Meerut Murder: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र अंतर्गत कपसाड़ गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। गुरुवार (8 जनवरी) सुबह करीब 8 बजे एक दलित महिला सुनीता (50 वर्ष) अपनी 20 वर्षीय बेटी रूबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। रास्ते में गांव के ही रहने वाले पारस सोम (23 वर्ष, स्थानीय डॉक्टर के कंपाउंडर) और उसके साथी सुनील कुमार (25 वर्ष) ने उन्हें रोका। आरोप है कि पारस ने रूबी के साथ अभद्रता की कोशिश की। विरोध करने पर सुनीता को गंडासे/धारदार हथियार (गन्ना काटने वाला) से सिर पर वार किया गया। घायल सुनीता को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दौरान पारस और उसके साथियों ने रूबी को जबरन अगवा कर लिया।
Meerut Murder: 10 से अधिक विशेष टीमें गठित
पुलिस ने मुख्य आरोपियों पारस सोम और सुनील कुमार के खिलाफ हत्या, अपहरण और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मेरठ एसएसपी विपिन तादा ने बताया कि 10 से अधिक विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो हरियाणा, दिल्ली और आसपास के जिलों में छापेमारी कर रही हैं। आरोपी और अपहृत लड़की अभी तक फरार हैं। गांव में राफ (रैपिड एक्शन फोर्स) सहित भारी पुलिस बल तैनात है, और सभी एंट्री पॉइंट्स सील कर दिए गए हैं।
Meerut Murder: परिवार और ग्रामीणों का आक्रोश
घटना के बाद गांव में भारी तनाव है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो आक्रोशित ग्रामीणों (मुख्यतः दलित महिलाओं) ने एम्बुलेंस में तोड़फोड़ की, शीशे तोड़े और शव सड़क पर रखकर हंगामा किया। परिजनों ने घोषणा की कि आरोपियों की गिरफ्तारी और रूबी की सकुशल बरामदगी तक अंतिम संस्कार नहीं होगा। प्रशासन के आश्वासन और मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये, सपा विधायक अतुल प्रधान से 3 लाख रुपये की सहायता के बाद भी परिवार अड़ा रहा।
Meerut Murder: राजनीतिक बवाल
विपक्ष ने इस घटना को कानून-व्यवस्था की विफलता बताते हुए योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेता उदित राज ने एक्स पर लिखा, मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला खेत जाने के लिए बेटी के साथ निकली। गुंडों ने बेटी को किडनैप करने की कोशिश की, मां ने रोका तो हत्या कर दी। 48 घंटे बीत गए, कुछ पता नहीं। दलित उत्पीड़न बढ़ रहा है। क्या आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चला? हिंदू राष्ट्र की झलक!
Meerut Murder: सपा ने घटना को बताया दर्दनाक और चौंकाने वाली
समाजवादी पार्टी के नेता योगेश वर्मा ने कहा, यह दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना है। दलित समुदाय हिल गया है। सरकार को जिम्मेदारों को सबक सिखाना चाहिए। अब तक बुलडोजर लेकर आरोपियों के घर पहुंच जाना चाहिए था।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे अति-दुखद, शर्मनाक और चिंतनीय बताया। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने परिवार से फोन पर बात की और 3 लाख की सहायता की घोषणा की। सपा विधायक अतुल प्रधान गांव पहुंचने की कोशिश में पुलिस से टकराए, धक्का-मुक्की हुई और वे धरने पर बैठ गए। भीम आर्मी और अन्य संगठनों ने भी मोर्चा खोला।
प्रशासन का दावा
मेरठ जोन एडीजी भानु भास्कर ने कहा कि परिवार को हर संभव मदद दी जा रही है। आरोपी फरार हैं, लेकिन जल्द गिरफ्तारी होगी। परिवार को कुल 22 लाख रुपये की सहायता मिलेगी।
यह घटना उत्तर प्रदेश में महिलाओं और दलितों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। गांव अब पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है, जबकि रूबी की तलाश जारी है। विपक्ष इसे योगी राज में अराजकता का प्रतीक बता रहा है।
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