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Saturday, September 26, 2026
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Tuberculosis In Women: क्यों ‘साइलेंट किलर’ बनता जा रहा टीबी, जानिए इसके खतरनाक असर

Tuberculosis In Women: टीबी अक्सर फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन यह सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं है. खासकर महिलाओं में यह अब एक साइलेंट किलर के रूप में उभर रहा है, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर साफ नजर नहीं आते और बीमारी लंबे समय तक छिपी रह जाती है. टीबी एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो हवा के जरिए फैलता है.  जब इंफेक्टेड व्यक्ति खांसता, छींकता या थूकता है, तो इसके बैक्टीरिया दूसरे लोगों तक पहुंच सकते हैं. हालांकि यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो सकती है, लेकिन समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है,

महिलाओं में टीवी की बीमारी

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट cloudninecare की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं में टीबी का एक खास रूप होता है फीमेल जेनिटल टीबी, जो प्रजनन अंगों को प्रभावित करता है. यह बीमारी ज्यादा खतरनाक इसलिए मानी जाती है क्योंकि इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते, कई बार महिलाओं को पता ही नहीं चलता कि वे इस इंफेक्शन की शिकार हैं, और जब तक पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है.

कौन से अंग होते हैं प्रभावित?

यह इंफेक्शन फेलोपियन ट्यूब, गर्भाशय, ओवरी और सर्विक्स जैसे अंगों को प्रभावित कर सकता है. सबसे ज्यादा असर फेलोपियन ट्यूब पर देखा जाता है, जिससे गर्भधारण में दिक्कतें आने लगती हैं. कई मामलों में यह बीमारी बांझपन का कारण भी बन जाती है, जो इसका सबसे बड़ा असर माना जाता है. इस बीमारी के लक्षण बहुत सामान्य हो सकते हैं, जैसे पेल्विक पेन, पीरियड्स में गड़बड़ी, ज्यादा या कम ब्लीडिंग, या असामान्य डिस्चार्ज, यही वजह है कि इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या किसी और समस्या समझ लिया जाता है.

क्या होते हैं इसके लक्षण?

टीबी के कुछ सामान्य लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना और भूख न लगना. लेकिन क्योंकि ये लक्षण कई अन्य बीमारियों में भी दिखते हैं, इसलिए सही पहचान करना मुश्किल हो जाता है. इसका खतरा उन महिलाओं में ज्यादा होता है जो कमजोर इम्यूनिटी, डायबिटीज, HIV या खराब जीवन स्थितियों में रहती हैं, भीड़भाड़, पोषण की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी इसके फैलने का बड़ा कारण बनते हैं.  अगर समय रहते इलाज न मिले, तो यह बीमारी न सिर्फ प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि लाइफ क्वालिटी को भी खराब कर देती है. हालांकि अच्छी बात यह है कि एंटीबायोटिक्स के जरिए इसका इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए पूरा कोर्स लेना जरूरी होता है.

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