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Friday, April 3, 2026
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कांग्रेस का उत्तराखंड में बड़ा फेरबदल: 27 नए जिला अध्यक्ष नियुक्त, खड़गे की मुहर

Uttarakhand Congress: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुमोदन और महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में इन नियुक्तियों को मंजूरी दी गई।

Uttarakhand Congress: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने उत्तराखंड में पार्टी संगठन को नई ताकत देने के लिए मंगलवार को तत्काल प्रभाव से 27 नए जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुमोदन और महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में इन नियुक्तियों को मंजूरी दी गई। यह फेरबदल ऐसे समय में हुआ है जब कांग्रेस राज्य में लगातार चुनावी हार का सामना कर रही है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।

Uttarakhand Congress: नए चेहरों की लंबी सूची

एआईसीसी ने सभी 13 जिलों के साथ-साथ प्रमुख शहरी और ग्रामीण इकाइयों में नए नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपी है। अल्मोड़ा में भूपेंद्र सिंह भोज, बागेश्वर में अर्जुन चंद्र भट्ट, चमोली में सुरेश डिमरी और चंपावत में चिराग सिंह फर्त्याल को अध्यक्ष बनाया गया है। देहरादून शहर की कमान डॉ. जसविंदर सिंह गोगी के हाथों सौंपी गई है, जबकि हल्द्वानी शहर में गोविंद सिंह बिष्ट नेतृत्व करेंगे।

शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में विशेष फोकस दिखता है। काशीपुर शहर में अलका पाल, रुद्रपुर शहर में ममता रानी, हरिद्वार जिले में बालेश्वर सिंह और हरिद्वार नगर में अमन गर्ग को जिम्मेदारी दी गई है। कोटद्वार में विकास नेगी और कोटद्वार नगर में मीना देवी को अध्यक्ष बनाया गया। नैनीताल में राहुल छिम्वाल, पछवादून में संजय किशोर, परवादून में मोहित उनियाल, पौड़ी गढ़वाल में विनोद सिंह नेगी, पिथौरागढ़ में मुकेश पंत और पुरोला में दिनेश चौहान को कमान सौंपी गई।

रानीखेत में दीपक किरोला, रुड़की में फुरकान अहमद, रुड़की शहर में राजेंद्र कुमार चौधरी, रुद्रप्रयाग में कुलदीप कंडारी, टिहरी गढ़वाल में मुरारी लाल खंडवाल, उधमसिंह नगर में हिमांशु गाबा, उत्तरकाशी में प्रदीप सिंह रावत, देवप्रयाग में उत्तम असवाल और डीडीहाट में मनोहर सिंह टोलिया को जिला अध्यक्ष बनाया गया है।

Uttarakhand Congress: सदस्यता अभियान और ब्लॉक-मंडल गठन पर जोर

एआईसीसी ने नवनियुक्त अध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से सदस्यता अभियान शुरू करने और ब्लॉक तथा मंडल स्तर की समितियों का गठन करने का सख्त निर्देश दिया है। पार्टी महासचिव वेणुगोपाल ने कहा, “ये नियुक्तियां केवल नाम नहीं, जिम्मेदारी हैं। हर तीन महीने में प्रदर्शन की समीक्षा होगी।” नए नेताओं से अपेक्षा है कि वे बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करें और 2027 के चुनाव के लिए आधार तैयार करें।

Uttarakhand Congress: लगातार हार के बाद पुनरुद्धार की रणनीति

उत्तराखंड में कांग्रेस 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी से बुरी तरह हारी है। 2022 में पार्टी को मात्र 19 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी ने 47 पर कब्जा जमाया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों सीटें बीजेपी के पास रहीं। राज्य में कांग्रेस का वोट शेयर 2022 में 37.9% था, लेकिन सीटों में अनुपात नहीं बना। पार्टी आलाकमान का मानना है कि कमजोर जिला संगठन और पुराने नेतृत्व की निष्क्रियता इसका मुख्य कारण है।

Uttarakhand Congress: पहाड़ी राज्यों में संरचनात्मक हस्तक्षेप की नई नीति

यह फेरबदल कांग्रेस की नई रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पहाड़ी राज्यों में अस्थायी हस्तक्षेप के बजाय संरचनात्मक पुनरुद्धार पर जोर दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में हाल की जीत के बाद उत्तराखंड को दूसरा लक्ष्य बनाया गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि खड़गे और राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से इन नामों को अंतिम रूप दिया। कई नए चेहरे युवा और महिला नेतृत्व से हैं, जो पार्टी की ‘युवा और समावेशी’ छवि को मजबूत करेंगे।

Uttarakhand Congress: स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया

देहरादून में नवनिर्वाचित शहर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर गोगी ने कहा, ‘यह विश्वास की जीत है। हम बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करेंगे।’ अल्मोड़ा के भूपेंद्र भोज ने सदस्यता अभियान की शुरुआत की घोषणा की। हालांकि, कुछ पुराने नेताओं ने ‘वरिष्ठों की अनदेखी’ का आरोप लगाया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा, ‘नए लोग आएं, अच्छी बात है, लेकिन अनुभव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।’

2027 की तैयारी: बीजेपी के लिए चुनौती

बीजेपी ने भी हाल में संगठन में फेरबदल किया है, लेकिन कांग्रेस का यह कदम उसे चौंकाने वाला है। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. आरएस टोलिया का कहना है, “कांग्रेस ने सही समय पर सही कदम उठाया है। यदि ये नेता जमीनी स्तर पर काम करें, तो 2027 में मुकाबला कड़ा हो सकता है।” विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों (हरिद्वार, उधमसिंह नगर) में मजबूत नेतृत्व से अल्पसंख्यक और दलित वोटों पर असर पड़ेगा।

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