31.1 C
New Delhi
Thursday, March 26, 2026
Homeहेल्थAlzheimer: अल्जाइमर का जोखिम कम कर सकता है योग, महिलाओं के लिए...

Alzheimer: अल्जाइमर का जोखिम कम कर सकता है योग, महिलाओं के लिए विशेष लाभदायक

Alzheimer: उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त पर असर पड़ने लगता है। अक्सर हम चीजों और बातों को भूलने लगते हैं। कई बार लोगो को अल्जाइमर की बीमारी हो जाती है। महिलाओं में भी अल्जाइमर की बीमारी होती है लेकिन एक स्टडी के अनुसार, महिलाओं में होने वाले अल्जाइमर और याददाश्त कम हाेने जैसी बीमारी को योग क्रिया के माध्‍यम से ठीक किया जा सकता है

Alzheimer: आपने देखा होगा कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त पर असर पड़ने लगता है। अक्सर हम चीजों और बातों को भूलने लगते हैं। कई बार लोगो को अल्जाइमर की बीमारी हो जाती है। अल्जाइमर एक खतरनाक बीमारी है। इसमें व्यक्ति यह भी भूल जाता है कि उसका नाम क्या है और वह रहता कहां है। महिलाओं में भी अल्जाइमर की बीमारी होती है लेकिन एक स्टडी के अनुसार, महिलाओं में होने वाले अल्जाइमर और याददाश्त कम हाेने जैसी बीमारी को ऐसी योग क्रिया के माध्‍यम से ठीक किया जा सकता है, जिसमें सांसों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

दरअसल, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय लॉस एंजिल्स (यूसीएलए) के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पता लगाया कि जैसे मस्तिष्क के क्षेत्रों और उप-क्षेत्रों में गतिविधि को एमआरआई से मापा जाता है, उसी तरह ‘कुंडलिनी योग’ तनाव से प्रभावित मस्तिष्क के हिस्से में गतिविधि को बढ़ाता है। इससे व्यक्ति की याददाश्त तेज होती है।

स्टडी में हुआ योग के प्रभावो का अध्ययन:

जर्नल ऑफ अल्जाइमर डिजीज के ऑनलाइन प्रकाशन में एक स्टडी को प्रकाशित किया गया। इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने हिप्पोकैम्पस के उपक्षेत्रों में कनेक्टिविटी पर मेमोरी इन्क्रीज ट्रेनिंग (एमईटी) के दृष्टिकोण की तुलना में योग के असर की स्टडी की गई। मस्तिष्क के ये हिस्से सीखने और मेमोरी के लिए एक महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

स्टडी के अनुसार मेमोरी को तेज करने के लिए एमईटी तकनीक मौखिक और दृश्याें का सहारा लेते हैं। यूसीएलए में लेट-लाइफ, मूड स्ट्रेस एंड वेलनेस रिसर्च प्रोग्राम के निदेशक, मनोचिकित्सक डॉ. हेलेन लावरेत्स्की का इस बारे में कहना है कि ‘कुंडलिनी योग’ ट्रेनिंग स्ट्रेस से संबंधित हिप्पोकैम्पस कनेक्टिविटी को बेहतर ढंग से लक्षित करता है। वहीं एमईटी हिप्पोकैम्पस के उन हिस्सों को प्रभावित कर सकता है जो अच्छी मेमोरी को बढ़ाते हैं।

स्टडी में शामिल किया गया 22 लोगों को:

शोधकर्ताओ ने स्टडी के लिए 22 लोगों का टीम में शामिल किया, जिन पर यह अध्ययन किया गया। इन सभी लोगों ने याददाश्त कमजोर होने की शिकायत की थी। स्टडी के दौरान इन लोगों पर इनके अल्जाइमर होने खतरे और उस पर यो के प्रभावों के असर का परीक्षण किया गया। इस स्टडी में भाग लेने वाले 11 योग प्रतिभागियों की आयु लगभग 61 साल थी।

वहीं एमईटी ग्रुप में यह उम्र सीमा लगभग 65 साल रखी गई थी। इन सभी लोगों ने पिछले कुछ वर्षों में खुद की याददाश्त में गिरावट होने की रिपोर्ट की थी। इसके अलावा इन लोगों को हार्ट संबंधि समस्याएं भी थीं। बता दें कि हार्ट संबंधि समस्याएं अल्जाइमर रोग के खतरे को और भी बढ़ा देती हैं।

12 सप्ताह तक चला परीक्षण:

रिपोर्ट के अनुसार, 12 सप्ताह तक योग और एमईटी दोनों ग्रुपों में यह सेशन 12 सप्ताह तक चला। इस सेशन में हर सप्ताह 60 मिनट का व्यक्तिगत प्रशिक्षण सेशन होता था। इस स्टडी के दौरान ‘कुंडलिनी योग’ ट्रेनिंग को ध्यान रूप क्रिया में सपोर्ट किया गया था। इसके बाद जो परिणाम सामने आए उनके आधार पर लेखकों का कहना है कि योग ट्रेनिंग तनाव से प्रभावित हिप्पोकैम्पस उपक्षेत्र कनेक्टिविटी को बेहतर ढंग से प्रभावित करता है जो मेमोरी बढ़ाने में सहायता कर सकता है।

महिलाओं के लिए ज्यादा लाभदायक:

डॉ. हेलेन लावरेत्स्की का कहना है कि खास बात यह है कि यह स्टउी मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग के लाभों का सपोर्अ करने वाले साहित्य में शामिल है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह खासतौर पर महिलाओं के लिए ज्यादा लाभदायक हो सकता है जिन्हें ज्यादा स्ट्रेस होने की और मेमोरी कम होने की शिकायत है।

इसके अलावा योग की क्रियाएं वृद्ध और व्यस्कों के लिए भी उतनी ही अच्छी हैं। स्टडी के अनुसार, योग की इन क्रियाओं से उन महिलाओं को ज्यादा लाभ हो सकता है जो अक्‍सर स्ट्रेस का अनुभव करती हैं। हालांकि लेखकों के अनुसार, अभी इस पर और अधिक विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता होगी।

RELATED ARTICLES
New Delhi
broken clouds
31.1 ° C
31.1 °
31.1 °
30 %
4.1kmh
75 %
Thu
32 °
Fri
35 °
Sat
36 °
Sun
38 °
Mon
35 °

Most Popular