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चांदी ने तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड, पहली बार 2 लाख के पार, इन 5 वजह से आई तेजी

Silver Price: चांदी ने नया इतिहास रच दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी फ्यूचर्स शुक्रवार को पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई।

Silver Price: कमोडिटी बाजार में चांदी ने नया इतिहास रच दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी फ्यूचर्स शुक्रवार को पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई। मार्च डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट इंट्राडे में 2,01,615 रुपये तक उछला, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। हालांकि, मुनाफावसूली के कारण कारोबार खत्म होते समय यह 1,92,615 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई।

Silver Price: 2025 में चांदी की बंपर तेजी

एक्सिस सिक्योरिटीज के अनुसार, 2024 में 20 प्रतिशत से अधिक रिटर्न देने वाली चांदी ने 2025 में भी अपनी रफ्तार बरकरार रखी है। सालाना बढ़त 1979 के बाद सबसे ज्यादा रही है। साल भर में चांदी की कीमतें करीब 120-130 प्रतिशत तक उछल चुकी हैं। लंबे समय तक स्थिर रहने के बाद चांदी अब मजबूत बुल रन में प्रवेश कर चुकी है। ग्लोबल मार्केट में भी कॉमेक्स पर चांदी 65 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई, जो कई दशकों का हाई है।

Silver Price: तेजी के प्रमुख कारण

चांदी की कीमतों में इस उछाल के पीछे कई ठोस कारण हैं:

इंडस्ट्रियल डिमांड में भारी बढ़ोतरी: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), 5जी टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर्स में चांदी की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। सप्लाई चेन में कमी से कीमतें आसमान छू रही हैं।

निवेशकों का रुझान: निवेशक कमोडिटी की ओर तेजी से मुड़ रहे हैं। सोने की मजबूती का असर चांदी पर भी पड़ा। ईटीएफ में भारी इनफ्लो और सेंट्रल बैंक खरीदारी ने तेजी को बल दिया।

ग्लोबल सप्लाई शॉर्टेज: दुनिया भर में चांदी की सप्लाई कम होने से भारतीय बाजार भी प्रभावित। कॉमेक्स पर रिकॉर्ड हाई ने घरेलू कीमतों को बूस्ट दिया।

रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से आयातित कमोडिटी महंगी हो गईं। रुपये का रिकॉर्ड लो होना बड़ा फैक्टर रहा।

ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी का असर: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की संभावित टैरिफ पॉलिसी से कंपनियां चांदी स्टॉक कर रही हैं। अमेरिका अपनी दो-तिहाई चांदी आयात करता है, इस डर से होर्डिंग बढ़ी और ग्लोबल कीमतें चढ़ीं।

Silver Price: विशेषज्ञों की राय

विश्लेषकों का मानना है कि चांदी की यह तेजी 2026 तक जारी रह सकती है। इंडस्ट्रियल डिमांड और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन से सप्लाई डेफिसिट बना रहेगा। हालांकि, ऊंचे स्तर पर वोलेटिलिटी और मुनाफावसूली की आशंका भी है। कुछ एक्सपर्ट्स चांदी को 2.10-2.20 लाख तक जाते देख रहे हैं, जबकि सपोर्ट लेवल 1.85-1.90 लाख के आसपास है। निवेशकों को सलाह है कि लॉन्ग टर्म में चांदी अच्छा विकल्प है, लेकिन शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतें।

Silver Price: बाजार पर असर

इस रिकॉर्ड ब्रेक से ज्वेलरी और इंडस्ट्री पर असर पड़ेगा। चांदी आधारित उत्पाद महंगे होंगे, लेकिन निवेश के लिहाज से यह आकर्षक बनी हुई है। सोने की तुलना में चांदी ने बेहतर परफॉर्म किया है, जो इसे ‘पुअर मैन्स गोल्ड’ से ‘स्मार्ट इन्वेस्टमेंट’ बना रहा है। कमोडिटी ट्रेडर्स अब नजरें अमेरिकी फेड रेट कट और ग्लोबल इकोनॉमिक डेटा पर टिकाए हुए हैं। चांदी की यह रैली बाजार में नई उम्मीद जगाती है।

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