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14 या 15 जनवरी? मकर संक्रांति की सही तारीख को लेकर न हों कंफ्यूज, इस बार बन रहा है महा-संयोग!

Makar Sankranti 2026: 14 या 15 जनवरी? मकर संक्रांति की सही तारीख को लेकर कई लोग कंफ्यूज है। आइये जाने इस बार कौन सी तारीख को यह पर्व मनाया जाएगा।

Makar Sankranti 2026: उत्तरायण का शुभारंभ और विष्णु-सूर्य की कृपा का महासंयोग। 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति बेहद खास होने वाली है, क्योंकि इस बार 23 साल बाद (2003 के बाद) यह पर्व षटतिला एकादशी के साथ पड़ रहा है। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिससे स्नान, दान, पूजा और जप का फल कई गुना बढ़ जाता है। यह दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए अक्षय पुण्य प्राप्ति का अवसर है, जहां सूर्य देव और भगवान विष्णु दोनों की विशेष कृपा मिलती है।

Makar Sankranti 2026: तिथि और समय, कब मनाई जाएगी संक्रांति?

पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 7-13 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मुख्य रूप से 14 जनवरी (बुधवार) को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। कुछ जगहों पर भ्रम है कि 15 जनवरी को मनाई जाए, लेकिन शास्त्रसम्मत तरीके से सूर्य गोचर वाले दिन (14 जनवरी) को ही पर्व मनाना उचित है। पुण्यकाल दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45-6:12 बजे तक रहेगा, जबकि महापुण्यकाल 3:13 से 4:58-5:19 बजे तक सबसे शुभ माना जाता है।

Makar Sankranti 2026: षटतिला एकादशी का संयोग

माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 जनवरी दोपहर 3:17 बजे से शुरू होकर 14 जनवरी शाम 5:52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 14 जनवरी को ही एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और सभी पापों का नाश करती है। तिल (षट् तिल) से जुड़े दान के कारण इसका नाम षटतिला पड़ा है। एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित है, इसलिए खिचड़ी पर्व की परंपरा में सावधानी बरतनी होगी। व्रत रखने वाले 14 जनवरी को फलाहार करेंगे और 15 जनवरी (द्वादशी) को पारण के बाद खिचड़ी बनाकर दान और ग्रहण कर सकते हैं।

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो खरमास का अंत और नए साल की शुरुआत माना जाता है। फसल कटाई का उत्सव होने से इसे खिचड़ी पर्व भी कहते हैं। परंपरा में गंगा या पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य, तिल-गुड़ का दान, खिचड़ी वितरण और पतंग उड़ाना शामिल है। तिल दान को विशेष महत्व है, क्योंकि यह यमराज के दूतों को प्रसन्न करता है और पितरों की शांति देता है। गरम कपड़े, कंबल और अनाज का दान भी शुभ फल देता है।

Makar Sankranti 2026: पूजा विधि और सावधानियां

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:05-5:55 बजे) में उठकर तिल मिले पानी से स्नान करें। पीले वस्त्र पहनें, सूर्य देव और विष्णु जी की पूजा करें। तिल-गुड़ की खिचड़ी बनाकर दान करें। एकादशी व्रत में अनाज से परहेज रखें और विष्णु आराधना करें। संक्रांति के बाद शाम को खिचड़ी दान उचित रहेगा। इस संयोग में किया गया दान अक्षय फल देता है, इसलिए भक्तों में उत्साह है।

Makar Sankranti 2026: क्षेत्रीय उत्सव

उत्तर भारत में पतंगबाजी, गुजरात में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी (13 जनवरी) और असम में माघ बिहू के साथ यह पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य की ऊर्जा, फसल की समृद्धि और नई शुरुआत का संदेश देता है।

यह दुर्लभ महासंयोग जीवन में सकारात्मक बदलाव, धन-समृद्धि और पाप मुक्ति का अवसर है। भक्त 14 जनवरी को स्नान-दान से अधिकतम लाभ उठाएं और परिवार के साथ उत्सव मनाएं।

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