आमतौर पर लोग खाना पकाने को यानी कुकिंग को एक सामान्य काम मानते हैं. लेकिन एक ताजा स्टडी ने कुकिंग को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं. खाना पकाने से मेंटल हेल्थ बेहतर होता है. रिसर्च के मुताबिक, हफ्ते में कम से कम एक बार घर पर खाना पकाने से बुजुर्गों में डिमेंशिया का खतरा 30% तक कम हो सकता है. रिसर्च के नतीजों से यह भी पता चलता है कि जिन बुजुर्गों को खाना बनाने का ज्यादा अनुभव नहीं है और जिनके पास खाना बनाने की ज्यादा स्किल्स नहीं हैं, उनमें यह खतरा 70% तक कम हो सकता है.
जापानी रिसर्चर्स का कहना है कि पिछले कुछ दशकों में, लोग घर पर खाना बनाने के बजाय रेस्टोरेंट, टेकअवे और फ्रोजन फूड पर ज्यादा निर्भर होने लगे हैं. लेकिन बुजुर्गों के लिए, खाना बनाना न सिर्फ फिजिकल एक्टिविटी करने का जरिया है, बल्कि यह दिमागी कसरत भी है. रिसर्चर्स ने ‘जापान जेरोन्टोलॉजिकल इवैल्यूएशन स्टडी’ से 10,978 ऐसे लोगों को चुना जिनकी उम्र कम से कम 65 साल थी, और जिनकी दिमागी सेहत पर 2022 तक, यानी 6 साल तक नजर रखी गई.
कुकिंग कैसे डिमेंशिया से बचाता है-
1. दिमाग को तेज करने वाला काम-
खाना पकाने के लिए प्लानिंग, एक साथ कई काम करना, स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस को फॉलो करना, समय का ध्यान रखना जरूरी होता है. इससे दिमाग बीमारियों से लड़ने में ज्यादा सक्षम हो जाता है.
2. मल्टीटास्किंग-
कुकिंग दिमाग को तेज बनाने के लिए साथ ही आपको मल्टीटास्किंग करना सिखाता है. कुकिंग करते वक्त आप एक समय में कई काम करते हैं. सब्जियों को काटने से लेकर, उन्हें भूनना, सही समय तक उन्हें भूनना, पकाना, मसालों की मात्रा का ध्यान रखना, ये सभी चीजें आपको मल्टीटास्किंग सिखाती हैं और दिमाग की अच्छी खासी कसरत कराती हैं.
3. बेहतर होता है मूड-
अगर बुजुर्ग लोग खुद खाना बनाते हैं तो वह अपने आप को किसी काम में इंगेज करके रखते हैं, ऐसे में वह खुद को बेकार नहीं समझते. कई लोग मिलकर किचन में काम करते हैं तो ग्रुप एक्टिविटी होती है और मूड बेहतर होता है.
4. हेल्दी खाना-
घर पर खाना बनाने से आपका दिमाग तो बेहतर काम करता ही आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है. पाचन तंत्र भी मजबूत होता है. आप घर में पका कर ताजी सब्जियां खाते हैं. प्रोसेस्ड फूड से आप दूर होते हैं और ऐसे फूड से भी आप दूर हो पाते हैं तो सूजन पैदा करती हैं.
