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Monday, February 16, 2026
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Rajasthan News : आज से जयपुर में शराब नहीं मिलेगी, जानिए अचानक बेमियादी शराबबंदी के पीछे की वजह

Rajasthan News : पिंक सिटी जयपुर में आज से मदिराप्रेमियों को खाली हाथ लौटना पड़ सकता है। राजस्थान लिकर वेलफेयर सोसाइटी के आह्वान पर शहर के तमाम शराब ठेकेदारों ने अपनी दुकानें बंद रखने का ऐलान किया है। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से पुलिसिया हस्तक्षेप और दुकान बंद करने के समय को लेकर है। व्यापारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक दुकानें नहीं खुलेंगी।

पुलिस का ‘समय से पहले’ दबाव

सोसायटी के अध्यक्ष नीलेश मेवाड़ा के अनुसार, वर्तमान नियम के मुताबिक शराब की दुकानें रात 8 बजे तक खुलने का प्रावधान है। लेकिन आरोप है कि पुलिसकर्मी शाम 7:30 बजे से ही दुकानों पर पहुंचकर शटर गिराने का दबाव बनाना शुरू कर देते हैं।

  • व्यापारियों का तर्क: “शाम का समय ही बिक्री का मुख्य समय होता है। अगर आधे घंटे पहले ही पुलिस ग्राहकों को भगा देगी और दुकान बंद कराएगी, तो हम सरकार द्वारा तय ‘गारंटी लक्ष्य’ (Sales Target) कैसे पूरा करेंगे?”
  • हस्तक्षेप: व्यापारियों ने जिला आबकारी अधिकारी को सौंपे जाने वाले ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि पुलिस की इस बेवजह कार्रवाई से उन पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

नई आबकारी नीति 2026-27: ‘टारगेट’ का बोझ

हड़ताल का दूसरा बड़ा कारण हाल ही में जारी हुई संशोधित आबकारी नीति है। भजनलाल सरकार ने नई नीति में कई कड़े प्रावधान किए हैं:

  • गारंटी राशि में 12.5% की वृद्धि: ठेके रिन्यू कराने के लिए गारंटी राशि में साढ़े 12 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
  • बिक्री का दबाव: ठेकेदारों को पहले के मुकाबले ज्यादा शराब बेचने का टारगेट दिया गया है। यदि टारगेट पूरा नहीं होता, तो भारी पेनल्टी (जुर्माना) लगाने का प्रावधान है।

समय बढ़ने की मांग

शराब कारोबारियों की एक मांग दुकानों को बंद करने के निर्धारित समय को लेकर भी है। उनकी मांग है कि दुकान बंद करने का समय रात 8 बजे से बढ़ाकर 10 या 11 बजे किया जाए, ताकि वे घाटे से उबर सकें।

350 दुकानों पर ताले, करोड़ों का राजस्व दांव पर

जयपुर शहर में लगभग 350 शराब की दुकानें हैं। इन सभी के बंद होने से न केवल आम जनता को परेशानी होगी, बल्कि सरकार को मिलने वाले राजस्व (Revenue) को भी प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान होगा। लिकर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जयपुर में उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो इस आंदोलन को पूरे राजस्थान में फैलाया जाएगा।

आबकारी विभाग और पुलिस का पक्ष

दूसरी तरफ, पुलिस प्रशासन का तर्क है कि रात 8 बजे के बाद शराब की दुकानों के बाहर जमावड़े से कानून-व्यवस्था (Law & Order) बिगड़ती है और अपराधों में बढ़ोतरी होती है। आबकारी विभाग अब बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है ताकि राजस्व का नुकसान न हो।

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