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Saturday, March 14, 2026
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Independence Day 2024: पीएम मोदी ने तोड़ा खुद का रिकॉर्ड, दिया अब तक का सबसे लंबा भाषण, जानिए भाषण की 10 बड़ी बातें

Independence Day 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2024 को ऐतिहासिक लाल किले पर तिरंगा फहराते हुए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड स्थापित किया।

Independence Day 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2024 को ऐतिहासिक लाल किले पर तिरंगा फहराते हुए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड स्थापित किया। यह उनका लगातार 11वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन था, जो उन्होंने लाल किले की प्राचीर से दिया। इस मौके पर उन्होंने देशवासियों को संबोधित करते हुए आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश के विकास, आर्थिक सुधारों और भविष्य की चुनौतियों पर भी बात की, साथ ही भारत के 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के दृष्टिकोण को साझा किया।

पीएम मोदी ने तोड़ा खुद का रिकॉर्ड

यह तीसरी बार है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में रहते हुए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर तिरंगा फहराया है। उनकी यह उपलब्धि उन्हें भारतीय इतिहास में लाल किले से सबसे अधिक बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने वाले प्रधानमंत्रियों में शामिल करती है।

लाल किले की प्राचीर से अब तक का सबसे लंबा भाषण

78वें स्वतंत्रता दिवस (2024) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अब तक का सबसे लंबा भाषण दिया, जो 98 मिनट तक चला। इस भाषण के साथ, उन्होंने अपने 2016 के 96 मिनट के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। यह उनकी प्रतिबद्धता और देश के प्रति उनकी दृष्टि को स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है। इसके विपरीत, उनका सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस भाषण 2017 में था, जब उन्होंने करीब 56 मिनट तक देशवासियों को संबोधित किया था।

पीएम मोदी के पिछले भाषणों के समय पर नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वतंत्रता दिवस पर 2024 में दिया गया 98 मिनट का भाषण अब तक का सबसे लंबा रहा है, जो उनके पिछले भाषणों से भी अधिक समय का था। यदि उनके पिछले भाषणों की तुलना की जाए, तो उन्होंने 2014 में अपने पहले भाषण में 65 मिनट का समय लिया था, और तब से हर साल उनका संबोधन औसतन एक घंटे से अधिक का रहा है। पीएम मोदी के पिछले भाषणों के समय पर नजर डालें तो साल 2023 में 90 मिनट, 2022 में 83 मिनट, 2021 में 88 मिनट, साल 2020 में 86 का भाषण दिया था। वहीं साल 2019 में 93 मिनट, 2018 में 82 मिनट, 2017 में 56 मिनट, 2016 में 96 मिनट, 2015 में 86 मिनट का संबोधन दिया था।

जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी पीएम मोदी तीसरे स्थन पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 11वीं बार स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को संबोधित किया। इस उपलब्धि के साथ, वह पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (17 बार) और इंदिरा गांधी (16 बार) के बाद लाल किले से सबसे अधिक बार तिरंगा फहराने वाले प्रधानमंत्रियों में तीसरे स्थान पर आ गए हैं।

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि अगर 40 करोड़ लोग गुलामी की बेड़ियां तोड़कर आजादी हासिल कर सकते हैं, तो 140 करोड़ लोगों के संकल्प से क्या हासिल नहीं किया जा सकता।

‘विकसित भारत 2047’ का विजन:

‘विकसित भारत 2047’ का विजन सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों के सपनों और संकल्पों का प्रतिबिंब है। पीएम मोदी ने इस अवसर पर उन सुझावों का भी उल्लेख किया, जिन्हें लोगों ने 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए साझा किया है। इनमें भारत को विनिर्माण का केंद्र बनाने और ‘सीड कैपिटल’ के रूप में स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं।

किसानों का जीवन बेहत बनाने का लक्ष्य:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किसानों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए व्यापक प्रयास कर रही है और उनकी आय बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, और इस दिशा में बजट आवंटन में भी वृद्धि की गई है।

आत्मनिर्भर हो रहीं महिलाएं:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में हो रहे महत्वपूर्ण बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लगभग 10 करोड़ नई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जिससे वे न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं, बल्कि परिवार के फैसलों में भी उनकी भागीदारी बढ़ रही है।

भारत बनेगा इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग का हब:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत को इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत वैश्विक स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बन जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्व के कई उद्योगपति भारत में निवेश करने के इच्छुक हैं, और यह भारत के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा अवसर है। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों से अपील की कि वे निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्पष्ट और अनुकूल नीतियां बनाएं।

भारत के CEO दुनिया में कमा रहे नाम:

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) की वैश्विक सफलता और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों में मिल रही उपलब्धियों के बीच समानता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, जहां हमारे CEOs वैश्विक मान्यता प्राप्त कर रहे हैं, वहीं एक करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति दीदी बन रही हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने इन स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए 10 लाख से 20 लाख रुपये का आवंटन करने का निर्णय लिया है।

बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो:

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हालात को लेकर भारत के पास पड़ोसी देश के नाते चिंता होना स्वाभाविक है और भारत आशा करता है कि वहां की स्थिति जल्द सामान्य होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से 140 करोड़ भारतीयों की चिंता का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।

महिला अत्याचार पर गंभीर:

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर महिला अत्याचार की गंभीरता को लेकर महत्वपूर्ण बात की। उन्होंने कहा कि समाज को और राज्य सरकारों को महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार को गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने जन सामान्य के आक्रोश का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की त्वरित जांच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाना आवश्यक है।

विपक्ष को खरी-खरी:

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में विपक्ष और उनके विचारों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत की प्रगति और विकास को नहीं देख सकते और केवल अपनी स्वार्थी इच्छाओं को ही प्राथमिकता देते हैं। उनका कहना था कि जब तक उनका खुद का लाभ नहीं होता, तब तक उन्हें दूसरों की भलाई अच्छी नहीं लगती।

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