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Wednesday, September 23, 2026
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Chhattisgarh: सुकमा में तेंदूपत्ता बोनस घोटाले की जांच तेज, ACB और EOW की चार जगहों पर छापेमारी

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने एक साथ चार जगहों पर छापेमारी की।

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में तेंदूपत्ता बोनस से जुड़े कथित घोटाले को लेकर गुरुवार, 10 अप्रैल को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की संयुक्त टीमों ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस कार्रवाई में पूर्व विधायक और सीपीआई नेता मनीष कुंजाम के आवास समेत जिले के चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

Chhattisgarh: एसीबी और ईओडब्ल्यू ने की कई जगहों पर छापेमारी

एसीबी और ईओडब्ल्यू की यह कार्रवाई सुबह के समय शुरू हुई, जो देर शाम तक जारी रही। सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी तेंदूपत्ता बोनस वितरण में भारी अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर की गई है। जांच अधिकारियों ने सुकमा के कोंटा, जगरगुंडा, पालाचलमा और एर्राबोर इलाकों में तेंदूपत्ता प्रबंधकों के घरों पर दस्तावेजों की गहन जांच-पड़ताल की है।

Chhattisgarh: मनीष कुंजाम के घर पहुंची टीम, पूछताछ जारी

छापेमारी की सबसे अहम कड़ी उस समय जुड़ गई, जब जांच टीम ने सीपीआई के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के निवास पर दबिश दी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनके खिलाफ क्या साक्ष्य मिले हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उनके घर से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। टीमों ने कुंजाम से पूछताछ भी की है, जो अभी जारी है।

Chhattisgarh: राजनीतिक गलियारों में हलचल

मनीष कुंजाम, बस्तर क्षेत्र में आदिवासी मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं और नक्सलियों के प्रभाव वाले इलाकों में उनकी एक मजबूत राजनीतिक छवि है। ऐसे में उनके आवास पर एसीबी की दबिश ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।

तेंदूपत्ता बोनस: livelihood से जुड़ा गंभीर मामला

छत्तीसगढ़ के जंगलों में तेंदूपत्ता संग्रहण लाखों ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। सरकार हर वर्ष तेंदूपत्ता संग्रह करने वाले मजदूरों को बोनस प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य उनके आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना होता है। लेकिन बीते कुछ वर्षों से इस बोनस के वितरण में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही थीं।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ स्थानों पर मजदूरों को पूरा बोनस नहीं मिला, और कागजों में फर्जी भुगतान दर्ज कर भारी भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया। इसी को लेकर जांच एजेंसियों ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाया और अब सीधे तौर पर प्रबंधकों और स्थानीय नेताओं तक पहुंच बनाई है।

जांच के दायरे में और नाम आने की संभावना

सूत्रों का यह भी कहना है कि यह कार्रवाई शुरुआती चरण है और जांच में और भी कई नाम सामने आ सकते हैं। तेंदूपत्ता समितियों के प्रबंधकों, क्षेत्रीय अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।

एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीमें फिलहाल बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच में जुटी हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने फिलहाल इस छापेमारी को लेकर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन संकेत दिए हैं कि जांच को आगे और तेज किया जाएगा।

स्थानीय लोगों में चर्चा, माहौल गर्म

इस छापेमारी के बाद सुकमा जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। स्थानीय निवासियों में इसे लेकर जिज्ञासा और चिंता दोनों देखी जा रही है, क्योंकि तेंदूपत्ता उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताएं न हो सकें।

सुकमा में हुई यह छापेमारी न केवल एक वित्तीय घोटाले की परतें खोल रही है, बल्कि यह भी दर्शा रही है कि अब राज्य की भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां आदिवासी क्षेत्रों में भी सक्रिय रूप से कार्रवाई करने को तैयार हैं। आने वाले दिनों में इस जांच से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल मचा सकते हैं।

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