Johannesburg G20 Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में भारत का पक्ष मजबूती से रखा। यह अफ्रीकी महाद्वीप पर आयोजित पहला जी20 समिट था, जो 21-23 नवंबर तक चला। ‘सॉलिडैरिटी, इक्वेलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी’ थीम पर आधारित इस समिट में पीएम मोदी ने रविवार को तीसरे सत्र को संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को वैश्विक भलाई के लिए उपयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने पारदर्शिता, मानवीय निगरानी, डिजाइन स्तर पर सुरक्षा और दुरुपयोग रोकथाम जैसे सिद्धांतों पर आधारित वैश्विक समझौते का आह्वान किया। पीएम ने कहा, “AI मानवीय क्षमताओं का विस्तार करे, लेकिन अंतिम निर्णय मनुष्यों का ही होना चाहिए।” समिट से इतर उन्होंने इटली और नीदरलैंड के नेताओं से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं।
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Johannesburg G20 Summit: इटली की पीएम मेलोनी से बैठक
रविवार को पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ बैठक की, जो जी20 समिट की एक प्रमुख हाइलाइट रही। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम ने पोस्ट साझा करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ बहुत अच्छी बैठक हुई। भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, जिससे हमारे देशों के लोगों को बहुत लाभ हो रहा है।”
दोनों नेताओं ने आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने के लिए ‘इंडिया-इटली जॉइंट इनिशिएटिव टू काउंटर फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म’ की घोषणा की। पीएम ने इसे “आवश्यक और समयोचित प्रयास” बताते हुए कहा कि यह आतंकवाद और उसके समर्थक नेटवर्क के खिलाफ मानवता की लड़ाई को मजबूत करेगा। बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इटली के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 2024 में 12 बिलियन डॉलर को पार कर चुका है, और यह साझेदारी यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करेगी।
Johannesburg G20 Summit: जल संसाधन और टेक्नोलॉजी पर फोकस
समिट के दौरान पीएम मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक शूफ से भी मुलाकात की। एक्स पर पीएम ने लिखा, “जोहान्सबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान नीदरलैंड सरकार के प्रधानमंत्री डिक शूफ से मुलाकात की। जल संसाधन, नवाचार, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हमारे देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी तेजी से बढ़ रही है। हम आने वाले समय में व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए काम करते रहेंगे।”
दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जल संसाधन प्रबंधन, सस्टेनेबल इनोवेशन और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर सहयोग पर जोर दिया। नीदरलैंड, जो डच डेल्टा टेक्नोलॉजी में अग्रणी है, भारत के ‘सागरमाला’ प्रोजेक्ट और नदी जोड़ो योजना में साझेदार बन सकता है। यह बैठक भारत-नीदरलैंड के 2024 के 25 बिलियन यूरो के व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को सशक्त बनाएगी।
Johannesburg G20 Summit: जी20 समिट में पीएम मोदी का 6-सूत्री एजेंडा
पीएम मोदी ने समिट के दौरान छह प्रमुख प्रस्ताव रखे, जिनमें ड्रग-टेरर नेक्सस से निपटने के लिए जी20 इनिशिएटिव, ग्लोबल हेल्थकेयर रिस्पॉन्स टीम और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल पर पुनर्विचार शामिल था। उन्होंने कहा कि वैश्विक विकास मॉडल को फिर से सोचना होगा, ताकि गरीब देशों को न्याय मिले। समिट में यूएस के बहिष्कार के बावजूद दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के नेतृत्व में डिक्लेरेशन अपनाया गया। पीएम ने समिट को “फ्रूटफुल” बताते हुए कहा कि यह एक समृद्ध और सस्टेनेबल ग्रह की दिशा में कदम है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज, ब्रिटेन के कीर स्टार्मर और यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस से भी बैठकें कीं।
Johannesburg G20 Summit: भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत
यह समिट अफ्रीकी महाद्वीप पर पहली बार आयोजित हुआ, जहां भारत ने 2023 की अपनी अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी यूनियन को जी20 सदस्यता दिलाई थी। पीएम मोदी ने 21 नवंबर को जोहान्सबर्ग पहुंचते ही भारतीय डायस्पोरा और टेक उद्यमियों से मुलाकात की। उन्होंने आईबीएसए समिट में भी भाग लिया, जहां भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत किया। समिट में जलवायु वित्त, क्रिटिकल मिनरल्स और डीसेंट वर्क जैसे मुद्दों पर सहमति बनी। पीएम ने समिट के बाद एक्स पर पोस्ट किया, “मेरी मीटिंग्स और इंटरैक्शंस वर्ल्ड लीडर्स के साथ बहुत फ्रूटफुल रहीं। साउथ अफ्रीका के लोगों और प्रेसिडेंट रामाफोसा का धन्यवाद।”
भारत की डिप्लोमेसी: वैश्विक चुनौतियों पर मजबूत स्टैंड
पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की दृष्टि को दर्शाती है। समिट में भारत ने ड्रग ट्रैफिकिंग को आतंकवाद के वित्तपोषण का स्रोत बताते हुए वैश्विक प्रयास की मांग की। AI पर उनका आह्वान – “ट्रांसपेरेंसी, ह्यूमन ओवरसाइट, सिक्योरिटी बाय डिजाइन” – डेवलपिंग नेशंस के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इटली और नीदरलैंड के साथ नई पहलें भारत की रक्षा और टेक साझेदारी को बूस्ट देंगी। समिट के बाद पीएम भारत लौट चुके हैं, लेकिन इन चर्चाओं का असर वैश्विक मंचों पर लंबे समय तक रहेगा।
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