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Friday, October 23, 2026
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नेपाल आपदा में भारत बना मददगार, 130 टन राहत सामग्री भेजी; लापता लोगों की तलाश और DNA टेस्टिंग में भी जुटीं टीमें

नई दिल्ली: 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से त्रस्त नेपाल को भारत से बड़ी मदद मिली है. हादसे के तुरंत बाद भारत ने नेपाल की मदद शुरू की. राहत सामग्री भेजने के साथ-साथ नेपाल में लापता लोगों की तलाश, शवों की डीएनए टेस्टिंग तक में भारतीय दल पूरी तत्परता से जुटे हैं. बुधवार को भारतीय वायुसेना का आठवां विमान 35 टन राहत और बचाव सामग्री लेकर नई दिल्ली से काठमांडू पहुंचा. जिसमें टनल रेस्क्यू और फॉरेंसिक आपूर्ति की सामग्री भी शामिल है. काठमांडू में इस राहत सामग्री को नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई. नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा, “राहत और बचाव सामग्री के साथ 8वीं भारतीय उड़ान, जिसमें टनल रेस्क्यू और फॉरेंसिक आपूर्ति की सामग्री भी शामिल है, काठमांडू पहुंची और नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई.”

1300 से ज्यादा लोगों की हो चुकी मौत

मालूम हो कि नेपाल 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई है, 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता हैं. भारत नेपाल को इस भीषण आपदा से उबरने में मदद में लगा है. इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि भारत ने अब तक सात विमानों से 95 टन राहत सामग्री भेजी है.

अभी तक 130 टन राहत सामग्री भेज चुका भारत

पहले के 7 बेड़े में 95 टन और आंठवें बेड़े में 35 टन राहत सामग्री अभी तक भारत नेपाल को भेज चुका है. इसके साथ ही नेपाल के राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें भी तैनात की गई हैं. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, हम इस आपदा में उनकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. एक करीबी मित्र और पड़ोसी के तौर पर, भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया और आगे भी नेपाल के राहत, बचाव और पुनर्निर्माण कार्यों में मदद करना जारी रखेगा. हमारी फोरेंसिक टीम और हमारी टनल रेस्क्यू टीम, दोनों टीमें जमीन पर काम कर रही हैं. वे बचाव और राहत कार्यों में मदद कर रही हैं.”

भारतीय फोरेसिंक टीम काठमांडू की दो लैब में कर रही डीएनए टेस्टिंग

उन्होंने बताया, “फोरेंसिक टीम अभी काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में काम कर रही है, जहां वे इन दो प्रयोगशालाओं में 1200 डीएनए नमूनों पर काम कर रहे हैं. हम नेपाल की जरूरत के हिसाब से उनकी मदद करना जारी रखेंगे. जैसा कि मैंने पिछली बार बताया था, इस आपदा में 275 भारतीय नागरिक लापता हैं. एमईए के अनुसार, नेपाल के चल रहे बचाव, राहत और फॉरेंसिक अभियानों का समर्थन करने के लिए भारत से 54 विशेषज्ञ कर्मियों की तैनाती के अलावा 130 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी गई है.

भारत ने नेपाल को मदद में क्या कुछ भेजा?

भारत द्वारा नेपाल को भेजे गए राहत बचाव सामग्री में अस्थायी आश्रयों, कंबलों, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और दवाओं से युक्त मानक राहत सामग्री के अलावा, भारतीय पक्ष ने विशेष वस्तुएं और उपकरण भी प्रदान किए हैं. जिसमें टनल और मड रेस्क्यू उपकरण, जिसमें मड रेस्क्यू सूट, गैस डिटेक्टर, श्वास उपकरण, इन्फ्लेटेबल वॉकवे आदि शामिल हैं.  डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए DNA किट, अभिकर्मक और उपकरण; पोर्टेबल जेनसेट, लाइटिंग टावर और डीवाटरिंग पंप जैसी वस्तुएं शामिल है.

चिलिमे और लांगटांग में टनल में तलाशी अभियान चला रही भारतीय टीम

भारत की विशेष टनल बचाव टीम ने शुरू में नेपाल में दो स्थानों – चिलिमे और लांगटांग – पर नेपाली सेना के साथ समन्वय में अपना अभियान शुरू किया था. एमईए ने कहा, “चल रहे खोज प्रयास अब चिलिमे में केंद्रित हैं, जहां इलाके, कठिन पहुंच की स्थिति और सुरंग की ढलान ने चुनौतियां पेश की हैं. भारतीय टनल बचाव दल अपने काम में दृढ़ रहा है और मैनुअल प्रयासों और नवीन तकनीकों के उपयोग से अच्छी प्रगति सुनिश्चित की है.”

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