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मुकुल रॉय का निधन: पश्चिम बंगाल की राजनीति के ‘चाणक्य’ का अंत, 71 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से ली अंतिम सांस

Mukul Roy passes away: मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर चार दशकों से अधिक लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा। वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।

Mukul Roy passes away: पश्चिम बंगाल की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शुमार पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार तड़के निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे। अपोलो हॉस्पिटल, सॉल्ट लेक में कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हुई। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने पुष्टि की कि रात करीब 1:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले कई दिनों से वे कोमा में थे और कई स्वास्थ्य जटिलताओं से जूझ रहे थे। इलाज के बावजूद वे ठीक नहीं हो सके।

Mukul Roy passes away: टीएमसी के संस्थापक सदस्यों में से थे एक

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर चार दशकों से अधिक लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा। वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 1998 में ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। वे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने और ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते थे। टीएमसी के दूसरे नंबर के नेता के रूप में उन्हें ‘पार्टी का चाणक्य’ कहा जाता था।

Mukul Roy passes away: केंद्र में मंत्री पद और टीएमसी से दूरी

2011 में यूपीए-2 सरकार में टीएमसी सहयोगी होने पर मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनाया गया। वे शिपिंग और वाटरवेज तथा शहरी विकास के राज्य मंत्री भी रहे। दो बार राज्या सभा सदस्य चुने गए। हालांकि, समय के साथ ममता बनर्जी से मतभेद बढ़े। 2015 में उन्हें पार्टी महासचिव पद से हटा दिया गया। पार्टी कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी कम होती गई।

2017 में उन्होंने टीएमसी से नाता तोड़कर भाजपा जॉइन कर ली और राज्या सभा से इस्तीफा दे दिया। भाजपा में वे पश्चिम बंगाल में पार्टी को मजबूत करने में सक्रिय रहे। 2021 विधानसभा चुनाव में वे भाजपा के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट से जीते। लेकिन चुनाव परिणाम आने के कुछ दिनों बाद ही वे फिर टीएमसी में लौट आए, जहां ममता बनर्जी ने तीसरी बार बड़ी बहुमत से सरकार बनाई।

Mukul Roy passes away: विधायक पद पर विवाद और अदालती लड़ाई

वे विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिए और भाजपा विधायक बने रहे। विधानसभा अध्यक्ष बिमान बंद्योपाध्याय ने भाजपा की अयोग्यता की याचिका खारिज कर दी। उन्हें पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (पीएसी) का चेयरमैन भी बनाया गया, जो आमतौर पर विपक्ष को मिलता है। भाजपा ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी।

उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 16 जनवरी 2026 को सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस ज्योतिर्मय बागची की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे दे दिया।

Mukul Roy passes away: राजनीतिक विरासत और प्रभाव

मुकुल रॉय को पश्चिम बंगाल में विपक्षी नेताओं को अपनी ओर खींचने और दल-बदल की राजनीति का प्रणेता माना जाता है। उनकी रणनीति ने टीएमसी और भाजपा दोनों को फायदा पहुंचाया। वे ‘आकर्षण और प्रभाव’ की राजनीति के प्रतीक बने। उनका निधन बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।

टीएमसी, भाजपा और अन्य नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। ममता बनर्जी ने उन्हें ‘पुराने साथी’ बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उनका अंतिम संस्कार कोलकाता में होगा। वे पत्नी और बेटे शुभ्रांशु रॉय के साथ परिवार छोड़ गए हैं।

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