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Friday, October 30, 2026
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Price Change 1st August: 1 अगस्त से महंगाई का बड़ा झटका! चाय, साबुन, हेयर ऑयल से लेकर टीवी-फ्रिज और कार तक बढ़ सकते हैं दाम

Price Change 1st August: अगस्त की शुरुआत आम लोगों के लिए खर्च बढ़ाने वाली हो सकती है। आने वाले दिनों में बाजार में होने वाले बदलाव का असर घर के बजट, खरीदारी की प्लानिंग और फेस्टिव सीजन की तैयारियों पर दिखाई दे सकता है। ऐसे में सबसे पहले जानते हैं कि रोजमर्रा की किन चीजों के लिए लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।

रोजमर्रा के सामान से इलेक्ट्रॉनिक्स तक बढ़ेंगे दाम

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 1 अगस्त से चाय, हेयर ऑयल और साबुन जैसे एफएमसीजी प्रोडक्ट्स की कीमतें 6 से 8 परसेंट तक बढ़ सकती हैं। कच्चे माल, पाम ऑयल और पैकेजिंग मटेरियल महंगा होने से कंपनियों की कॉस्ट बढ़ गई है। इसका सीधा असर परिवारों के हर महीने के खर्च पर पड़ सकता है। रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और टीवी जैसे होम अप्लायंसेज भी 4 से 6 परसेंट तक महंगे हो सकते हैं। स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ने की भी आशंका है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में मेमोरी चिप के दाम तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। ऐसे में नया इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के लिए लोगों को ज्यादा बजट रखना पड़ सकता है।

नई कार खरीदना भी होगा महंगा

ऑटोमोबाइल कंपनियां बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट का बोझ ग्राहकों पर डालने की तैयारी कर रही हैं। मारुति सुजुकी अगस्त से अपनी गाड़ियों के दाम 30 हजार रुपये तक बढ़ा सकती है। होंडा कार्स और मर्सिडीज-बेंज भी अगले कुछ हफ्तों में कीमतें बढ़ाने का फैसला ले चुकी हैं।

ग्लोबल टेंशन के बीच फेज में बढ़ेंगे दाम

कच्चे तेल और पाम ऑयल की ग्लोबल कीमतों में तेजी के साथ पश्चिम एशिया में चल रही जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। समुद्री माल ढुलाई महंगी होने और डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव के कारण इंपोर्ट होने वाला कच्चा माल भी महंगा हो गया है। इससे कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ी है। कंपनियां एक साथ पूरी कीमत बढ़ाने के बजाय अलग-अलग फेज में दाम बढ़ा सकती हैं। पहले बड़े और प्रीमियम प्रोडक्ट्स महंगे होंगे, जबकि छोटे पैकेट के दाम बाद में बढ़ाए जा सकते हैं। कंपनियों का कहना है कि जून क्वार्टर में बढ़ी कॉस्ट का आधा बोझ ही ग्राहकों पर डाला गया था। बाकी घाटा पूरा करने के लिए सितंबर क्वार्टर में कीमतें 2 से 5 परसेंट तक और बढ़ सकती हैं। रेडीमेड कपड़े बनाने वाली कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट्स के प्राइस रिवाइज करने की तैयारी में हैं।

जीडीपी से मिडिल क्लास बजट तक असर

एक ग्लोबल रिपोर्ट में 2026 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ के 6.6 परसेंट के अनुमान से धीमा पड़ने की आशंका जताई गई है। महंगाई दर भी 5.4 परसेंट के बेसलाइन से ऊपर जा सकती है। सीपीआई बास्केट में खाने-पीने के सामान की हिस्सेदारी 36.8 परसेंट है, इसलिए इसका बड़ा असर किचन बजट पर होगा। देश का 43 परसेंट से ज्यादा लेबर फोर्स खेती से जुड़ा है। इसलिए मौसम और बाजार में होने वाले बदलाव लोगों की खरीदने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। सीमित आमदनी के बीच चाय, साबुन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और कारों की बढ़ती कीमतें मिडिल क्लास की परेशानी बढ़ा सकती हैं। कंपनियों को उम्मीद है कि फेस्टिव सीजन से पहले यह आखिरी बड़ी बढ़ोतरी होगी और डिमांड पर ज्यादा नेगेटिव असर नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद परिवारों के लिए खर्च और बचत के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं होगा।

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