीकरण

कैबिनेट ने 14 राज्य-कानूनों में संशोधन के लिए प्रस्तावित विधेयक – Chhattisgarh Jan Vishwas (Amendment of Provisions) Bill, 2025 को मंजूरी दी।

मंजूर किए गए संशोधनों के तहत:

उन क़ानूनी प्रावधानों को हटाया या बदला जाएगा, जिनमें जुर्माना या जेल जैसी कड़ी सज़ाएं होती थीं, लेकिन अब उन्हें प्रशासकीय दंड या हल्की सज़ा में बदला जाएगा। इससे छोटे–मोटे उल्लंघनों के मामले जल्दी निपट सकेंगे, अदालतों का बोझ कम होगा, और आम नागरिकों तथा व्यवसायों को “ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस / ईज़ ऑफ लिविंग” का फायदा मिलेगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम सुशासन बढ़ाने और अनावश्यक कानूनी अड़चनों को कम करने की दिशा में है।

Chhattisgarh Cabinet: विकास, पुनर्विकास और वित्तीय प्रबंधन

कैबिनेट ने राज्य की विभिन्न विभागों, निगमों, बोर्डों और सार्वजनिक कंपनियों के अधीन जर्जर सरकारी इमारतों और अव्यवस्थित जमीनों के पुनर्विकास व उपयोग हेतु 7 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें राजधानी रायपुर के शांति नगर, बीटीआई शंकर नगर, राजनांदगांव, जगदलपुर, कांकेर, महासमुंद और कोरबा के कतघोड़ा शामिल हैं।

इसके अलावा, सरकार ने लेखा-जोखा एवं पेंशन प्रबंधन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से वित्तीय सुधारों को भी हरी झंडी दी है। एक आर्थिक सुधार पहल के तहत, लॉजिस्टिक क्षेत्र में राज्य को विकास-हब के रूप में विकसित करने के लिए नई लॉजिस्टिक पॉलिसी पर भी मुहर लगी है। इसका उद्देश्य राज्य में वस्तुओं के भंडारण, व्यापार और निर्यात संरचनाओं को मज़बूत बनाना है।

क्या यह बदलाव सुरक्षा या विकास – सिर्फ सरकार की रणनीति है?

इस बैठक के फैसले दो स्पष्ट संदेश देते हैं: पहले – कि नक्सल प्रभावित जिलों में शांति बहाल करने के लिए पुनर्वास व सामूहिक एकीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। आत्मसमर्पण के बाद सामाजिक स्वीकार्यता और न्याय दोनों मिलें – यह नया प्रतिफल है। दूसरे – यह कि राज्य सरकार ने कानूनों को आमोद-प्रमोद के बजाय सुविधाजनक और अपडेटेड बनाने की ठानी है, ताकि आम जनता व छोटे व्यवसायों को कानूनी बोझ से राहत मिले।

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