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WPI जून 2025: थोक महंगाई दर में गिरावट, खाद्य और ईंधन की कीमतों में कमी

WPI Inflation: देश में थोक महंगाई दर जून में गिरकर -0.13% पर आ गई है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को डेटा जारी कर बताया कि यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों की कीमतों में कमी के कारण आई है। इस साल पहली बार WPI महंगाई दर नकारात्मक रही और पिछले 14 महीनों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। मई 2025 में यह दर 0.39% थी।

WPI Inflation: प्राथमिक वस्तुओं में मामूली बढ़ोतरी, लेकिन खाद्य महंगाई में राहत

मंत्रालय के अनुसार, जून में प्राथमिक वस्तुओं का इंडेक्स मई की तुलना में 0.81% बढ़ा है। हालांकि, खाद्य उत्पादों की थोक महंगाई दर जून में -3.75% रही, जो मई में -1.56% थी। इसका मतलब है कि थोक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम जनता को राहत मिल सकती है।

WPI Inflation: ईंधन, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में क्या रहा हाल

ईंधन और बिजली में महंगाई दर जून में -2.65% रही, जो मई में -2.27% थी। मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों में महंगाई दर जून में 1.97% दर्ज की गई, जिससे इस सेक्टर में स्थिरता के संकेत मिले हैं। प्राथमिक वस्तुओं में महंगाई दर पिछले महीने के -2.02% से गिरकर -3.38% पर पहुंच गई है।

WPI Inflation: सब्जियों और दालों में महंगाई दर में बड़ी गिरावट

खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में जून में सब्जियों की महंगाई दर -22.65% रही, जो मई में -21.62% थी। दालों में महंगाई दर -14.09% रही, जबकि गेहूं में यह दर 3.77% पर रही। अंडे, मांस और मछली की महंगाई दर में भी कमी आई और यह मई के -1.01% से जून में -0.29% रही। आलू और प्याज की महंगाई दर में भी भारी गिरावट रही और यह क्रमशः -32.67% और -33.49% रही।

आरबीआई ने घटाया महंगाई अनुमान

हाल ही में एमपीसी बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई दर का अनुमान 4% से घटाकर 3.7% कर दिया था। उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों में महंगाई में कमी आई है और यह अक्टूबर 2024 के सहनशीलता बैंड से नीचे आ गई है। गवर्नर ने कहा, अब हमें 4% के लक्ष्य के साथ मुख्य महंगाई के टिकाऊ संरेखण का विश्वास मिलता है और हमें यह भी उम्मीद है कि यह वर्ष के दौरान लक्ष्य से कुछ कम रह सकती है।

निकट भविष्य में महंगाई में और नरमी की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि थोक स्तर पर महंगाई में गिरावट का असर खुदरा महंगाई पर भी पड़ेगा, जिससे आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता से भी महंगाई पर काबू पाने में मदद मिली है।

क्यों महत्वपूर्ण है WPI में गिरावट

WPI महंगाई दर में गिरावट का अर्थ है कि थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतें कम हो रही हैं। इसका सकारात्मक असर खुदरा महंगाई (CPI) पर भी पड़ सकता है, जिससे ब्याज दरों पर दबाव कम होगा और रिजर्व बैंक को आगे की मौद्रिक नीति में नरमी का अवसर मिल सकता है।

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