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लालू परिवार पर कोर्ट का शिकंजा: IRCTC घोटाले में मुकदमा चलेगा, बिहार चुनाव में भूचाल!

IRCTC Scam Case: दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी घोटाले के मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव समेत सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।

IRCTC Scam Case: बिहार विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजते ही राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी घोटाले के मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव समेत सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इसका मतलब साफ है कि अब इस मामले में लालू परिवार के खिलाफ मुकदमा चलेगा। यह फैसला बिहार चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक हलचल मचा सकता है, जहां आरजेडी और महागठबंधन की रणनीति पर इसका असर पड़ने की आशंका है।

IRCTC Scam Case: रेल मंत्री काल का काला अध्याय

यह मामला यूपीए सरकार के दौर से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री के पद पर थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के मुताबिक, 2004 से 2014 के बीच आईआरसीटीसी के दो होटलों—बीएनआर रांची और बीएनआर पुरी—के रखरखाव के ठेकों को अवैध तरीके से आवंटित किया गया। आरोप है कि एक सुनियोजित साजिश के तहत इन होटलों को पहले आईआरसीटीसी को ट्रांसफर किया गया और फिर बिहार की सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को पट्टे पर दे दिया गया। निविदा प्रक्रिया में धांधली की गई और शर्तों में बदलाव कर सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया गया।

IRCTC Scam Case: लैंड-फॉर-जॉब्स स्कैम

सीबीआई की चार्जशीट में दावा किया गया है कि यह ‘क्विड प्रो क्वो’ (आपसी सौदा) का मामला था। ठेकों के बदले लालू परिवार को जमीनें सस्ते दाम पर आवंटित की गईं। इसमें आईआरसीटीसी के तत्कालीन महाप्रबंधक वीके अस्थाना, आरके गोयल, सुजाता होटल्स के डायरेक्टर, चाणक्य होटल के मालिक विजय कोचर और विनय कोचर जैसे नाम शामिल हैं। लालू के रेल मंत्री काल में यह भ्रष्टाचार का एक काला अध्याय माना जाता है, जो लैंड-फॉर-जॉब्स स्कैम से भी जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर लालू परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया, जिससे राष्ट्रीय खजाने को नुकसान हुआ।

IRCTC Scam Case: कोर्ट में पेशी, लालू व्हीलचेयर पर

सोमवार को राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव व्हीलचेयर पर पहुंचे। उनकी स्वास्थ्य स्थिति कमजोर होने के बावजूद वे पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और प्रेमचंद गुप्ता के साथ हाजिर हुए। परिवार दिल्ली में बेटी मीसा भारती के पंडारा पार्क स्थित आवास पर ठहरा था और रविवार को ही पेशी के लिए आ गया था। कोर्ट ने सभी आरोपियों से पूछा कि क्या वे अपराध मानते हैं। लालू परिवार ने स्पष्ट इनकार कर दिया। राबड़ी देवी ने अदालत में कहा, “ये गलत केस है।” तेजस्वी यादव ने भी मुकदमे का सामना करने की बात कही।

जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि लालू यादव की जानकारी में साजिश रची गई, जिससे परिवार को फायदा पहुंचा। कोर्ट ने ‘क्विड प्रो क्वो’ का आरोप स्पष्ट माना और मामले को ट्रायल के चरण में धकेल दिया। इस दौरान कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ, लेकिन मुकदमा चलने से लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

IRCTC Scam Case: भ्रष्टाचार पर सीधी चोट

कोर्ट ने लालू परिवार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय किए। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की धारा 13(2) और 13(1)(d) भी लालू यादव पर लगाई गईं, क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग किया। तेजस्वी और राबड़ी पर मुख्य रूप से आईपीसी की धाराएं लागू हैं। ये धाराएं गंभीर हैं और दोष सिद्ध होने पर लंबी सजा हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला लालू के राजनीतिक करियर को प्रभावित करेगा।

बिहार में महागठबंधन पर सवाल

यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के ठीक पहले आया है, जब आरजेडी अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है। तेजस्वी यादव, जो बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, इस मामले में सीधे नामजद हैं। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है, जबकि सत्ताधारी एनडीए इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही है। आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि यह बीजेपी का षड्यंत्र है, लेकिन कोर्ट का फैसला परिवार की छवि पर असर डालेगा। लालू परिवार ने मुकदमे का डटकर मुकाबला करने का ऐलान किया है।

ट्रायल और राजनीतिक प्रभाव

अब मामला ट्रायल कोर्ट में जाएगा, जहां गवाहों की जांच और सबूत पेश होंगे। सीबीआई कोर्ट के निर्देश पर और सबूत जुटाने को कहा गया है। यह घोटाला लालू के अन्य मामलों से जुड़ सकता है, जो उनकी राजनीतिक यात्रा को लंबे समय तक प्रभावित करेगा। बिहार चुनाव में यह मुद्दा गरमाया तो महागठबंधन की एकजुटता पर परीक्षा होगी। कुल मिलाकर, यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का प्रतीक है, जो सत्ता के गलियारों में साफ-सफाई की मांग करता है।

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