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Friday, April 3, 2026
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रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे अमित शाह? खुद किया बड़ा खुलासा

Amit Shah: अमित शाह ने रिटायरमेंट के बाद का प्लान बताया। कहा, वेद, उपनिषद और प्राकृतिक खेती के अध्ययन में समर्पित करेंगे जीवन। जानें उन्होंने क्या कहा और क्यों लिया यह निर्णय।

Amit Shah: देश के गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने रिटायरमेंट प्लान का खुलासा किया है। दिल्ली में आयोजित ‘सहकार संवाद’ कार्यक्रम के दौरान गुजरात और राजस्थान की सहकारी महिला कार्यकर्ताओं से बातचीत में शाह ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद वह वेद, उपनिषद और प्राकृतिक खेती के अध्ययन और अभ्यास को अपना पूरा जीवन समर्पित करेंगे। उन्होंने कहा, मैंने निर्णय लिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद अपना शेष जीवन वेद, उपनिषद और प्राकृतिक खेती के लिए खर्च करूंगा।

Amit Shah: प्राकृतिक खेती के फायदे गिनाए

अमित शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल परंपरा नहीं बल्कि वैज्ञानिक प्रयोग है, जिससे स्वास्थ्य और उपज दोनों में सुधार होता है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों से उगाए गए गेहूं के सेवन से कैंसर, बीपी और शुगर जैसी समस्याएं होती हैं। जबकि प्राकृतिक खेती से उपज भी बढ़ती है और स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। शाह ने बताया, मैंने अपने खेत में प्राकृतिक खेती शुरू की है और उत्पादन डेढ़ गुना बढ़ गया है। इसमें एक बूंद पानी भी बर्बाद नहीं होती।

Amit Shah: प्राकृतिक खेती में गोबर और देसी गाय की भूमिका

अमित शाह ने बताया कि प्राकृतिक खेती में गोबर और देसी गाय की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि एक देसी गाय से 30 एकड़ जमीन पर खेती की जा सकती है। गुजरात सरकार एक गाय के रखरखाव के लिए 900 रुपये प्रति माह देती है। गोबर का उपयोग भी प्राकृतिक खेती में किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।

‘सहकारिता मंत्रालय का कार्य गृह मंत्रालय से भी बड़ा’

कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि उन्हें गृह मंत्री बनने पर लोग बधाई देते थे, लेकिन जब उन्हें सहकारिता मंत्री बनाया गया, तो उन्होंने महसूस किया कि यह पद गृह मंत्रालय से भी बड़ा है। उन्होंने कहा, सरदार पटेल गृह मंत्री रहे हैं, यह गर्व की बात है, लेकिन सहकारिता मंत्री बनकर मुझे ज्यादा खुशी मिली।

Amit Shah: ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन पर कर रहे काम

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने के लिए सहकारिता मंत्रालय लगातार काम कर रहा है। इससे न केवल किसानों को सशक्त किया जा रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा, हमने प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) के लिए 25 छोटे व्यवसाय मॉडल की पहचान की है, जिससे समितियों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जाएगा।

गुजरात का उदाहरण देते हुए बताया सहकारिता का महत्व

अमित शाह ने गुजरात के बनासकांठा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह पैदा हुए थे, तब वहां पानी की भारी किल्लत थी, लेकिन सहकारिता आंदोलन ने वहां हालात बदल दिए। आज वही जिला दूध उत्पादन से हर परिवार को सालाना 1 करोड़ रुपये की कमाई करा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सहकारिता की ताकत है, जिसने गुजरात को नई दिशा दी है।

सहकारिता कार्यकर्ताओं से खुलकर संवाद

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने सहकारी महिला कार्यकर्ताओं के सवालों का जवाब भी दिया और भरोसा दिलाया कि वे कभी भी उनसे मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से महिलाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए योजनाओं को सरल और सुलभ बनाया जाएगा।

प्राकृतिक खेती के लिए सरकार की योजनाएं

अमित शाह ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने समितियां बनाई हैं, जो प्राकृतिक खेती की उपज की खरीद करेगी और इसके निर्यात की व्यवस्था भी करेगी। इस पहल से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और देश में स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।

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