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Wednesday, January 21, 2026
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उत्तराखंड में बाहर के वाहनों पर ग्रीन टैक्स: हिमालय की हरियाली बचाने की मुहिम

Green Tax: उत्तराखंड में दिसंबर 2025 से बाहर से आने वाले सभी वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और जंगलों व स्वच्छ हवा की रक्षा करना है।

Green Tax: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के नाजुक हिमालयी पर्यावरण को बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। दिसंबर 2025 से बाहर से आने वाले सभी वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और जंगलों व स्वच्छ हवा की रक्षा करना है। परिवहन विभाग ने टैक्स की दरें भी निर्धारित कर दी हैं, जिसका उपयोग सफाई, वृक्षारोपण और हरियाली बढ़ाने के कार्यों में किया जाएगा।

Green Tax: कितना टैक्स, किन वाहनों पर?

नए प्रावधान के तहत:

  • छोटी यात्री गाड़ियां (कार, जीप आदि): ₹80
  • छोटे सामान ढोने वाले वाहन (पिकअप, टेंपो): ₹250
  • बसें: ₹140
  • ट्रक: लोड क्षमता के अनुसार ₹120 से ₹700 तक
    यह टैक्स राज्य की सीमा में प्रवेश करते समय चेक पोस्ट पर वसूला जाएगा। स्थानीय वाहनों को छूट रहेगी, लेकिन पर्यटन सीजन में बाहर से आने वाले लाखों वाहनों पर सीधा असर पड़ेगा।

Green Tax: 71% जंगल, फिर भी खतरा बढ़ा

उत्तराखंड को ‘हरियाली का खजाना’ कहा जाता है। राज्य का 71% क्षेत्र घने जंगलों से ढका है, जो देश-दुनिया को शुद्ध ऑक्सीजन देते हैं। लेकिन पिछले एक दशक में पर्यटक वाहनों की बाढ़ और निर्माण कार्यों से वायु प्रदूषण बढ़ा है। देहरादून, नैनीताल, मसूरी जैसे शहरों में AQI स्तर कई बार खराब श्रेणी में पहुंच गया। सरकार का मानना है कि ग्रीन टैक्स से वाहन प्रवेश नियंत्रित होगा और पर्यावरण संरक्षण कोष मजबूत बनेगा।

Green Tax: सांसद नरेश बंसल की सराहना

भाजपा राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने इस पहल की जोरदार तारीफ की। उन्होंने कहा, उत्तराखंड सदियों से शुद्ध वायु देने वाला राज्य रहा है। विकास में देरी होती है, लेकिन पर्यावरण हमारी प्राथमिकता है। उत्तराखंड के लोग प्रकृति प्रेमी हैं। ग्रीन टैक्स इसी संवेदनशीलता का प्रतीक है। बंसल ने बताया कि जंगलों की वजह से कई प्रोजेक्ट रुकते हैं, लेकिन यह राष्ट्रीय हित में है।

Green Tax: पर्यावरण vs पर्यटन: संतुलन की चुनौती

उत्तराखंड में हर साल 3 करोड़ से ज्यादा पर्यटक आते हैं, जिनमें 80% सड़क मार्ग से। चारधाम यात्रा, केदारनाथ, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब जाने वाले वाहनों की संख्या लाखों में है। ग्रीन टैक्स से पर्यटकों की जेब पर बोझ पड़ेगा, लेकिन सरकार का दावा है कि यह ‘प्रदूषण करने वाला भुगतान करे’ के सिद्धांत पर आधारित है। टैक्स से होने वाली आय वृक्षारोपण, सोलर लाइटिंग, वाहन पार्किंग और कचरा प्रबंधन में लगेगी।

Green Tax: युवाओं को खेल का संदेश

सांसद नरेश बंसल ने संसद खेल महोत्सव में युवाओं से अलग संदेश दिया। उन्होंने कहा, खेलों के आयोजन बढ़ेंगे। लड़के-लड़कियां राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा लेंगे। इससे उनका आत्मविश्वास और क्षमता निखरेगी। बंसल ने भरोसा जताया कि उत्तराखंड के खिलाड़ी पदक तालिका में चमक बिखेरेंगे। उन्होंने ग्रामीण खेल अकादमियों और महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की बात कही।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

पर्यावरणविद् डॉ. एस.एस. नेगी ने स्वागत किया, लेकिन कहा, ‘टैक्स से ज्यादा जरूरी इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना है।’ वहीं, होटल संघ ने चिंता जताई कि टैक्स से पर्यटन प्रभावित हो सकता है। सरकार ने आश्वासन दिया कि स्थानीय लोगों और जरूरी सेवाओं को छूट दी जाएगी।
परिवहन विभाग ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम और स्मार्ट चेक पोस्ट तैयार कर रहा है। दिसंबर के पहले हफ्ते से पायलट प्रोजेक्ट ऋषिकेश और हरिद्वार में शुरू होगा। EV वाहनों को पूरी छूट का प्रस्ताव है। साथ ही, जंगल सफारी, ट्रेकिंग रूट पर कार्बन फुटप्रिंट कैलकुलेटर लगाने की योजना है।

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