Team India Head Coach: राहुल द्रविड़ के बाद जब टीम इंडिया के नए हेड कोच की तलाश शुरू हुई थी, तब वीवीएस लक्ष्मण का नाम भी सबसे आगे चल रहा था। लक्ष्मण लंबे समय से भारतीय टीम के साथ जुड़े हुए थे और कई मौकों पर अंतरिम कोच की भूमिका भी निभा चुके थे। इसके बावजूद 2024 में उन्हें स्थायी हेड कोच नहीं बनाया गया। अब पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने खुद इस फैसले के पीछे की वजह बताई है। भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने जा रही है। पहला मुकाबला गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए दोनों टीमों के लिए यह सीरीज काफी अहम है। इसी बीच वीवीएस लक्ष्मण ने बताया कि उन्होंने 2024 में राहुल द्रविड़ के जाने के बाद भारतीय टीम का स्थायी हेड कोच बनने का प्रस्ताव क्यों स्वीकार नहीं किया।
BCCI ने लक्ष्मण को दी आजादी
लक्ष्मण ने बताया कि BCCI के तत्कालीन सचिव जय शाह और मौजूदा सचिव देवजीत सैकिया ने उन्हें अपने विजन के मुताबिक काम करने की पूरी आजादी दी। इसी वजह से उन्होंने हेड कोच बनने के बजाय बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यानी CoE में अपनी भूमिका जारी रखने का फैसला किया। वीवीएस ने कहा कि उन्होंने BCCI से दो साल तक CoE में अपना कार्यकाल बढ़ाने और हेड कोच का पद नहीं संभालने की प्रतिबद्धता जताई थी। लक्ष्मण ने यह भी बताया कि 2024 में उन्हें मुख्य कोच बनने के लिए संपर्क किया गया था।लक्ष्मण के मुताबिक, उनका ध्यान CoE में एक मजबूत और विश्वस्तरीय कार्यक्रम तैयार करने पर था। उन्होंने कहा कि अपने दो साल के कार्यकाल के बाद आगे बढ़ने से पहले वह संस्थान के अलग-अलग विभागों के लिए जरूरी SOP यानी मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार करके जाना चाहते थे।
CoE में तैयार किया वर्ल्ड क्लास प्रोग्राम
लक्ष्मण ने कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि उन्हें CoE में काम करने का मौका मिला और टीम के सहयोग से वहां एक विश्वस्तरीय कार्यक्रम स्थापित किया जा सका। उनके मुताबिक, BCCI ने उन्हें अपने विजन को लागू करने की स्वतंत्रता दी और मौजूदा सचिव भी लगातार उन्हें वही समर्थन दे रहे हैं। यही कारण रहा कि उन्होंने टीम इंडिया के स्थायी हेड कोच का पद लेने के बजाय CoE में अपनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। भारतीय टीम अब श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उतरने की तैयारी कर रही है। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत को अपने अगले नौ में से कम से कम 6 टेस्ट जीतने होंगे। ऐसे में 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाला मुकाबला भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
