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Wednesday, February 11, 2026
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LVM3-M6 मिशन सफल: 6100 किलो भारी ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 ऑर्बिट में, स्मार्टफोन को मिलेगी स्पेस से हाई-स्पीड इंटरनेट

ISRO Bluebird Block-2 Launch: ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट का वजन लगभग 6100 से 6500 किलोग्राम है, जो LVM3 द्वारा भारतीय धरती से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड है।

ISRO Bluebird Block-2 Launch: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठान (इसरो) ने बुधवार सुबह अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। यह LVM3-M6 मिशन अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल की ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 संचार सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने के लिए था। सुबह करीब 8:55 बजे सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से रॉकेट ने उड़ान भरी और निर्धारित समय पर सैटेलाइट को ऑर्बिट में पहुंचा दिया। यह इसरो की कॉमर्शियल लॉन्च क्षमता का नया कीर्तिमान है।

ISRO Bluebird Block-2 Launch: अब तक का सबसे भारी पेलोड, 223 वर्ग मीटर का विशाल एंटीना

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट का वजन लगभग 6100 से 6500 किलोग्राम है, जो LVM3 द्वारा भारतीय धरती से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड है। इससे पहले नवंबर 2025 में LVM3-M5 मिशन में 4400 किलोग्राम का कम्युनिकेशन सैटेलाइट लॉन्च किया गया था। इस सैटेलाइट में 223 वर्ग मीटर (लगभग 2400 स्क्वायर फीट) का फेज्ड ऐरे एंटीना लगा है, जो इसे LEO में तैनात होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा कॉमर्शियल संचार सैटेलाइट बनाता है।

यह सैटेलाइट सामान्य स्मार्टफोन को बिना किसी अतिरिक्त उपकरण के स्पेस से सीधे हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। प्रति कवरेज सेल में 120 Mbps तक की पीक डेटा स्पीड मिलेगी, जो वॉइस कॉल, वीडियो कॉल, मैसेजिंग, स्ट्रीमिंग और इंटरनेट सर्विसेज को सपोर्ट करेगी। AST स्पेसमोबाइल की यह अगली पीढ़ी की सैटेलाइट ब्लॉक-1 से 10 गुना अधिक बैंडविड्थ कैपेसिटी वाली है। कंपनी ने सितंबर 2024 में ब्लूबर्ड 1-5 सैटेलाइट्स लॉन्च की थीं, जो अमेरिका और कुछ अन्य क्षेत्रों में कनेक्टिविटी दे रही हैं।

ISRO Bluebird Block-2 Launch: LVM3 की ताकत और सफल इतिहास

LVM3, जिसे ‘बाहुबली’ रॉकेट भी कहा जाता है, इसरो का पूरी तरह स्वदेशी विकसित सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल है। इसकी ऊंचाई 43.5 मीटर, लिफ्ट-ऑफ वजन 640 टन है। यह तीन स्टेज वाला रॉकेट है- दो सॉलिड बूस्टर्स (S200), लिक्विड कोर स्टेज (L110) और क्रायोजेनिक अपर स्टेज (C25)। LEO में इसकी पेलोड क्षमता 8000 किलोग्राम तक है।
यह रॉकेट का छठा ऑपरेशनल मिशन था। इससे पहले LVM3 ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और दो वनवेब मिशनों (कुल 72 सैटेलाइट्स) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। यह मिशन इसरो की कॉमर्शियल शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और AST स्पेसमोबाइल के बीच समझौते के तहत था। सैटेलाइट को करीब 600 किलोमीटर ऊंचाई वाली ऑर्बिट में तैनात किया गया।

ISRO Bluebird Block-2 Launch: दूरदराज क्षेत्रों में क्रांति, स्टारलिंक को मिलेगी टक्कर

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में उन इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाना है जहां ग्राउंड बेस्ड नेटवर्क नहीं है। दूरदराज के गांव, पहाड़, समुद्र और रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी 4G-5G स्पीड मिलेगी। यह AST स्पेसमोबाइल की ग्लोबल कांस्टेलेशन का हिस्सा है, जो 24/7 कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक स्टारलिंक जैसी सेवाओं से सीधे मुकाबला करेगी, लेकिन फायदा यह है कि यूजर्स को कोई स्पेशल फोन या डिश की जरूरत नहीं पड़ेगी।

ISRO Bluebird Block-2 Launch: इसरो की कॉमर्शियल सफलता और भविष्य की योजनाएं

यह लॉन्च इसरो के लिए बड़ा कॉमर्शियल मील का पत्थर है। विदेशी क्लाइंट्स के लिए भारी सैटेलाइट्स लॉन्च करने से भारत की ग्लोबल लॉन्च मार्केट में स्थिति मजबूत होगी। इसरो अध्यक्ष ने मिशन सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष तकनीक की विश्वसनीयता का प्रमाण है। भविष्य में LVM3 गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए भी इस्तेमाल होगा।

2025 इसरो के लिए शानदार साल रहा, जिसमें कई सफल मिशन हुए। यह लॉन्च क्रिसमस ईव पर हुआ, जो अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए बड़ा तोहफा है। AST स्पेसमोबाइल अब अपनी कांस्टेलेशन को और विस्तार देगी, जिससे करोड़ों लोगों को कनेक्टिविटी मिलेगी।

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