Government Schemes: नौकरी के दौरान हर महीने मिलने वाली सैलरी से घर का खर्च आसानी से चलता रहता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का जरिया बंद हो जाता है। ऐसे में राशन, बिजली बिल, दवाइयों और दूसरे जरूरी खर्चों को पूरा करने के लिए पहले से वित्तीय योजना बनाना जरूरी है। अगर आपके पास जमा पूंजी है, तो कुछ सरकारी बचत योजनाओं में निवेश करके नियमित आमदनी का इंतजाम किया जा सकता है।
पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम (MIS), सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) ऐसे विकल्प हैं, जिन पर रिटायरमेंट की योजना बनाते समय विचार किया जा सकता है। हालांकि, इन योजनाओं में निवेश की शर्तें, भुगतान का तरीका और मिलने वाली रकम अलग-अलग होती है।
1. पोस्ट ऑफिस MIS: हर महीने मिलेगा ब्याज
पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम (MIS) उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो एकमुश्त रकम जमा करके हर महीने ब्याज के रूप में आय पाना चाहते हैं। इस योजना में निवेश की अवधि पांच साल होती है और मैच्योरिटी पर मूल रकम वापस मिल जाती है।
इसकी बताई गई सालाना ब्याज दर 7.4% के आधार पर गणना करें, तो 5 लाख रुपये के निवेश पर हर महीने लगभग 3,083 रुपये ब्याज मिलेगा। वहीं, 9 लाख रुपये जमा करने पर करीब 5,550 रुपये प्रति माह मिल सकते हैं।
इस योजना में एकल खाते के लिए अधिकतम निवेश सीमा 9 लाख रुपये और संयुक्त खाते के लिए 15 लाख रुपये है। यदि पति-पत्नी संयुक्त खाते में 15 लाख रुपये जमा करते हैं, तो उन्हें लगभग 9,250 रुपये प्रति माह ब्याज मिल सकता है।
इस तरह MIS उन निवेशकों के लिए एक विकल्प है, जिन्हें नियमित अंतराल पर आय चाहिए और जो बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा निवेश नहीं करना चाहते। निवेश करने से पहले मौजूदा ब्याज दर और लागू नियमों की पुष्टि जरूर करें।
2. SCSS: वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत का विकल्प
सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई है। सामान्य तौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग इसमें निवेश कर सकते हैं। कुछ निर्धारित शर्तों के तहत 55 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सेवानिवृत्त व्यक्ति भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
इस योजना की बताई गई सालाना ब्याज दर 8.2% है। इसमें अधिकतम 30 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। MIS के विपरीत, SCSS में ब्याज हर महीने के बजाय तीन महीने में एक बार दिया जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति 10 लाख रुपये निवेश करता है, तो 8.2% की दर से सालाना लगभग 82,000 रुपये ब्याज मिलेगा। यानी हर तिमाही करीब 20,500 रुपये मिलेंगे।
वहीं, 30 लाख रुपये के निवेश पर सालाना ब्याज लगभग 2.46 लाख रुपये हो सकता है। इस हिसाब से हर तीन महीने में करीब 61,500 रुपये मिलेंगे। इसे मासिक आधार पर देखें, तो यह औसतन 20,500 रुपये बैठता है। हालांकि, वास्तविक भुगतान हर महीने नहीं, बल्कि तिमाही आधार पर होगा।
3. NPS: रिटायरमेंट के बाद पेंशन की तैयारी
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) उन लोगों के लिए एक विकल्प है, जो नौकरी या कामकाजी जीवन के दौरान नियमित निवेश करके रिटायरमेंट के बाद पेंशन की व्यवस्था करना चाहते हैं। इसमें जमा रकम निवेश की जाती है, इसलिए मिलने वाला रिटर्न बाजार के प्रदर्शन और चुने गए निवेश विकल्पों पर निर्भर करता है।
रिटायरमेंट के समय खाते में जमा रकम का एक हिस्सा लागू नियमों के अनुसार एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि निर्धारित हिस्सा एन्युटी खरीदने में लगाया जाता है। एन्युटी के बदले नियमित पेंशन मिलती है। वास्तविक निकासी और एन्युटी से जुड़े नियम योजना की श्रेणी तथा उस समय लागू प्रावधानों पर निर्भर करेंगे।
उदाहरण के तौर पर, यदि रिटायरमेंट के समय NPS खाते में 50 लाख रुपये जमा हैं और मान लें कि 40% रकम यानी 20 लाख रुपये एन्युटी में लगाई जाती है, तो 6% सालाना एन्युटी दर के उदाहरण के आधार पर लगभग 1.20 लाख रुपये सालाना पेंशन बन सकती है। यह रकम करीब 10,000 रुपये प्रति माह के बराबर होगी।
ध्यान रखें कि 6% की दर केवल उदाहरण के लिए है। वास्तविक पेंशन एन्युटी प्रदाता, चुने गए विकल्प और उस समय उपलब्ध दरों के अनुसार कम या ज्यादा हो सकती है।
किस योजना से कितनी आमदनी होगी?
रिटायरमेंट के बाद नियमित आय पाने के लिए इन तीनों योजनाओं की भूमिका अलग-अलग है। MIS में हर महीने ब्याज मिलता है, SCSS में तिमाही आधार पर ब्याज दिया जाता है, जबकि NPS से मिलने वाली पेंशन आपके जमा फंड और एन्युटी की शर्तों पर निर्भर करती है।
निवेश का चुनाव करने से पहले अपने मासिक खर्च, उपलब्ध बचत, उम्र और पैसों की जरूरत का आकलन करें। उदाहरण के लिए, यदि रिटायरमेंट के बाद हर महीने 20,000 रुपये की जरूरत है, तो यह हिसाब लगाना जरूरी है कि चुनी गई योजना से कितनी आय होगी और कितनी रकम की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ेगी।
ध्यान दें: ब्याज दरें और निवेश संबंधी नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। निवेश करने से पहले संबंधित सरकारी विभाग या पोस्ट ऑफिस से मौजूदा दरों, पात्रता और शर्तों की पुष्टि कर लें।
