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Wednesday, September 16, 2026
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Naxalite Surrender: दो हार्डकोर माओवादी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, SP की चेतावनी– समय रहते लौटें नहीं तो अंजाम भुगतें

Naxalite Surrender: प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के दो हार्डकोर नक्सलियों ने झारखंड के लातेहार जिले में पुलिस और सुरक्षा बलों के अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

Naxalite Surrender: प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी को एक और बड़ा झटका देते हुए मंगलवार को इसके दो हार्डकोर सदस्य लातेहार पुलिस और सुरक्षा बलों के अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान अमरजीत बिरजिया और मिथिलेश कोरबा के रूप में हुई है। दोनों छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के निवासी हैं, लेकिन झारखंड के नक्सल प्रभावित लातेहार जिले में सक्रिय थे।

Naxalite Surrender: एसपी ने माला पहनाकर किया स्वागत

लातेहार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार गौरव और सीआरपीएफ के कमांडेंट यादराम बुनकर की मौजूदगी में आयोजित एक कार्यक्रम में इन दोनों नक्सलियों ने अपने हथियार डाल दिए। अधिकारियों ने उन्हें माला पहनाकर समाज में वापसी का स्वागत किया और मुख्यधारा में लौटने के उनके निर्णय की सराहना की।

Naxalite Surrender: छत्तीसगढ़ से झारखंड तक फैला था आतंक

पुलिस के मुताबिक, अमरजीत बिरजिया और मिथिलेश कोरबा माओवादी कमांडर छोटू खरवार के दस्ते के सक्रिय और प्रमुख सदस्य थे। इन पर झारखंड के छिपादोहर थाने में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। नक्सली गतिविधियों के दौरान ये दोनों कई हिंसक घटनाओं में शामिल रहे हैं, जिनमें सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, ग्रामीणों को धमकाना और सुरक्षा बलों पर हमला शामिल है।

Naxalite Surrender: सुरक्षा बलों के रडार पर थे दोनों नक्सली

एसपी कुमार गौरव ने बताया कि दोनों नक्सली लंबे समय से सुरक्षा बलों के रडार पर थे और इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा था। पुलिस और सीआरपीएफ की दबिश से घबराकर अंततः इन्होंने आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया।

एसपी की चेतावनी– समय रहते लौटें नहीं तो अंजाम भुगतें

आत्मसमर्पण समारोह के दौरान एसपी कुमार गौरव ने क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सलियों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि या तो वे जल्द से जल्द आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौट आएं, या फिर पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के लिए तैयार रहें। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, या तो हथियार डालो, या फिर मारे जाओ। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में नक्सलियों की कमर टूट चुकी है और अब वे छोटे-छोटे समूहों में छिपे हुए हैं। पुलिस इन पर पैनी नजर रख रही है और अभियान लगातार जारी रहेगा।

राज्य में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा अभियान

गौरतलब है कि झारखंड और छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने हाल के महीनों में बड़ी कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ में अब तक 50 से अधिक नक्सली मारे जा चुके हैं और बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। एक दिन पहले ही झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता ने चाईबासा में नक्सल विरोधी अभियान की समीक्षा करते हुए कहा था कि अब नक्सली संगठन अंतिम सांसें गिन रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जल्द ही राज्य को नक्सल मुक्त बना दिया जाएगा।

मोस्ट वांटेड की सूची में 13 बड़े नक्सली

राज्य पुलिस के अनुसार, फिलहाल झारखंड में भाकपा माओवादी के 13 बड़े नक्सली मोस्ट वांटेड की सूची में हैं। इनमें मिसिर बेसरा, पतिराम मांझी और असीम मंडल जैसे शीर्ष माओवादी शामिल हैं, जिन पर एक-एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। इनके अलावा अनमोल, मोछु, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन, पिंटू लोहरा, चंदन लोहरा, अमित हांसदा उर्फ अपटन, जयकांत और रापा मुंडा जैसे नक्सली भी सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में शामिल हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदली स्थिति

झारखंड और छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित इलाकों में अब पहले जैसा आतंक नहीं रहा। पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई, राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और स्थानीय प्रशासन की सख्ती से माओवादियों के हौसले पस्त हैं।

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