जयपुर। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी जी द्वारा प्रस्तुत बजट राज्य की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने वाला एक दूरदर्शी दस्तावेज है। इस पर अपना विश्लेषण साझा करते हुए कराधान एवं कॉर्पोरेट विशेषज्ञ सीए अंशुल चित्तौड़ा ने बताया कि यह बजट अपने विशाल आकार और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण की दृष्टि से अब तक के सबसे सशक्त बजटों में से एक है। बजट आवंटन में की गई अभूतपूर्व वृद्धि संकेत देती है कि सरकार बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण हेतु संकल्पित है।
अवसंरचना और युवा शक्ति: सीए अंशुल चित्तौड़ा के अनुसार बड़े पैमाने पर नई सड़कों का निर्माण न केवल कनेक्टिविटी सुधारेगा, बल्कि निजी निवेश को भी आकर्षित करेगा। युवाओं के लिए लाखों नौकरियों की घोषणा और मेधावी छात्रों को डिजिटल शिक्षा हेतु वित्तीय सहायता देना मानव संसाधन में किया गया एक बड़ा निवेश है।
राजकोषीय सुधार और व्यापार सुगमता: कॉर्पोरेट जगत के नजरिए से सीए अंशुल चित्तौड़ा ने बताया कि मध्यम वर्ग और निवेशकों के लिए कई व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं:
पंजीयन शुल्क में कटौती: ऋण दस्तावेजों पर पंजीकरण दर और स्टाम्प ड्यूटी में कमी से रियल एस्टेट क्षेत्र में तरलता (Liquidity) बढ़ेगी।
एमनेस्टी योजनाएं: बकाया करों के लिए एमनेस्टी योजना लाना राजस्व वसूली को सरल बनाने और व्यापारिक विवादों के त्वरित निपटारे की सराहनीय पहल है।
उपभोक्ता राहत: अन्य राज्यों के वाहनों पर टैक्स में छूट से उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलेगी।
ग्रामीण एवं सामाजिक सशक्तिकरण: सीए अंशुल चित्तौड़ा ने बताया कि कृषि क्षेत्र के लिए सुलभ ब्याज मुक्त ऋण और गेहूं पर अतिरिक्त बोनस ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी के प्रवाह को बढ़ाने और किसानों की क्रयशक्ति को मजबूती प्रदान करने में सहायक होगा। मुख्यमंत्री लखपति दीदी योजना और बीपीओ केंद्रों के प्रावधान महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देंगे।
निष्कर्ष: सीए अंशुल चित्तौड़ा का मत है कि दिया कुमारी जी द्वारा प्रस्तुत यह बजट विकास और सामाजिक कल्याण का एक संतुलित ढांचा है। इसकी सफलता पारदर्शी क्रियान्वयन पर टिकी है, जो ‘विकसित राजस्थान’ के संकल्प को सिद्ध करने में मील का पत्थर साबित होगा।
