Water Crisis: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नर्मदा जल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में रिसाव के कारण सीवेज का पानी मिल गया, जिससे उल्टी, दस्त और निर्जलीकरण जैसे लक्षणों से सैकड़ों लोग बीमार हो गए। मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं- कुछ रिपोर्ट्स में 7 से 10 मौतें बताई जा रही हैं, जबकि स्थानीय लोग 13 तक का दावा कर रहे हैं।
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Water Crisis: विजयवर्गीय का बयान, नाले का पानी मिला
नगरीय विकास मंत्री और स्थानीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि संभावना थी कि पीने के पानी में नाले का पानी मिल गया है और जांच में यही सामने आया है। उन्होंने बताया, “पुलिस चौकी के पास का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है। हम पूरी तरह जांच करेंगे, इसमें 8 से 10 दिन लग सकते हैं।” मंत्री ने इलाके के नेताओं से बैठक की जानकारी भी दी।
विजयवर्गीय ने कहा कि कुल 8 लोगों की मौत हुई है, जिसमें 2-3 मौतें प्राकृतिक कारणों से हुई हैं। अगर डॉक्टर बताएंगे कि बाकी मौतें भी दूषित पानी से हुई हैं तो उन्हें लिस्ट में शामिल किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ितों का पूरा इलाज सरकार कराएगी और मुआवजा दिया जाएगा।
Water Crisis: मुख्यमंत्री मोहन यादव की सक्रियता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित मरीजों से अस्पतालों में मुलाकात की और स्थिति की समीक्षा की। प्रारंभिक जांच में नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में रिसाव मिला, जहां पास के शौचालय से सीवेज पानी में मिल गया। सीएम ने इसे इमरजेंसी जैसी स्थिति बताया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। सरकार ने मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये मुआवजा और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज घोषित किया है।
Water Crisis: अस्पतालों में मरीजों की स्थिति
बुधवार तक इंदौर के विभिन्न अस्पतालों में 116 से अधिक लोग भर्ती थे, जिनमें से कई ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। कुल 100 से ज्यादा लोगों का उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं। अब तक 2,700 से अधिक घरों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें करीब 12,000 निवासियों की जांच हुई। हल्के लक्षण वाले 1,146 लोगों को मौके पर ही दवा दी गई।
Water Crisis: प्रशासन की कार्रवाई
इंदौर नगर निगम ने पाइपलाइन की मरम्मत शुरू कर दी है और टैंकरों से साफ पानी सप्लाई की जा रही है। लीकेज की जगह पर बने शौचालय को तोड़ा गया। तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई- एक को बर्खास्त और दो को निलंबित किया गया। तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। पानी के सैंपल जांच में बैक्टीरियल कंटामिनेशन की पुष्टि हुई है।
Water Crisis: राजनीतिक विवाद
विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंत्री विजयवर्गीय से इस्तीफे की मांग की। मंत्री के एक मीडिया इंटरैक्शन में आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल करने पर विवाद हुआ, जिसके लिए बाद में उन्होंने माफी मांगी।
Water Crisis: निवासियों की पुरानी शिकायतें अनसुनी
यह संकट 24 दिसंबर से शुरू हुआ, जब पानी में असामान्य गंध की शिकायतें आईं। इंदौर लगातार आठ साल स्वच्छ शहर रहा है, लेकिन यह घटना नगर निगम की व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक पानी की व्यवस्था की है और जांच जारी है।
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