39.1 C
New Delhi
Monday, May 18, 2026
HomeदेशWaqf Case: नई नियुक्तियों और डिनोटिफिकेशन पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार...

Waqf Case: नई नियुक्तियों और डिनोटिफिकेशन पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया 7 दिन का समय

Waqf Case: वक्फ कानून में हाल में किए गए संशोधनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को दूसरे दिन सुनवाई जारी रही। केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन की मोहलत दी है।

Waqf Case: वक्फ कानून में हालिया संशोधनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के दूसरे दिन महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया है। साथ ही इस दौरान वक्फ संपत्तियों के डिनोटिफिकेशन और वक्फ बोर्ड में नई नियुक्तियों पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है।

Waqf Case: अदालत ने केंद्र को चेताया, पक्ष प्रभावित न हो

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से निवेदन किया कि यह विषय अत्यंत संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व का है। उन्होंने कहा कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है जिसे केवल एक या दो धाराओं को देखकर निपटाया जा सके। इसके लिए पूरे वक्फ कानून और इसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समझना आवश्यक होगा। यह कानून लाखों सुझावों और गहन मंथन के बाद पारित हुआ है।

Waqf Case: अगली सुनवाई की तारीख 5 मई तय

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से बचना चाहती है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांगा ताकि केंद्र सरकार अपना विस्तृत पक्ष अदालत के समक्ष रख सके। इस अनुरोध को न्यायालय ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 5 मई तय की है।

Waqf Case: किसी भी पक्ष को कोई नुकसान न हो

सीजेआई संजीव खन्ना ने स्पष्ट रूप से कहा कि अदालत की मंशा यह सुनिश्चित करना है कि सुनवाई के दौरान किसी भी पक्ष को कोई नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि अदालत निष्पक्षता और संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से काम कर रही है।

कोई डिनोटिफिकेशन और नियुक्ति नहीं होगी: सरकार का वादा

सुनवाई के दौरान, अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि क्या वह यह आश्वासन दे सकती है कि वक्फ एक्ट, 1995 के तहत जो संपत्तियां पहले से अधिसूचित या पंजीकृत हैं, उन्हें न डिनोटिफाई किया जाएगा और न ही उनमें कोई प्रशासनिक परिवर्तन किया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका समर्थन करते हुए अदालत को भरोसा दिलाया कि अगली सुनवाई तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ अधिनियम की संशोधित धारा 9 और 14 के तहत न तो किसी वक्फ परिषद का गठन किया जाएगा और न ही किसी नए सदस्य की नियुक्ति की जाएगी। यह आश्वासन तब तक प्रभावी रहेगा जब तक अदालत इस पर अंतिम निर्णय नहीं ले लेती।

अदालत का अंतरिम आदेश

शीर्ष अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, हम सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए बयानों को रिकॉर्ड पर लेते हैं। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार सात दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करेगी। साथ ही, इस अवधि के दौरान वक्फ अधिनियम की संशोधित धारा 9 और 14 के तहत कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी, और वक्फ संपत्तियों को डिनोटिफाई नहीं किया जाएगा, चाहे वे अधिसूचना द्वारा घोषित हों या पंजीकृत हों। इस आदेश के बाद अब केंद्र सरकार के पास 23 अप्रैल तक का समय है अपना विस्तृत पक्ष अदालत में रखने के लिए। उसके बाद अदालत 5 मई को अगली सुनवाई में आगे की कार्यवाही तय करेगी।

क्या है मामला?

दरअसल, हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा वक्फ अधिनियम, 1995 में कुछ अहम संशोधन किए गए हैं, जिन पर यह आरोप लगाए गए हैं कि वे संविधान के कुछ प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं और इससे अल्पसंख्यक समुदाय की संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण पर असर पड़ सकता है। इन्हीं संशोधनों को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।

अब अदालत की निगाहें केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि कानून में किए गए संशोधन तर्कसंगत और संविधान सम्मत हैं या नहीं। यह मामला धार्मिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है और इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें:-

DMK के गढ़ पर भगवा घेरा: 2026 की सियासी जंग में BJP-AIADMK का गेमचेंजर अलायंस, मिशन तमिलनाडु फुल स्पीड में! क्या डीएमके का किला ढह जाएगा?

RELATED ARTICLES
New Delhi
haze
39.1 ° C
39.1 °
39.1 °
18 %
4.1kmh
0 %
Mon
40 °
Tue
45 °
Wed
45 °
Thu
45 °
Fri
44 °

Most Popular