Election Commission: उत्तर प्रदेश में पंजीकृत 115 राजनीतिक दलों को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने अपनी आधिकारिक सूची से हटा दिया है। यह कदम उन दलों के खिलाफ उठाया गया है जो पिछले 6 वर्षों में यानी 2019 से लगातार न तो विधानसभा और न ही लोकसभा चुनाव में उतरे हैं। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से इसकी जानकारी दी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, यह निर्णय ECI ने 9 अगस्त 2025 के अपने आदेश में लिया। साथ ही, यह भी पाया गया कि इन दलों का पंजीकृत पता अब अस्तित्व में नहीं है, यानी वे अपने आधिकारिक पते से संचालित भी नहीं हो रहे थे।
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Election Commission: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत लाभ से वंचित
लिस्ट से बाहर होने के बाद ये 115 राजनीतिक दल अब लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29B और धारा 29C के साथ पठित आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत मिलने वाले लाभों से वंचित हो जाएंगे। इसमें चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के तहत मिलने वाले अधिकार भी शामिल हैं। मतलब अब ये दल चुनावी मान्यता से जुड़ी किसी भी सुविधा या विशेषाधिकार का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
Election Commission: अपील का मौका, लेकिन समयसीमा तय
निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि इस आदेश से असहमत कोई भी दल 30 दिनों के भीतर आयोग में अपील कर सकता है। आदेश की तारीख यानी 9 अगस्त 2025 से यह अवधि गिनी जाएगी। इस अपील में दल को यह साबित करना होगा कि वह आयोग के मानकों पर खरा उतरता है और उसका पंजीकरण बहाल किया जाना चाहिए।
Election Commission: जिलेवार सूची भी जारी
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 9 अगस्त के आदेश के साथ-साथ आयोग ने जिलेवार सूची भी जारी की है, जिसमें उन 115 राजनीतिक दलों के नाम दर्ज हैं जिन्हें हटाया गया है। इस सूची में बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों में पंजीकृत, लेकिन निष्क्रिय पड़े राजनीतिक दल शामिल हैं।
आयोग की नजर में निष्क्रिय दल क्यों समस्या?
निर्वाचन आयोग समय-समय पर निष्क्रिय दलों की पहचान कर उन्हें लिस्ट से बाहर करता है।
ऐसे दल कई बार केवल नाम के लिए पंजीकृत रहते हैं और न तो राजनीतिक गतिविधियां करते हैं, न ही चुनाव में भाग लेते हैं। कुछ मामलों में ऐसे दलों पर चुनावी चंदे या वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता न बरतने के आरोप भी लगते हैं। इसलिए ECI का मानना है कि सक्रिय लोकतंत्र के लिए केवल सक्रिय दल ही पंजीकृत सूची में बने रहने चाहिए।
पिछली बार भी हुई थी ऐसी बड़ी कार्रवाई
यह पहला मौका नहीं है जब निर्वाचन आयोग ने बड़े पैमाने पर दलों को लिस्ट से बाहर किया हो। पिछले वर्षों में भी अलग-अलग राज्यों में दर्जनों दलों के पंजीकरण रद्द किए गए थे, लेकिन उत्तर प्रदेश में एक साथ 115 दलों को हटाना अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक है।
अब जो दल लिस्ट से बाहर हो गए हैं, वे यदि दोबारा राजनीतिक गतिविधियां शुरू करना चाहें तो उन्हें नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए आयोग के निर्धारित मानदंडों को पूरा करना जरूरी होगा, जिसमें सक्रिय राजनीतिक उपस्थिति, न्यूनतम सदस्य संख्या और वित्तीय पारदर्शिता जैसी शर्तें शामिल हैं।
भारत निर्वाचन आयोग का यह कदम राज्य में राजनीतिक दलों की सूची को सक्रिय और पारदर्शी बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यह कार्रवाई निष्क्रिय और केवल नाम मात्र के लिए बने दलों को हटाकर चुनावी प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित करने का प्रयास है।
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