BSSC chairman: बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) के नवनिुक्त अध्यक्ष और पूर्व डीजीपी आलोक राज के अचानक इस्तीफे ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। आलोक राज ने 1 जनवरी 2026 को पदभार संभाला था और मात्र पांच दिनों बाद 6 जनवरी को निजी कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया। इस घटना ने विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का मौका दे दिया है, जबकि सत्ता पक्ष इसे व्यक्तिगत फैसला बता रहा है।
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BSSC chairman: नियुक्ति से इस्तीफे तक का घटनाक्रम
आलोक राज, 1989 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक, को 31 दिसंबर 2025 को बीएसएससी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति उनके रिटायरमेंट के ठीक उसी दिन हुई थी। सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के अनुसार, उनका कार्यकाल पांच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो) निर्धारित था। सरकार का मानना था कि उनके अनुभव से भर्ती प्रक्रियाएं निष्पक्ष और पारदर्शी होंगी।
हालांकि, 6 जनवरी को आलोक राज ने सामान्य प्रशासन विभाग को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि यह पूरी तरह निजी कारणों से लिया गया फैसला है। सूत्रों के अनुसार, इस्तीफे में किसी प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव का जिक्र नहीं है।
BSSC chairman: विपक्ष का तीखा हमला
विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस इस्तीफे को हल्के में नहीं लिया है। राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा, “पदभार संभालने के मात्र पांच-छह दिनों में इस्तीफा देना कई सवाल खड़े करता है। अगर कारण व्यक्तिगत थे, तो पदभार क्यों ग्रहण किया गया? यह एनडीए सरकार के शासन में भर्ती प्रक्रियाओं की बदनामी को दर्शाता है।”
गगन ने आगे आरोप लगाया कि बिहार में अधिकांश परीक्षाएं विवादों में घिरी रही हैं – कहीं पेपर लीक हुए, कहीं सेंटर प्रबंधन में अनियमितता के आरोप लगे। उन्होंने कहा कि ब्लैक लिस्टेड या संसाधनहीन एजेंसियों से परीक्षाएं कराई गईं, जिससे युवाओं का भविष्य खतरे में है। राजद ने सरकार से इस्तीफे के कारणों पर स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की है।
BSSC chairman: छात्र नेता का गंभीर आरोप
छात्र नेता दिलीप कुमार ने भी इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आलोक राज का इस्तीफा भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से समझौता न करने की वजह से हुआ है। उनके अनुसार, पूर्व अध्यक्ष पर गलत और अनैतिक निर्णय लेने का दबाव डाला जा रहा था, जिससे अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए उन्होंने पद छोड़ दिया।
दिलीप कुमार ने दावा किया कि अफवाहें हैं कि एक शक्तिशाली राजनीतिक नेता बीएसएससी से सेकंड इंटर-लेवल और सीजीएल-4 जैसी परीक्षाओं को ब्लैक लिस्टेड निजी एजेंसी से ऑनलाइन मोड में कराने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने 24,000 से अधिक पदों वाली भर्ती प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका जताई और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हस्तक्षेप की अपील की।
BSSC chairman: सरकार की चुप्पी और संभावित प्रभाव
सरकार की ओर से अभी तक इस्तीफे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बीएसएससी के सामने कई महत्वपूर्ण भर्तियां लंबित हैं, जिनमें हजारों पद शामिल हैं। आलोक राज जैसे अनुभवी अधिकारी का इतनी जल्दी पद छोड़ना आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। हाल के वर्षों में बीएसएससी की परीक्षाएं पेपर लीक और अन्य विवादों से घिरी रही हैं, जिससे युवा निराश हैं।
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