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Wednesday, October 14, 2026
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सऊदी अरब पर फिर हूती विद्रोहियों का हमला! आभा से ताइफ तक मिसाइल और ड्रोन से निशाना

ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर सऊदी अरब को निशाना बनाया है। सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के मुताबिक, हूतियों ने दक्षिणी सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से कई हमले किए। इन हमलों में 13 आम नागरिक घायल हुए हैं।

गठबंधन के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि सोमवार, 14 सितंबर 2026 को हूती मिलिशिया ने खमीस मुशेत, आभा और ताइफ शहरों में नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया। हमलों में घायल हुए लोगों को मामूली से लेकर मध्यम स्तर की चोटें आई हैं। इसके अलावा सात घरों और दो वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है।

लाल सागर में हूतियों की बढ़ी पकड़

हूती विद्रोहियों की गतिविधियां केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रेटर और लेसर हनिश द्वीपों पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है।

इन द्वीपों पर कब्जे से लाल सागर में महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर हूतियों की रणनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच हालिया संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

सऊदी की अहम तेल पाइपलाइन पर भी असर

इस बीच, सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन की मरम्मत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, पिछले सप्ताह हुए हमले से क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को ठीक करने में तीन से पांच सप्ताह लग सकते हैं। इस दौरान पाइपलाइन ज्यादातर समय बंद रहने की संभावना है।

सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में तेल को बाजार तक पहुंचाने के लिए उसके पास मौजूद वैकल्पिक मार्गों का महत्व बढ़ गया है।

1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर बढ़ी निर्भरता

सऊदी अरब अपने कच्चे तेल को गल्फ क्षेत्र के बंदरगाहों से लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाने के लिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का इस्तेमाल करता है। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

यानबू पहुंचने के बाद कच्चे तेल को टैंकरों में भरकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जा सकता है। हालांकि, पिछले सप्ताह हुए ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन को बंद करना पड़ा। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है।

लगातार हो रहे हमलों के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा और तेल निर्यात व्यवस्था पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

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