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Sunday, September 27, 2026
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Divorce: ब्रेकअप, डाइवोर्स के लिए ये ग्रह होते हैं जिम्मेदार, जानिए कौन सा योग बनने पर हो सकता है विवाह विच्छेद

Divorce: क्या आप जानते हैं कि कुंडली में कुछ ग्रहों की स्थिति बदलने से तलाक जैसी स्थिति भी हो सकती है| ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संबंधों को कुंडली में दो ग्रहों की स्थिति प्रभावित करती है।

Divorce: हर रिश्ता विश्वास और प्यार पर निर्भर होता है| रिश्तों में इनका अभाव होने से रिश्ते टूटने लगते हैं। शादी के बाद अक्सर पति-पत्नी का रिश्ता अच्छा नहीं रहता| कई बार इससे ब्रेक-अप और यहाँ तक कि डाइवोर्स भी हो जाता है। जीवन में विवाह होने पर जितने सुख का अनुभव होता है , विवाह-विच्छेद होने पर उससे भी ज्यादा दुःख होता है| इसलिए कोई भी अपनी शादी को तोडना नहीं चाहता है। परन्तु क्या आप जानते हैं कि कुंडली में कुछ ग्रहों की स्थिति बदलने से तलाक जैसी स्थिति भी हो सकती है|

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संबंधों को कुंडली में दो ग्रहों की स्थिति प्रभावित करती है। सूर्य और शुक दोनों ही ग्रह विवाह सम्भंधों से जुड़े हुए हैं | जब उनकी स्थिति खराब हो जाती है, तो कोई भी रिश्ता लंबे समय तक नहीं चल सकता। आइए जानते हैं कि क्यों और कैसे यह आपके ग्रहों से जुड़ा है।

ग्रह योग जो विवाह में विवाद को जन्म देते हैं:

यदि सातवां घर छठे घर में है, तो आठवां घर अलग हो जाएगा। छठे या आठवें भाव में रहने वाले व्यक्ति का सप्तम भाव में रहने वाले व्यक्ति के साथ होना शादी के जीवन पर प्रभाव डालता है। यदि इस पर किसी अशुभ ग्रह की दृष्टि हो और उस पर कोई शुभ ग्रह की दृष्टि नहीं हो तो यह जातक पर काफी असर डालता है।

यदि मंगल जातक की कुंडली में पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में किसी दूषित ग्रह से जुड़ा हो | तथा मंगल लग्न कुंडली में छठे भाव में हो और सप्तम भाव का स्वामी छठे भाव में हो तो यही कारण है कि वैवाहिक जीवन में अचानक अलगाव का योग बन सकता है।

Divorce के लिए जिम्मेदार योग:

शादी में जीवन साथी से अलगाव या तलाक का कारण जातक की कुंडली में छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित ग्रहों की दशा भी हो सकती है। यदि पुरुष की कुंडली शुक्र और स्त्री की कुंडली मंगल का दोष हो तो वैवाहिक जीवन में मुश्किल हो सकती है।

कन्या राशि के जातकों की कुंडली में शनि और मंगल पहले और सातवें भाव में या पंचम और ग्यारहवें भाव में एक-दूसरे को देख रहे हों तो शादी में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। सप्तम या अष्टम भाव पर शनि और मंगल की दृष्टि शादी में कठिनाई लाती है। साथ ही, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल होने पर मंगल दोष हो सकता है, जो शादी में कठिनाई पैदा कर सकता है। यदि कुंडली में दूसरे, छठे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव हो तो जातक को अलगाव या तलाक का का सामना करना पड़ सकता है|

अलगाव का कारण बनने वाले ग्रहों का योग:

जन्म तिथि के अनुसार सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु जैसे ग्रह अलगाव या तलाक योग बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इन ग्रहों के प्रभाव से जातक एक दूसरे से दूर हो जाते हैं और उनके वैवाहिक जीवन में बहुत मुश्किलें आती हैं। राहु के सप्तम भाव में आने से ,क्रोध, दबंगता और तर्कशीलता को बढ़ावा मिलता है। इससे जातक की पहली पत्नी मर सकती है या तलाक हो सकता है और कोई दूसरा विवाह नहीं होगा।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति और शुक्र नैसर्गिक शुभ ग्रह तथा शनि, मंगल, सूर्य, राहु और केतु नैसर्गिक पाप ग्रह माने जाते हैं। शनि और राहु अलगाव और कभी-कभी जीवनसाथी की मृत्यु को दर्शाते हैं। यदि किसी कुंडली में मंगल का प्रभाव है यह संकेत है कि भागीदारों में से एक हिंसक या आक्रामक हो जाता है, जो संबंधों को खराब करता है।

पुरुष जातक का योग सप्तम भाव में अलग-अलग होता है। स्त्री जातक के लिए सर्वप्रथम शुक्र और मंगल को देखना चाहिए । मनस्य जाते चन्द्र के अनुसार लेकिन इन सबके बाद चाँद को देखना भी आवश्यक होता है। पुरुष कुंडली में शुक्र पत्नी का स्वभाव दिखाता है, और स्त्री कुंडली में मंगल पति का स्वभाव दिखाता है।

सार:

चाहे आप अरैंज मैरिज करें या प्रेम विवाह करें, ज्योतिष शास्त्र आपके लिए एक सही जीवनसाथी का चुनने में मदद कर सकता हैं। यह आपके राशिफल को देखकर बताते है कि है कि आपकी शादी कब होगी और आप दोनों के बीच संबंध अनुकूलता क्या होगी। जब आप विवाह संगतता की जांच करने के लिए अपनी कुंडली की समीक्षा करते हैं और किसी भी अनुकूलताकारक को नहीं देखते हैं, तो यह तलाक या अलग होने का सबसे बड़ा कारण बनता है।

इसलिए, अगर आप शादी से पहले अपनी कुंडली की समीक्षा करते हैं तो यह आपको और आपके जीवन साथी के बारे में सही जानकारी दे सकती है, जिससे आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होता हैं और आपको अलगाव या तलाक जैसी स्थिति के बारे कोई चिंता नहीं रहती हैं |


डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सभी जानकारियाँ सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। विभिन्न माध्यमों से एकत्रित करके ये जानकारियाँ आप तक पहुँचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज़ सूचना पहुँचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज़ सूचना समझकर ही लें। किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि का होना संयोग मात्र है। Bynewsindia. com इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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