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Wednesday, September 23, 2026
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Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 75 प्रधान पाठकों की याचिका खारिज; नहीं मिलेगी दो अग्रिम वेतनवृद्धि

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की बिलासपुर पीठ ने 75 प्रधान पाठकों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने अपने खर्च पर बीएड, डीएलएड जैसी शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के आधार पर दो अग्रिम वेतनवृद्धि देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। यह मामला सारंगढ़, रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में कार्यरत प्रधान पाठकों से जुड़ा था।

जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इसी मुद्दे पर हाई कोर्ट पहले ही फैसला दे चुका है। उस फैसले को हाई कोर्ट की खंडपीठ ने भी बरकरार रखा और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। ऐसे में पहले से निर्धारित कानूनी स्थिति के विपरीत नया दावा स्वीकार करने का कोई आधार नहीं है।

16 जून 1993 के बाद बदले भर्ती नियम

मामले की जड़ 16 जून 1993 को शिक्षक भर्ती नियमों में हुए बदलाव से जुड़ी है। इस संशोधन के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए बीएड, डीएलएड, बीटीआई जैसी शैक्षणिक योग्यताओं को अनिवार्य कर दिया गया था। इससे पहले इन योग्यताओं का होना नियुक्ति के लिए अनिवार्य शर्त नहीं थी। इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए शासन ने पुराने पात्र शिक्षकों के लिए दो अग्रिम वेतनवृद्धि देने की नीति बनाई थी। इसका उद्देश्य उन शिक्षकों को लाभ देना था, जिन्होंने आवश्यक शैक्षणिक योग्यता अपने खर्च पर हासिल की थी।

22 नवंबर 2019 के आदेश को दी थी चुनौती

75 प्रधान पाठकों ने 22 नवंबर 2019 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें दो अग्रिम वेतनवृद्धि का पात्र नहीं माना गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उन्होंने अपने खर्च पर बीएड और डीएलएड जैसी योग्यता हासिल की है। इसलिए उन्हें इसके बदले दो अग्रिम वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से इसी आधार पर राहत की मांग की गई थी। हालांकि, राज्य सरकार ने पूर्व में इस विषय पर दिए गए न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए उनके दावे का विरोध किया।

‘नीलम दुबे’ मामले का दिया गया हवाला

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि इसी मुद्दे पर पहले ही ‘नीलम दुबे बनाम छत्तीसगढ़ शासन’ मामले में निर्णय हो चुका है। इस मामले में हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 25 अप्रैल 2024 को याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद फैसले के खिलाफ दायर रिट अपील पर भी याचिकाकर्ता को राहत नहीं मिली।

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 9 अगस्त 2024 को रिट अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका यानी SLP पर भी 2 जुलाई 2025 को हस्तक्षेप से इनकार कर दिया गया था।

हाई कोर्ट ने पुराने फैसलों को माना आधार

वर्तमान मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इन सभी पूर्व निर्णयों का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि जब इसी कानूनी प्रश्न पर पहले ही न्यायिक निर्णय हो चुका है और उसे उच्च स्तर पर भी चुनौती के बाद बरकरार रखा जा चुका है, तो उसी मुद्दे पर अलग निष्कर्ष निकालने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने भर्ती नियमों में 16 जून 1993 को हुए संशोधन को भी महत्वपूर्ण माना। संशोधन के बाद बीएड, डीएलएड और बीटीआई जैसी योग्यताएं शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए जरूरी हो गई थीं।

नियुक्ति की अनिवार्य योग्यता पर नहीं मिलेगा अतिरिक्त लाभ

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 16 जून 1993 के बाद शिक्षक पद पर नियुक्त होने वाले अभ्यर्थियों के लिए संबंधित शैक्षणिक योग्यताएं नियुक्ति की अनिवार्य शर्त बन चुकी थीं। ऐसे में नियुक्ति के बाद उन्हीं अनिवार्य योग्यताओं को अपने खर्च पर हासिल करने के आधार पर दो अग्रिम वेतनवृद्धि का दावा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसी आधार पर 75 प्रधान पाठकों की याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

75 प्रधान पाठकों की याचिका खारिज

सभी तथ्यों और पूर्व न्यायिक निर्णयों को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर हाई कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को 75 प्रधान पाठकों की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही अपने खर्च पर बीएड, डीएलएड जैसी अनिवार्य योग्यता हासिल करने के आधार पर दो अग्रिम वेतनवृद्धि की मांग को राहत नहीं मिली।

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