41.7 C
New Delhi
Monday, June 15, 2026
HomeदेशGas Battery: हवा से होगी अब रोशनी! वैज्ञानिकों ने बनाई एयर पॉल्यूशन...

Gas Battery: हवा से होगी अब रोशनी! वैज्ञानिकों ने बनाई एयर पॉल्यूशन से बिजली बनाने वाली ‘गैस बैटरी’

Gas Battery: वैज्ञानिकों ने कमाल करते हुए एक नया डिवाइस बना लिया है, जो एयर पॉल्यूशन को बिजली में बदल सकता है. इस डिवाइस को गैस कैप्चर एंड इलेक्ट्रिसिटी जनरेटर (GCEC) नाम दिया गया है. यह कार्बन डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड जैसी गैसों को कैप्चर कर उन्हें यूजेबल एनर्जी में बदल देता है. अगर आसान भाषा में समझा जाए तो यह एक गैस बैटरी है, जो गैस की मदद से बिजली पैदा करेगी. यह डिवाइस क्लाइमेट चेंज से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. यह न सिर्फ हवा से प्रदूषण को खत्म कर देगा बल्कि उसे बिजली जैसे एक वैल्यूबल रिसोर्स में भी बदल देगा.

इस डिवाइस में क्या नया है?

हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर, यूटिलाइज और स्टोर करने की टेक्नोलॉजी पहले से मौजूद है. यह टेक्नोलॉजी इस जहरीली हवा को सोखकर स्टोर कर लेती है, जिससे यह वायुमंडल में प्रवेश नहीं कर पाती, लेकिन इस टेक्नोलॉजी को ऑपरेट करने के लिए काफी एनर्जी की जरूरत पड़ती है. इस कारण इसकी एफिशिएंसी पर भी सवाल उठते हैं और इसे यूज करना महंगा भी है. अब नई गैस बैटरी ने यह पूरा गेम ही बदल दिया है. यह गैस कैप्चर करने के लिए एनर्जी यूज करने की बजाय इस प्रोसेस से बिजली पैदा कर रही है.

कैसे काम करती है गैस बैटरी?

कार्बन डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड जैसे पॉल्यूटेंट इस डिवाइस के कॉन्टैक्ट में आएंगे, वो इसके सरफेस से चिपक जाएंगे. इससे डिवाइस के अंदर चार्ज्ड पार्टिकल्स का मूवमेंट शुरू हो जाएगा. इससे बिना किसी एक्सटर्नल पावर सोर्स के इलेक्ट्रिसिटी का एक स्टेबल फ्लो शुरू हो जाएगा. इस डिवाइस को कॉर्बन बेस्ड मैटेरियल और हाइड्रोजेल से मिलाकर बनाया गया है. इस डिवाइस में पॉल्यूशन ही एक फ्यूल की तरह काम करता है, जिसकी मदद से बिजली पैदा होती रहती है.

कहां यूज हो सकती है गैस बैटरी?

इस गैस बैटरी को उन डिवाइसेस को पावर देने के लिए यूज किया जा सकता है, जिन्हें बहुत कम एनर्जी की जरूरत होती है. यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइसेस को चलाने में भी काम आ सकती है, जिन्हें कम बिजली की जरूरत पड़ती है, लेकिन इनका यूज बढ़ता जा रहा है. इंडस्ट्री की बात करें तो ज्यादा धुंआ छोड़ने वाले प्लांट्स में इसका इस्तेमाल हो सकता है. यह प्रदूषण हटाने के साथ-साथ वहां एक्स्ट्रा पावर भी जनरेट करेगी. रिसर्चर का मानना है कि इससे सस्टेनेबल एनर्जी सिस्टम बनाने में मदद मिल सकती है और यह देशों को उनके कार्बन न्यूट्रल टारगेट को हासिल करने में हेल्प कर सकती है.

RELATED ARTICLES
New Delhi
clear sky
41.7 ° C
41.7 °
41.7 °
18 %
5.1kmh
0 %
Mon
42 °
Tue
43 °
Wed
41 °
Thu
38 °
Fri
40 °

Most Popular