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Wednesday, September 30, 2026
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Solar Eclipse 2026: इस साल का पहला सूर्य ग्रहण कब है? जानिए 17 फरवरी को ‘रिंग ऑफ फायर’ भारत में दिखेगा या नहीं

Solar Eclipse 2026: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में ही 17 फरवरी दिन मंगलवार को पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में घटित होगा. खगोलीय दृष्टि से यह एक ‘वलयाकार’ सूर्य ग्रहण है, जिसे दुनिया भर में ‘रिंग ऑफ फायर’ के नाम से भी जाना जाता है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या इस खगोलीय घटना का नजारा भारत में दिखेगा और क्या धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल यहां प्रभावी होगा.

क्या भारत में दिखेगा पहला सूर्य ग्रहण?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कल लगने वाला साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी इलाके में नहीं दिखाई देगा. भारत में नजर न आने के कारण इसका सूतक काल भी नहीं माना जाएगा. ज्योतिषियों के अनुसार, कल के दिन मंदिर के दरवाजे खुले रहेंगे और सामान्य दिनों की तरह ही श्रद्धालु ईश्वर का पूजा-पाठ कर सकेंगे.

कल कितने बजे सूर्य ग्रहण लगेगा?

भारतीय समयानुसार, 17 फरवरी 2026 को लगने वाला साल का पहला सूर्य ग्रहण दोपहर 3:26 बजे शुरू होकर शाम 7:57 बजे तक रहेगा. इस ग्रहण का चरम समय शाम 5:42 बजे होगा जब आसमान में इसका दुर्लभ दृश्य देखा जा सकेगा. इस समय सूर्य ‘रिंग ऑफ फायर’ जैसा दिखाई देगा. ऐसा अद्भुत नजारा कभी-कभी ही देखने को मिलता है.

साल का पहला सूर्य ग्रहण कहां दिखाई देगा?

‘वलयाकार’ सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई न देकर दूसरे क्षेत्रों और देशों में दिखाई देगा. ज्योतिषियों के अनुसार, यह ग्रहण अंटार्कटिका के कई हिस्सों में दिखाई देने वाला है. वहीं दक्षिण महासागर के आसपास के कई इलाकों में भी यह दिखाई देगा,जहां स्थानीय लोगों को यह आकाशीय दुर्लभ नज़ारा देखने को मिलेगा. इन क्षेत्रों के अलावा, साल का पहला सूर्य ग्रहण साउथ अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे जैसे देशों में बिना किसी बाधा के साफ़-साफ़ दिखाई देगा.

रिंग ऑफ फायर क्या होता है?

  • कई लोग जानना चाहते हैं कि ‘रिंग ऑफ फायर’ आखिर क्या है?
  • नासा (NASA) के अनुसार, यह तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से काफी दूर होता है.
  • दूर होने की वजह से चंद्रमा छोटा दिखाई देता है और सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता.
  • ऐसे में चंद्रमा सूर्य के ठीक बीच में आ जाता है, जिससे सूर्य का केवल किनारा ही चमकता हुआ दिखता है.
  • यह चमकता हुआ किनारा आग की एक सुनहरी अंगूठी जैसा लगता है, इसीलिए इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहते हैं.
  • वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण के समय सूरज, चंद और धरती बिल्कुल एक सीधी रेखा में आ जाते हैं.
  • इस दौरान चंद्रमा सूरज के बीचों-बीच वाले हिस्से को पूरी तरह कवर कर लेता है.
  • इसके कारण सूरज का बाहरी हिस्सा एक चमकदार अंगूठी (Ring) की तरह चमकता हुआ नजर आता है.

इस साल का सूर्य ग्रहण क्यों खास है?

ज्योतिषीय दृष्टि से साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा, जिस कारण इसे बहुत विशेष माना जा रहा है. इस दौरान कुंभ राशि में सूर्य के अलावा राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी विराजमान रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब राहु और सूर्य एक साथ किसी राशि में गोचर करते हैं, तब ‘ग्रहण योग’ का निर्माण होता है. कुंभ राशि में राहु और सूर्य की इस युति को ज्योतिषीय गणना के अनुसार अशुभ माना जाता है.

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