15.1 C
New Delhi
Monday, January 26, 2026
Homeछत्तीसगढ़माओवादी फंडिंग का भंडाफोड़, NIA ने रघु मिडियामी सहित तीन के खिलाफ...

माओवादी फंडिंग का भंडाफोड़, NIA ने रघु मिडियामी सहित तीन के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

Terror Funding Case: एनआईए ने छत्तीसगढ़ में नक्सली फंडिंग से जुड़े एक मामले में तीन माओवादी सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

Terror Funding Case: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने छत्तीसगढ़ में नक्सल फंडिंग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में तीन माओवादी सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। ये तीनों आरोपी गजेंद्र माड़वी, लक्ष्मण कुंजम और रघु मिडियामी प्रतिबंधित संगठन मूलवासी बचाओ मंच (एमबीएम) के सक्रिय सदस्य हैं। एमबीएम को छत्तीसगढ़ सरकार ने अक्टूबर 2024 में छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम 2005 की धारा 3(1) के तहत प्रतिबंधित किया था। एनआईए ने इन आरोपियों पर माओवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) के लिए अवैध रूप से धन जुटाने, संग्रह करने और वितरित करने का आरोप लगाया है। यह चार्जशीट आरसी-02/2023/एनआईए/रायपुर के तहत जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत में दाखिल की गई है।

Terror Funding Case: मामले की शुरुआत और गिरफ्तारी

यह मामला मार्च 2023 में बीजापुर पुलिस की कार्रवाई से शुरू हुआ, जब गजेंद्र माड़वी और लक्ष्मण कुंजम को 6 लाख रुपये नकद के साथ गिरफ्तार किया गया। ये दोनों ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर यह राशि विभिन्न बैंक खातों में जमा करने जा रहे थे। यह धन माओवादी गतिविधियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए इकट्ठा किया गया था। फरवरी 2024 में, एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली और गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान रघु मिडियामी को तीसरे प्रमुख आरोपी के रूप में पहचाना गया, जो एमबीएम के बस्तर डिविजन का अध्यक्ष था और फंडिंग नेटवर्क का मुख्य संचालक था।

Terror Funding Case: रघु मिडियामी की भूमिका

एनआईए की जांच में पता चला कि रघु मिडियामी न केवल धन इकट्ठा करने में शामिल था, बल्कि वह इसका भंडारण और वितरण भी करता था। वह स्थानीय स्तर पर फंड के वितरण में नोडल व्यक्ति की भूमिका निभा रहा था। मिडियामी ने एमबीएम के माध्यम से माओवादी संगठन को धन और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की, जो आदिवासी हितों की आड़ में माओवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता था। इन फंडों का उपयोग सुरक्षा कैंपों की स्थापना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और राज्य सरकार की विकास योजनाओं को बाधित करने में किया जाता था।

Terror Funding Case: मूलवासी बचाओ मंच का फ्रंटल रोल

मूलवासी बचाओ मंच को एनआईए ने सीपीआई (माओवादी) का एक फ्रंटल संगठन करार दिया है, जो आदिवासी हितों की रक्षा के नाम पर माओवादी गतिविधियों को वित्तीय और लॉजिस्टिक समर्थन प्रदान करता था। जांच में सामने आया कि एमबीएम के जरिए एक जटिल वित्तीय नेटवर्क संचालित हो रहा था, जिसका उद्देश्य माओवादी संगठन की गतिविधियों को मजबूत करना था। यह संगठन न केवल धन एकत्र करता था, बल्कि इसे माओवादी कैडर और समर्थकों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

एनआईए की चल रही जांच

एनआईए ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी इस फंडिंग नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों और संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है। माओवादी संगठनों की वित्तीय रीढ़ को तोड़ने के लिए एनआईए लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां कर रही है। हाल ही में, कांकेर जिले में भाजपा नेता बिरजू राम तराम की हत्या के मामले में भी एनआईए ने कार्रवाई की है, जो माओवादी गतिविधियों से जुड़ा था। यह मामला माओवादी संगठनों की वित्तीय गतिविधियों को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

व्यापक प्रभाव और भविष्य

यह चार्जशीट माओवादी संगठनों की वित्तीय जड़ों को उखाड़ने में एनआईए की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि माओवादी संगठनों की ताकत उनके वित्तीय नेटवर्क पर निर्भर करती है, और इस तरह की कार्रवाइयां उनकी परिचालन क्षमता को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों में माओवादी गतिविधियां अभी भी एक चुनौती बनी हुई हैं, और एनआईए की यह कार्रवाई इन गतिविधियों को रोकने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।

यह भी पढ़ें-

बिहार चुनाव 2025: BJP-JDU में बराबरी की सीटों का समझौता, चिराग को मिला ये ऑफर

RELATED ARTICLES
New Delhi
haze
15.1 ° C
15.1 °
15.1 °
55 %
0kmh
0 %
Mon
21 °
Tue
22 °
Wed
19 °
Thu
22 °
Fri
22 °

Most Popular