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बिहार में वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे 51 लाख मतदाताओं के नाम, चुनाव आयोग की ओर से बड़ा अपडेट

Bihar Elections: बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अंतिम चरण में चल रहा है। एसआईआर परीक्षण में 18 लाख मृतक मिले। इसके अलावा 16 लाख वोटर दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में जा चुके हैं और 7 लाख मतदाताओं का दो स्थानों पर नाम है।

Bihar Elections: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 18 लाख मृत मतदाता और 7 लाख ऐसे वोटर सामने आए हैं जिनके नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज हैं। इसके अलावा 16 लाख से अधिक वोटर दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में स्थानांतरित हो चुके हैं। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, एसआईआर का काम अपने अंतिम चरण में है और 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 1 सितंबर तक आम लोग नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने के लिए आपत्ति दर्ज कर सकेंगे।

Bihar Elections: अब तक 90% से अधिक गणना प्रपत्र प्राप्त

बिहार में कुल 7,89,69,844 मतदाताओं में से 7,16,04,102 (90.67%) मतदाताओं के गणना प्रपत्र प्राप्त हो चुके हैं। इनमें डिजिटल गणना प्रपत्रों की संख्या 7,13,65,460 (90.37%) है।

एसआईआर में अब तक मिले आंकड़ों के अनुसार:

  • 52,30,126 (6.62%) मतदाता अपने पते पर अनुपस्थित पाए गए।
  • 18,66,869 (2.36%) मृत वोटर पाए गए।
  • 26,01,031 (3.29%) मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो गए हैं।
  • 7,50,742 (0.95%) मतदाताओं के नाम दो जगह पंजीकृत पाए गए।
  • 11,484 (0.01%) मतदाताओं का पता नहीं चल सका।

फिलहाल 7,68,34,228 (97.30%) मतदाता सूची में सम्मिलित हैं, जबकि अब 21,35,616 (2.70%) मतदाताओं के गणना फॉर्म प्राप्त होने बाकी हैं।

Bihar Elections: 1 लाख बीएलओ और 4 लाख वालंटियर्स जुटे

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने के लिए राज्य के 12 प्रमुख राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों द्वारा नियुक्त लगभग 1 लाख बीएलओ, 4 लाख वालंटियर्स और 1.5 लाख बीएलए समेत पूरी चुनाव मशीनरी काम कर रही है। इनका उद्देश्य उन मतदाताओं को ढूंढना है जिनका पता नहीं चल सका या जिन्होंने अभी तक गणना फॉर्म जमा नहीं किया है।

राजनीतिक दलों से साझा की गई सूची

सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और बीएलओ ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उन 21.36 लाख मतदाताओं की सूची साझा की है, जिनके फॉर्म अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके अलावा, उन 52.30 लाख मतदाताओं की सूची भी साझा की गई है जिनकी मृत्यु हो चुकी है, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं, या जिनके नाम दो जगह दर्ज हैं।

पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने की कोशिश

भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना है ताकि बिहार में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव निष्पक्ष और सटीक मतदाता सूची के आधार पर कराए जा सकें।

1 अगस्त को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सभी पात्र मतदाताओं का नाम शामिल करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। 1 अगस्त से 1 सितंबर, 2025 तक आम जनता किसी भी नाम को जोड़ने, हटाने या सुधारने के लिए चुनाव आयोग के पोर्टल, मोबाइल ऐप या बीएलओ के माध्यम से आपत्ति दर्ज करा सकेगी।

तेजस्वी ने चुनाव आयोग पर बोला हमला

बिहार में एसआईआर (विशेष गहन समीक्षा) प्रक्रिया पर राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि हम अदालत में, सड़कों पर, सदन में लड़ रहे हैं। लेकिन चुनाव आयोग बेशर्म हो गया है। चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के बाद भी, उन्होंने आधार या राशन कार्ड की भूमिका के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर कहा कि अगला उपराष्ट्रपति कौन बनेगा, यह मेरा मुद्दा नहीं है। हमारा मुद्दा यह है कि बिहार का कोई भी मतदाता सूची से न हटे।

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