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नक्सल मुक्त बस्तर का संकल्प साकार! सुकमा में 8 लाख इनामी 4 माओवादियों ने थमाए हथियार

Naxalites Surrender: सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके से जुड़े चार सक्रिय माओवादी कैडरों ने सुरक्षा बलों के सामने हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर दिया। इन चारों पर कुल 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

Naxalites Surrender: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके से जुड़े चार सक्रिय माओवादी कैडरों ने शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को सुरक्षा बलों के सामने हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर दिया। इन चारों पर कुल 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिसमें एक प्रमुख कैडर पर 5 लाख और बाकी तीन पर 1-1 लाख रुपये का इनाम था।

Naxalites Surrender: आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों की पहचान और हथियार

सोढ़ी जोगा (एरिया कमेटी सदस्य और गोलापल्ली LOS कमांडर) – 5 लाख रुपये का इनाम।
डाबर गंगा (उर्फ मदकम गंगा) – 1 लाख रुपये का इनाम।
सोढ़ी राजे – 1 लाख रुपये का इनाम।
मादवी बुधरी (माड़वी बुधरी) – 1 लाख रुपये का इनाम।

Naxalites Surrender: दो महिला कैडर भी शामिल

इनमें दो महिला कैडर शामिल हैं। ये सभी किस्टाराम एरिया कमेटी के सदस्य थे और दक्षिण बस्तर डिवीजन के गोलापल्ली लोकल ऑपरेशंस स्क्वाड से जुड़े हुए थे। उन्होंने एक INSAS राइफल, एक SLR, एक .303 राइफल, एक .315 राइफल और गोला-बारूद के साथ सरेंडर किया।

यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ सरकार की ‘पूना मार्गेम’ (पुनर्वास से सामाजिक एकीकरण) पहल के तहत हुआ। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि सरेंडर सुकमा जिला मुख्यालय पर हुआ, जहां सुकमा एसपी किरण चव्हाण और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सुकमा पुलिस और आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले की पुलिस ने संयुक्त भूमिका निभाई।

Naxalites Surrender: मुख्यमंत्री का संकल्प और बढ़ता विश्वास

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटना को बस्तर में बढ़ते विश्वास, सुरक्षा और विकास का प्रमाण बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, नक्सल मुक्त बस्तर और सुरक्षित छत्तीसगढ़ हमारा संकल्प है। सीएम साय ने कहा कि सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयास, मजबूत कैंप व्यवस्था, बेहतर कनेक्टिविटी और पुनर्वास नीति से माओवादी प्रभाव क्षेत्र सिमट रहा है और उनका आधार कमजोर हो रहा है।

Naxalites Surrender: बस्तर में सरेंडर की लहर जारी

2026 की शुरुआत में बस्तर में सरेंडर की लहर जारी है। जनवरी में ही सैकड़ों नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जिसमें सुकमा में पहले 26 और 29 जैसे बड़े बैच शामिल हैं। अधिकारी मानते हैं कि ये घटनाएं नक्सली ताकत के तेजी से कमजोर होने का संकेत हैं। केंद्र और राज्य सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह माओवादी मुक्त बनाना है।

Naxalites Surrender: पुनर्वास और कौशल विकास की मजबूत पहल

सुरक्षा के साथ पुनर्वास पर भी जोर है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने आत्मसमर्पण करने वालों के लिए सक्रिय कार्यक्रम चलाया है। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशन में भारतीय स्टेट बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (R-SETI) के सहयोग से 35 युवाओं (आत्मसमर्पण करने वाले) के लिए राजमिस्त्री (मेसनरी) का प्रशिक्षण शुरू किया गया है।

यह प्रशिक्षण प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसी योजनाओं की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर है, जहां कुशल निर्माण श्रमिकों की जरूरत है। प्रशिक्षण पूरा होने पर ये युवा आत्मनिर्भर बनेंगे और समाज में उत्पादक योगदान दे सकेंगे।

यह आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों की रणनीति, विकास कार्यों और मानवीय पुनर्वास नीति का संयुक्त परिणाम है। बस्तर में पूर्व नक्सली अब कौशल सीख रहे हैं, रोजगार अपना रहे हैं और नई जिंदगी जी रहे हैं। राज्य सरकार का मानना है कि सुरक्षा, विकास और पुनर्वास के त्रिवेणी प्रयासों से नक्सलवाद का अंत निकट है।

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