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Friday, October 30, 2026
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बिहार की बेटी सबिता महतो ने 19,400 फीट की ऊंचाई पर 265 KM दौड़कर रचा इतिहास, जानें कौन हैं ये धाविका

बिहार : सारण जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय एंड्योरेंस एथलीट सबिता महतो ने विश्व की सबसे कठिन चुनौतियों में शामिल एक और साहसिक अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर देश का नाम रोशन किया है। सबिता ने लद्दाख के लेह से विश्व के सबसे ऊंचे मोटरेबल दर्रों में शामिल मिग ला पास (लगभग 19,400 फीट) तक 265 किलोमीटर की अल्ट्रा रन मात्र छह दिनों में पूरी कर नया इतिहास रच दिया। उनकी यह उपलब्धि केवल खेल जगत की सफलता नहीं, बल्कि साहस, धैर्य, संकल्प और महिला सशक्तिकरण का प्रेरणादायी उदाहरण भी है।

विपरीत परिस्थितियों में पूरा किया चुनौतीपूर्ण अभियान
यह अभियान बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पूरा किया गया। ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, हड्डियां जमा देने वाली ठंड, तेज बर्फीली हवाएं, लगातार बदलता मौसम, दुर्गम और निर्जन रास्ते तथा कठिन चढ़ाई जैसी परिस्थितियां किसी भी एथलीट की शारीरिक और मानसिक क्षमता की कड़ी परीक्षा लेती हैं। इन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए सबिता महतो ने छह दिनों में अपनी मंजिल हासिल कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

संघर्षों से निकलकर बनीं प्रेरणा

सारण जिले के पानापुर प्रखंड के दियारा क्षेत्र की रहने वाली सबिता महतो का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। एक साधारण परिवार में जन्मी सबिता ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। आर्थिक कठिनाइयों के बीच उन्होंने खेल को अपना जुनून बनाया और लगातार कठिन अभ्यास के दम पर खुद को देश की प्रमुख एंड्योरेंस एथलीटों की कतार में खड़ा कर दिया। आज उनकी सफलता लाखों युवाओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

पहले भी दर्ज कर चुकी हैं कई ऐतिहासिक उपलब्धियां
सबिता महतो इससे पहले भी कई उल्लेखनीय उपलब्धियां अपने नाम कर चुकी हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने नई दिल्ली से विश्व के सबसे ऊंचे मोटरेबल रोड उम्लिंग ला पास तक लगभग 1,200 किलोमीटर की सोलो साइक्लिंग पूरी कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी। इसके बाद उन्होंने मनाली से उम्लिंग ला पास तक लगभग 570 किलोमीटर की अल्ट्रा रन भी सफलतापूर्वक पूरी की। इसके अलावा उन्होंने माउंट एवरेस्ट अभियान में भी हिस्सा लेकर विपरीत परिस्थितियों में अपने साहस और अदम्य इच्छाशक्ति का परिचय दिया। अब मिग ला पास तक की यह अल्ट्रा रन उनके साहसिक अभियानों में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है।

‘बेटियों को सपनों के लिए संघर्ष करना चाहिए’
सबिता महतो ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल एक कठिन अल्ट्रा रन पूरी करना नहीं था, बल्कि देश के युवाओं और विशेष रूप से बेटियों को यह संदेश देना था कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और आत्मविश्वास अटूट हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि हर युवा को अपने सपनों के लिए लगातार संघर्ष करना चाहिए, क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो चुनौतियों से डरने के बजाय उनका सामना करते हैं।

परिवार, सेना और सहयोगी संस्थाओं का जताया आभार
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय सबिता महतो ने अपने परिवार, टीम, शुभचिंतकों और सहयोगियों को दिया। उन्होंने विशेष रूप से सुलभ इंटरनेशनल और पाथ फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विश्वास, सहयोग और निरंतर प्रोत्साहन के बिना यह अभियान संभव नहीं हो पाता। उन्होंने अभियान के दौरान सहयोग देने वाली भारतीय सेना, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) के प्रोजेक्ट हिमांक, लद्दाख प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, पुलिस तथा क्षेत्र में कार्यरत सभी सरकारी एजेंसियों और अधिकारियों का भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं के सहयोग के कारण ही इतने दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षित साहसिक अभियानों का संचालन संभव हो पाता है।

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