IED Diffuse: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने एक बार फिर माओवादियों की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। रविवार को गंगालूर क्षेत्र में CRPF की 199वीं बटालियन की टीम ने निर्माणाधीन सड़क के पास दो प्रेशर आईईडी बरामद कर उन्हें सुरक्षित निष्क्रिय किया। यह कार्रवाई क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों और सुरक्षा बलों की गश्त को निशाना बनाने की माओवादी योजना को बड़ा झटका है।
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IED Diffuse: गंगालूर अभियान में मिली सफलता
जानकारी के अनुसार, फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) कोप्पागुड़ा से CRPF 199वीं बटालियन की टीम एरिया डॉमिनेशन और डिमाइनिंग ड्यूटी पर निकली थी। पीड़िया कैम्प से करीब 2 किलोमीटर दूर निर्माणाधीन सड़क से 50 मीटर की दूरी पर माओवादियों द्वारा प्लांट किए गए दो IED मिले। एक IED टिफिन बॉक्स में और दूसरा बीयर की बोतल में छिपाया गया था। दोनों प्रेशर एक्टिवेटेड थे, यानी दबाव पड़ते ही विस्फोट हो जाता।
सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बम डिस्पोजल टीम (BDD) ने दोनों IED को मौके पर ही नष्ट कर दिया। बीजापुर पुलिस ने इसे माओवादियों की “बड़ी साजिश” करार दिया, जो सुरक्षा बलों या सड़क निर्माण में लगे वाहनों को निशाना बनाने के लिए लगाए गए थे।
IED Diffuse: क्रिसमस पर भी मिली थी बड़ी कामयाबी
इससे पहले 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन CRPF की 214वीं बटालियन ने कंदलपर्ती-2 FOB से शुरू अभियान में घने जंगलों में दो हाई-पावर IED बरामद किए थे। एक का वजन 20 किलोग्राम और दूसरे का 5 किलोग्राम था। ये IED भी गश्ती दल या स्थानीय नागरिकों को टारगेट करने के लिए छिपाए गए थे। BDD टीम ने इन्हें सुरक्षित निष्क्रिय किया, जिससे एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।
ये दोनों घटनाएं बस्तर क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की मुस्तैदी को दिखाती हैं। माओवादी अक्सर सड़क निर्माण और विकास परियोजनाओं को बाधित करने के लिए IED का सहारा लेते हैं।
IED Diffuse: बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान तेज
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन अभियान तेजी से चल रहा है। नए कैंप स्थापित किए जा रहे हैं और सर्च ऑपरेशन बढ़ाए गए हैं। इस साल कई मुठभेड़ों में दर्जनों माओवादी मारे गए हैं, जबकि कई ने आत्मसमर्पण किया है। बीजापुर पुलिस और CRPF क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास कार्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयां माओवादियों के मनोबल को तोड़ रही हैं और क्षेत्र को नक्सल-मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
स्थानीय लोग भी सुरक्षा बलों के इन प्रयासों की सराहना कर रहे हैं, क्योंकि IED की वजह से आम जनजीवन प्रभावित होता था। अब सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। सुरक्षा बलों की सतर्कता से एक बार फिर साबित हुआ कि माओवादी साजिशें कितनी भी चालाकी भरी हों, जवानों की मुस्तैदी के आगे विफल हो जाती हैं। अभियान जारी है और आगे भी ऐसी सफलताएं मिलने की उम्मीद है।
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