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Monday, September 28, 2026
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Delhi High Court School Fee Hike: दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई अब होगी और महंगी, हाईकोर्ट ने फीस बढ़ाने की दी इजाजत, शिक्षा निदेशालय का आदेश किया रद्द

Delhi High Court School Fee Hike: दिल्ली हाईकोर्ट ने शिक्षा निदेशालय (DoE) को बड़ा झटका देते हुए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के प्राइवेट स्कूल और बिना सरकारी सहायता वाले मान्यता प्राप्त स्कूलों को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय से पहले से अनुमति या मंजूरी लेने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की बेंच ने साफ किया कि पूर्व अनुमति केवल उसी स्थिति में जरूरी है, जब कोई स्कूल चालू शैक्षणिक सत्र के बीच में अचानक फीस बढ़ाना चाहता हो। कोर्ट ने यह कहा कि किसी स्कूल के खाते में केवल ‘सरप्लस फंड’ होने का मतलब यह कतई नहीं निकाला जा सकता कि वह स्कूल शिक्षा का व्यावसायीकरण कर रहा है।

फीस बढ़ाने की स्वायत्तता पर हाईकोर्ट की मुहर

हालांकि, बेंच ने अपने निर्देश में यह भी साफ कर दिया कि DoE को सौंपे गए बयानों में संबंधित स्कूलों द्वारा प्रस्तावित फीस में बढ़ोतरी केवल 2027 के शैक्षणिक सत्र से ही लागू होगी। बेंच ने कहा कि किसी भी स्कूल को पिछले शैक्षणिक सत्रों के लिए फीस या अन्य चार्जेस का कोई भी बकाया पिछली तारीख से मांगने या वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

DoE का काम स्कूलों के कामकाज को ‘माइक्रो-मैनेज’ करना नहीं

बेंच ने यह साफ किया कि जो स्कूल किसी एकेडमिक सेशन की शुरुआत में फीस बढ़ाते हैं, उन्हें सेशन शुरू होने से पहले DoE को प्रस्तावित फीस का एक स्टेटमेंट जमा करना होगा। हालांकि, जस्टिस भंभानी ने कहा कि प्राइवेट, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों को अपनी वित्तीय आजादी का अधिकार बना रहेगा। शिक्षा निदेशालय का काम स्कूलों के रोजमर्रा के वित्तीय कामकाज को डिक्टेट करना या ‘माइक्रो-मैनेज’ करना नहीं है।

DoE के रेगुलेटरी अधिकार बहुत सीमित

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निजी, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों में फीस तय करने के मामले में DoE के रेगुलेटरी अधिकार बहुत सीमित हैं और वे आम तौर पर दखल देने की इजाजत नहीं देते। कोर्ट ने कहा कि किसी स्कूल के खातों में सिर्फ ज्यादा पैसे होने के आधार पर DoE यह नतीजा नहीं निकाल सकता कि स्कूल कमर्शियलाइजेशन (मुनाफाखोरी) कर रहा है।

DoE को 2 महीने में प्रस्तावों पर लेना होगा फैसला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा कि जहां कोई स्कूल चल रहे एकेडमिक सेशन के दौरान फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखता है, तो उसे अपना प्रस्ताव DoE को उस तारीख से कम से कम दो महीने पहले जमा करना होगा, जिस तारीख से बदली हुई फीस लागू करने की मांग की जा रही है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि DoE को ऐसे प्रस्ताव पर उसी दो महीने के समय में फैसला करना होगा, ऐसा न करने पर प्रस्ताव को मंजूर माना जाएगा।

137 प्राइवेट स्कूलों की याचिका पर आया फैसला

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दिल्ली के 137 प्राइवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन स्कूलों ने वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच समय-समय पर फीस बढ़ाने के प्रस्ताव दिए थे, जिन्हें शिक्षा निदेशालय (DoE) ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने सरकार के उन आदेशों को ‘गलतफहमी पर आधारित’ बताते हुए पूरी तरह से रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ किया कि जिन स्कूलों को सरकारी जमीन ‘लैंड क्लॉज’ (जमीन आवंटन की शर्त) के तहत मिली है, उन पर भी सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए यही नियम लागू होगा।

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