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Tuesday, August 4, 2026
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“हेल्दी” और “ऑर्गेनिक” दावों पर सख्ती: कई फूड कंपनियों को FSSAI का नोटिस जारी

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने उत्पादों को लेकर भ्रामक दावे करने वाली कंपनियों पर सख्ती की है. इसके तहत प्राधिकरण ने कई खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों और फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) को नोटिस भेज जवाब मांगा है. एफएसएसएआई के अनुसार, ये कंपनियां अपने उत्पादों के नाम, ब्रांडिंग और विज्ञापनों में जो दावे कर रही हैं उससे उपभोक्ता गुमराह हो सकता है. अधिकारियों के मुताबिक, कई कंपनियां अपने उत्पादों के नाम में हेल्दी, ऑर्गेनिक, वेगन, जीरो मैदा और विटामिन जैसे शब्दों का उपयोग कर रही हैं, जबकि पड़ताल में उत्पाद इन दावों के अनुरूप नहीं पाए गए. इतना ही नहीं, कुछ के पास जरूरी दस्तावेज भी नहीं मिले. यह खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत नहीं था, जिसकी वजह से प्राधिकरण ने कार्रवाई की है.

किन-किन चीजों पर हुई कार्रवाई?

1.हेल्दी मास्टर और विज़न टू सर्व-

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के अनुसार, इन ब्रांड नामों से उपभोक्ताओं को भ्रम हो सकता है कि यह प्रोडक्ट विशेष रूप से हेल्दी हैं, जबकि नाम उत्पाद की वास्तविक प्रकृति को सही तरीके से नहीं दर्शाते.

2. न्यूहर्ब्स ट्रू विटामिन-

एफएसएसएआई ने इसमें ‘ट्रू विटामिन’ शब्द को भ्रामक माना है. नियामक के अनुसार यह शब्द खाद्य नियमों में परिभाषित नहीं है और उपभोक्ताओं को गलत संदेश दे सकता है.

3. प्लांट बी-बेस्ड वीगन ब्रांड-

कंपनी ने अपने उत्पाद को वेगन बताया, जबकि नियामक के अनुसार उत्पाद को वेगन फूड के रूप में आवश्यक स्वीकृति और लाइसेंस अनुमोदन प्राप्त नहीं था, इसलिए यह दावा भ्रामक माना गया.

4. द हेल्थ फैक्ट्री मैदा-फ्री होल व्हीट ब्रेड-जीरो मैदा पिज्जा बेस-

एफएसएसएआई का कहना है कि उत्पाद में गेहूं का आटा और ग्लूटेन जैसे तत्व मौजूद हैं, जबकि दावा जीरो मैदा का किया गया है जो उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है.

5. ट्रूव्वी हेल्थी मिक्स वेजी चिप्स , हेल्दी रागी चिप्स और हेल्दी मूंग दाल चिप्स-

निर्माता ने उत्पादों के नाम में हेल्दी शब्द का इस्तेमाल किया है. लेकिन उत्पादों में अन्य सामग्री भी मौजूद है, इसलिए केवल हेल्दी बताना भ्रामक हो सकता है.

6. हेल्दी चॉइस हेल्दी फूड और हेल्दी लाइफ पोहा- 

एफएसएसएआई के अनुसार, इस तरह का नाम उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है और यह खाद्य नियमों के अनुरूप नहीं है.

7. इमामी हेल्दी एंड टेस्टी-

एफएसएसएआई ने ‘हेल्दी और टेस्टी’ नाम पर आपत्ति जताई है और कहा है कि यह नाम उत्पाद के बारे में भ्रामक धारणा बना सकता है.

8. हेल्थ एड-

एफएसएसएआई ने कहा कि ‘हेल्थ ऐड’ नाम भी उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य लाभ का ऐसी धारण बनाता है जो नियमों के अनुरूप नहीं है.

9. ऑर्गेनिक दावों पर भी सख्ती-

केंद्रीय नियामक ने ऑर्गेनिक विज़डम, शाइन ऑर्गेनिक, टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फ़ार्म्स और वर्ल्ड ऑफ़ ऑर्गेनिक जैसे उत्पादों के खिलाफ इसलिए कार्रवाई की क्योंकि उनके नाम में ऑर्गेनिक शब्द इस्तेमाल किया गया था, जबकि उनके पास आवश्यक एनपीओपी/पीजीएस प्रमाणन, एफएसएसएआई जैविक भारत लोगो या आवश्यक ऑर्गेनिक अनुमोदन नहीं था. ऐसे में ‘ऑर्गेनिक’ शब्द का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है.

10. अनार जूस और पैकेज्ड पानी पर भी आपत्ति-

एफएसएसएआई ने कहा कि Storia Juice Pomegranate उत्पाद के नाम से यह महसूस होता है कि यह प्रमुख रूप से अनार का जूस है, जबकि इसमें सिर्फ 4% अनार जूस कंसंट्रेट मौजूद है.

11. लोटा बॉटर– 

कंपनी ने पैकेज्ड पानी में खनिज मिलाने का दावा किया है. लेकिन नियम के मुताबिक केवल पोषक तत्वों की भरपाई के लिए जो तत्व जोड़े गए हों, उन्हें विशेष ‘अतिरिक्त पोषक तत्व’ के रूप में प्रचारित नहीं किया जा सकता.

प्राधिकरण ने सभी संबंधित कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे खाद्य सुरक्षा कानूनों का सख्ती से पालन करें और अपने उत्पादों के नाम, लेबल और विज्ञापनों में ऐसे दावे न करें जो उपभोक्ताओं को भ्रमित करें. नियामक का कहना है कि उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी देना कंपनियों की जिम्मेदारी है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल हेल्दी, ऑर्गेनिक, वेगन, जीरो मैदा और विटामिन जैसे शब्दों का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है. ऐसे में इस तरह के भ्रामक दावों पर लगाम लगाने और ग्राहकों के हितों की रक्षा करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है.

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