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Sunday, July 26, 2026
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दीपावली की खुशी पर छाया मातम: झाबुआ में ट्रैक्टर ट्रॉली खाई में गिरी, 3 की मौत, 22 घायल

Road Accident: पुलिस के अनुसार, ट्रॉली पर 25 से अधिक लोग सवार थे, जो बाजार की भीड़ के कारण ओवरलोड हो चुकी थी। दत्या घाटी के तीखे मोड़ पर चालक ने अचानक वाहन पर नियंत्रण खो दिया।

Road Accident: मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के सेमलखेड़ी पारा गांव में रविवार देर रात दीपावली के उत्साह को एक भयावह दुर्घटना ने मातम में बदल दिया। दत्या घाटी के पास एक ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिसमें तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और 22 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा तब हुआ जब ग्रामीण राजगढ़ के साप्ताहिक ‘हाट’ बाजार से दीपावली की खरीदारी (पटाखे, मिठाइयां और नए कपड़े) लेकर घर लौट रहे थे। मृतकों में दो मासूम बच्चे शामिल होने से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जहां घरों में दीये जल रहे थे, वहां अब आंसुओं की बाढ़ है।

Road Accident: ट्रॉली पर 25 से अधिक लोग थे सवार

पुलिस के अनुसार, ट्रॉली पर 25 से अधिक लोग सवार थे, जो बाजार की भीड़ के कारण ओवरलोड हो चुकी थी। दत्या घाटी के तीखे मोड़ पर चालक ने अचानक वाहन पर नियंत्रण खो दिया। ट्रॉली सड़क से फिसलकर नीचे लुढ़क गई और पलटते-पलटते खाई में समा गई। घटना रात करीब 10 बजे की है, जब अंधेरा और कोहरा घना था। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत मदद के लिए दौड़ लगाई, लेकिन दुर्गम इलाके और अंधेरे के कारण बचाव कार्य में घंटों लग गए। रस्सियां और टॉर्च की रोशनी में घायलों को बाहर निकाला गया।

Road Accident: मृतक और घायलों की पहचान

मृतकों की शिनाख्त सेपू सिंह डिंडोर (25 वर्ष), कमलेश डिंडोर (8 वर्ष) और अनिल डिंडोर (12 वर्ष) के रूप में हुई है। सेपू सिंह गांव के युवा थे और परिवार की जिम्मेदारी संभालते थे, जबकि कमलेश और अनिल स्कूल जाने वाले भाई थे। उनकी मौत से तीन परिवार बेसहारा हो गए। घायलों में दो की हालत बेहद नाजुक है—उन्हें तत्काल गुजरात के दाहोद जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञों की टीम इलाज कर रही है। शेष 20 घायलों का उपचार पारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और झाबुआ जिला अस्पताल में जारी है। घायलों को सिर में चोट, फ्रैक्चर, कट लगने और आंतरिक रक्तस्राव जैसी समस्याएं हैं। उनकी पहचान सुनीता डिंडोर, वित्या डिंडोर, भंवर डिंडोर, नजमा, भागला, शिवानी, अशोक, विष्णु, आशीष, रजनी, सना, देवक सिंह, रघु, लीला रश्मि, सपना, बान सिंह, नजबाई, रंजीत, मनीषा, कामना और करण के रूप में हुई है। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। डॉक्टरों ने बताया कि अंधेरे में पहुंचने में देरी से कुछ घायलों की हालत बिगड़ी, लेकिन अब सभी स्थिर हैं।

Road Accident: ओवरलोडिंग और लापरवाही मुख्य कारण

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने पाया कि ट्रॉली में क्षमता से दोगुने लोग सवार थे, साथ ही सामान का बोझ भी अधिक था। चालक की तेज रफ्तार और अनुभवहीनता भी दुर्घटना का कारण बनी। एसपी झाबुआ ने कहा, “ओवरलोडिंग ग्रामीण इलाकों में आम समस्या है, लेकिन यह जानलेवा साबित हुई। चालक से पूछताछ की जा रही है।” घटनास्थल पर बिखरा सामान—पटाखों के डिब्बे, मिठाइयां और कपड़े—दुर्घटना की भयावहता बयान कर रहे थे। झाबुआ जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में ट्रैक्टर ट्रॉली ही मुख्य परिवहन है, लेकिन सड़कें खराब और घाटियां खतरनाक हैं। पिछले तीन वर्षों में इसी रूट पर चार बड़े हादसे हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी बस सेवाओं का विस्तार और सड़क सुरक्षा जागरूकता जरूरी है।

Road Accident: प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

जिला कलेक्टर और एसपी रात में ही मौके पर पहुंचे। कलेक्टर ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी और राज्य आपदा राहत कोष से 4-4 लाख रुपये की तत्काल सहायता का ऐलान किया। घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश आया है कि प्रभावित परिवारों को रोजगार और आवास सहायता भी दी जाए। गांव में मुआवजे की राशि वितरित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दत्या घाटी में क्रैश बैरियर लगाए जाएं और रात में बस सेवा शुरू हो। प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है, जिसकी रिपोर्ट एक सप्ताह में आएगी।

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