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सीजफायर पर अमेरिका की मध्यस्थता से कांग्रेस आक्रोशित, गहलोत बोले- ऐसी क्या मजबूरी थी?

Operation Sindoor: भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर अमरीका की मध्यस्थता पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। अशोक गहलोत ने कहा कि ऐसी क्या मजबूरी रही जिससे केन्द्र सरकार ने किसी तीसरे देश को दखल देने दिया।

Operation Sindoor: भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष विराम पर अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा सोशल मीडिया के ज़रिए की गई घोषणा को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे भारत की विदेश नीति और संप्रभुता के खिलाफ बताया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया कि ऐसी क्या मजबूरी रही जिससे किसी तीसरे देश को दखल देने दिया गया?

Operation Sindoor: गहलोत ने सरकार से पूछा- ऐसी क्या मजबूरी रही?

गहलोत ने सोमवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति की याद दिलाते हुए लिखा, पूर्व में भारत कभी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे नहीं झुका। यही कारण है कि अमरीकी राष्ट्रपति द्वारा सीजफायर का ऐलान करना देशवासियों के गले नहीं उतर रहा है।” उन्होंने इस घटना को भारत की संप्रभुता पर सवाल बताते हुए कहा, “यह निर्णय पूरी तरह भारत सरकार का होना चाहिए था।

Operation Sindoor: नेहरू और इंदिरा के फैसलों की दिलाई याद

गहलोत ने भारत की मजबूती और संप्रभुता के दो ऐतिहासिक उदाहरण साझा करते हुए कहा कि वर्ष 1961 में जब वह कक्षा छह में पढ़ते थे, तब गोवा पुर्तगाल के कब्जे में था। पंडित नेहरू की सरकार ने ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत गोवा को भारत में मिलाया, जबकि पुर्तगाल NATO का सदस्य था और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने सैन्य कार्रवाई न करने का दबाव बनाया था। इसके बावजूद भारत ने संप्रभु निर्णय लिया।

इसी तरह उन्होंने 1974 का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह यूनिवर्सिटी में थे, तब सिक्किम एक स्वतंत्र राजतंत्र था, जहां की महारानी अमेरिका से थीं। अमेरिका ने भारत पर कार्रवाई न करने का दबाव डाला, लेकिन इंदिरा गांधी की सरकार ने वह दबाव नहीं माना और सिक्किम को भारत में मिला लिया।

अमेरिका के दखल से पूरा देश चिंतित

गहलोत ने स्पष्ट कहा, भारत-पाकिस्तान के मसले में तीसरे पक्ष का दखल पहले कभी स्वीकार नहीं किया गया। आज जो हालात बने हैं, उससे पूरा देश चिंतित है कि आखिर क्या मजबूरी थी, जो सरकार को अमरीका को बीच में लाना पड़ा?

डोटासरा का हमला: मोदी सरकार बताए सच

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जब देश की सेना पूरी तरह सक्षम है, विपक्ष एकजुट है, तो फिर किसी तीसरे की पंचायती क्यों कराई जा रही है? डोटासरा ने प्रधानमंत्री मोदी से देश को सफाई देने और विपक्ष से आम सहमति लेने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि देश में अगर आतंकवादी हमला हुआ है, तो पाकिस्तान से पूरी तरह बदला लिया जाना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने कहा, इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे। आज अगर कोई भारत को कमजोर समझ रहा है, तो यह उसकी भूल है। जब तक आतंकवाद खत्म नहीं होता, युद्धविराम नहीं होना चाहिए।

पायलट ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी राष्ट्रपति की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा, शायद यह पहली बार हुआ है, जब भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम की घोषणा किसी तीसरे देश — वह भी अमेरिका — के सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से हुई। भारत-पाक मसलों का अंतरराष्ट्रीयकरण नीतिगत रूप से गलत और चिंताजनक है।

कांग्रेस की स्पष्ट मांग

कांग्रेस की ओर से एक स्वर में यह मांग उठ रही है कि केंद्र सरकार स्पष्ट करे कि क्या सीजफायर का निर्णय भारत की संप्रभुता के तहत लिया गया, या किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव में? पार्टी नेताओं का कहना है कि भारत ने हमेशा आत्मनिर्भर विदेश नीति अपनाई है, और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की परंपरा नहीं रही है।

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