39.9 C
New Delhi
Sunday, July 12, 2026
Homeछत्तीसगढ़मोहर्रम जुलूस में डीजे और आतिशबाजी पर वक्फ बोर्ड का प्रतिबंध नहीं,...

मोहर्रम जुलूस में डीजे और आतिशबाजी पर वक्फ बोर्ड का प्रतिबंध नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मोहर्रम के अवसर पर निकलने वाले पारंपरिक सामाजिक जुलूसों में डीजे , ब्रास बैंड, धुमाल और आतिशबाजी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले एक हालिया नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी है। ‘सूफी इस्लामिक बोर्ड द्वारा दायर रिट याचिका पर त्वरित सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा जारी किए गए विवादित आदेश के क्रियान्वयन को आगामी सुनवाई तक स्थगित कर दिया है। अदालत ने माना कि चूंकि मोहर्रम पर्व के धार्मिक अनुष्ठान पहले से ही जारी हैं और मुख्य जुलूस 26 जून को है, इसलिए इस ऐन वक्त पर ऐसा प्रतिबंध लागू करने से समाज में अवांछित अशांति फैल सकती है और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

मामला छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा आगामी मोहर्रम पर्व को लेकर जारी किए गए एक प्रतिबंधात्मक दिशा-निर्देश से शुरू हुआ। वक्फ बोर्ड ने बीती 11 जून 2026 को एक कड़ा आदेश जारी कर राज्य की सभी मोहर्रम कमेटियों और ताजिया आयोजकों को निर्देशित किया था कि वे मजहबी जुलूसों के दौरान डीजे, धुमाल, ब्रास बैंड और पटाखों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। आदेश में यह भी कहा गया था कि यदि किसी भी कमेटी ने इस नियम का उल्लंघन किया, तो उस पर 50,000 रुपये का दंडात्मक जुर्माना लगाया जाएगा। वक्फ बोर्ड के इसी आदेश को सूफी इस्लामिक बोर्ड ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

सूफी इस्लामिक बोर्ड के वकील देवेंद्र प्रताप सिंह ने कोर्ट के समक्ष पुरजोर दलील दी कि वक्फ बोर्ड द्वारा जारी किया गया यह नोटिस पूरी तरह से अवैध, मनमाना और उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। वकील ने तर्क दिया कि कानूनन छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के पास इस तरह के दंडात्मक आदेश पारित करने या किसी धार्मिक आयोजन की पद्धतियों पर प्रतिबंध लगाने की वैधानिक शक्तियां नहीं हैं। ध्वनि प्रदूषण या कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करना जिला प्रशासन और पुलिस का काम है, न कि वक्फ बोर्ड का।उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि मोहर्रम से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं और आगामी 26 जून 2026 को मुख्य पर्व है। इस नाजुक मोड़ पर ऐसा आदेश थोपने से अवाम में भारी आक्रोश पैदा होगा।

जस्टिस अमितेन्द्र किशोर प्रसाद ने मामले की तात्कालिकता और दोनों पक्षों के तर्कों का गहराई से अवलोकन किया। कोर्ट ने माना कि चूंकि मोहर्रम का मुख्य पर्व बेहद करीब है और मुस्लिम समाज की तैयारियां और कार्यक्रम गतिमान हैं, इसलिए इस मोड़ पर वक्फ बोर्ड के विवादित आदेश को जबरन लागू कराना समझदारी नहीं होगी। अदालत ने अंदेशा जताया कि इस आदेश को जबरन लागू करने से त्योहार मनाने वाले लोगों के बीच गहरा असंतोष और कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता सोसाइटी को राहत देते हुए शुद्ध रूप से एक अंतरिम उपाय के तहत, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा जारी किए गए विवादित नोटिस के प्रभाव और संचालन पर आगामी सुनवाई तक पूर्णत: रोक लगाई जाती है। आदेश के तहत वर्तमान मोहर्रम जुलूसों के दौरान कमेटियों पर वक्फ बोर्ड का यह प्रतिबंध और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का नियम प्रभावी नहीं रहेगा। अदालत ने राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड के वकीलों को इस याचिका पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय प्रदान किया है। केस की अगली सुनवाई अगले महीने होगी।

RELATED ARTICLES
New Delhi
clear sky
39.9 ° C
39.9 °
39.9 °
29 %
3.1kmh
8 %
Sun
42 °
Mon
42 °
Tue
41 °
Wed
42 °
Thu
42 °

Most Popular