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Tuesday, September 22, 2026
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CG High Court: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश – निगम कर्मचारियों के नियमितीकरण पर 3 महीने में फैसला लेने के निर्देश

CG High Court: नगर निगम बिलासपुर में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों की ओर से प्रस्तुत अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार कर तीन महीने के भीतर तार्किक निर्णय लिया जाए। हाई कोर्ट का यह आदेश जागेश्वर दुबे और अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान आया। हालांकि कोर्ट ने सीधे नियमितीकरण का आदेश देने के बजाय संबंधित सक्षम प्राधिकारी को कर्मचारियों के लंबित अभ्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

कमिश्नर के समक्ष पहले ही दिया जा चुका था अभ्यावेदन
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नियमितीकरण की मांग को लेकर नगर निगम बिलासपुर के कमिश्नर के समक्ष पहले ही अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जा चुका है। इसके बावजूद लंबे समय से उस अभ्यावेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी मूल मांग को सीमित करते हुए हाई कोर्ट से आग्रह किया कि सक्षम प्राधिकारी को उनके लंबित अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार कर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ताओं की इस मांग पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को अभ्यावेदन पर विचार कर तीन महीने के भीतर नियमानुसार और तर्कसंगत निर्णय लेने के निर्देश दिए।

चार निगम कर्मचारियों ने लगाई थी याचिका
मामले में नगर निगम बिलासपुर के अंतर्गत कार्यरत चार कर्मचारियों ने हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिकाकर्ताओं में माली जागेश्वर दुबे, इलेक्ट्रीशियन चंद्र कुमार नागदौने, टाइम कीपर मिर्जा वाहिद बेग और माली पेट्रिक पास्टी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनकी सेवाओं का नियमितीकरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने नियमितीकरण नहीं किए जाने को मनमाना बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के उल्लंघन का आधार बनाया था।

5 मार्च 2008 के परिपत्र का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2008 के परिपत्र का भी हवाला दिया गया। उनका कहना था कि उक्त परिपत्र के आधार पर उन्हें भी समान स्थिति वाले और उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों की तरह नियमितीकरण का लाभ दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने इसी आधार पर अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग की थी। हालांकि सुनवाई के दौरान उन्होंने हाई कोर्ट से फिलहाल नियमितीकरण पर सीधे आदेश देने के बजाय सक्षम प्राधिकारी को उनके अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

तीन महीने में लेना होगा निर्णय
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब नगर निगम के सक्षम प्राधिकारी को कर्मचारियों के लंबित अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार करना होगा। प्राधिकारी को कर्मचारियों के अभ्यावेदन, लागू नियमों और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के भीतर तार्किक निर्णय लेना होगा। इस आदेश से नियमितीकरण की मांग कर रहे नगर निगम कर्मचारियों को अब अपने अभ्यावेदन पर समयबद्ध निर्णय की उम्मीद जगी है। हालांकि नियमितीकरण का अंतिम लाभ मिलेगा या नहीं, यह सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगा।

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