रायपुर : छत्तीसगढ़ के आंबेडकर अस्पताल समेत प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। कर्मचारियों की कमी के चलते अस्पतालों में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है और मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब चार साल पहले 6300 से अधिक पदों पर सीधी भर्ती को शासन की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन आरक्षण रोस्टर तय नहीं होने के कारण भर्ती प्रक्रिया अब तक आगे नहीं बढ़ पाई है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग को भर्ती के लिए रोस्टर तय करना है। अधिकारियों के स्तर पर संभाग और जिला स्तर के रोस्टर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से प्रक्रिया अटकी हुई है। वहीं, इस साल शुरू हुए पांच नए मेडिकल कॉलेजों के लिए भी नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के पद स्वीकृत किए गए हैं। इन पदों को जोड़ने के बाद रिक्तियों की संख्या 7500 से अधिक पहुंचने की संभावना है।
4 साल से भर्ती का इंतजार
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में एक साथ भर्ती करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में योजना तैयार की थी। शासन से इसकी मंजूरी भी मिल गई थी। डीएमई कार्यालय के प्रस्ताव के आधार पर कर्मचारी चयन मंडल (व्यापमं) ने भी सीधी भर्ती के लिए सहमति दे दी थी।
यह प्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की पहली बड़ी सीधी भर्ती होगी। इसके जरिए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरा जाना है। हालांकि भर्ती में लगातार हो रही देरी के कारण तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में निराशा बढ़ रही है।
स्टाफ की कमी से बढ़ा वर्कलोड
नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के पद तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। पद खाली होने के कारण रायपुर समेत प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में काम प्रभावित हो रहा है।
आंबेडकर अस्पताल सहित कई अस्पतालों में स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। स्टाफ नर्सों को कलेक्टर दर पर भुगतान किया जा रहा है। इसके बावजूद आंबेडकर अस्पताल में 200 से अधिक अतिरिक्त नर्सों की जरूरत बताई जा रही है। कम कर्मचारियों में अधिक काम होने के कारण अस्पताल के स्टाफ पर दबाव बढ़ रहा है और कई बार मरीजों व उनके परिजनों के साथ विवाद की स्थिति भी बन रही है।
स्टाफ नर्स से लेकर टेक्नीशियन तक पद शामिल
व्यापमं के माध्यम से होने वाली भर्ती में स्टाफ नर्स के अलावा रेडियोग्राफर, ओटी टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, आया सहित कई अन्य पद शामिल हैं।
अधिकारियों के मुताबिक इन पदों पर नियमित भर्ती के साथ-साथ संविदा के जरिए भी नियुक्ति नहीं की जा सकती, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर का पालन करना अनिवार्य है। वर्ष 2022 में प्रदेश में 58 फीसदी आरक्षण व्यवस्था लागू थी, जिसमें अनुसूचित जनजाति के लिए 32 फीसदी, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14 फीसदी और अनुसूचित जाति के लिए 12 फीसदी आरक्षण निर्धारित था।
एक मेडिकल कॉलेज-अस्पताल के लिए 795 पद स्वीकृत
राज्य शासन ने एक मेडिकल कॉलेज के लिए 324 और उससे संबद्ध अस्पताल के लिए 471 पदों को मंजूरी दी है। यानी कुल 795 पदों पर भर्ती की जा सकती है। हालांकि कुछ मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में यह संख्या बढ़कर 825 पद तक हो सकती है।
इन पदों पर भर्ती होने के बाद नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। हालांकि भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। फिलहाल रोस्टर तय होने का इंतजार है, जिसके बाद व्यापमं के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।
