25 C
New Delhi
Tuesday, August 25, 2026
Homeदेशअंतरिक्ष में भारत का नया अध्याय! पहला प्राइवेट रॉकेट ‘विक्रम’ भरेगा उड़ान,...

अंतरिक्ष में भारत का नया अध्याय! पहला प्राइवेट रॉकेट ‘विक्रम’ भरेगा उड़ान, जानिए इसकी खासियत

नई दिल्ली: भारत जल्द ही अंतरिक्ष के दुनिया में नया इतिहास रचने जा रहा है. सबसे खास बात यह है कि इस बार यह इबारत हमारी भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO नहीं बल्कि एक प्राइवेट कंपनी लिखेगी. भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट ‘विक्रम-1’ अंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार है. यह मिशन भारत के लिए बेहद खास होने वाला है. यह रॉकेट पूरी तरह स्वदेशी है. आम रॉकेट की तुलना में यह काफी एडवांस और हल्का है. यह रॉकेट पृथ्वी की ऑर्बिट में अपने साथ कुछ ऐसा भी ले जाएगा, जो पहले कभी कोई भारतीय रॉकेट लेकर नहीं गया. विक्रम रॉकेट अपने साथ हीरे और सोना लेकर जाएगा. यह पूरा मिशन है क्या और यह क्यों इतना अहम है? आइए बताते हैं.

रॉकेट कब होगा लॉन्च?

विक्रम रॉकेट की खासियत बताने से पहले ये जान लीजिए कि यह मिशन कब लॉन्च होगा. हैदराबाद आधारित कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बताया कि देश के निजी तौर पर डेवलेप ऑर्बिटल कैटेगरी के पहले रॉकेट ‘विक्रम-1′ की पहली परीक्षण उड़ान के लिए 12 जुलाई से चार अगस्त के बीच का समय तय किया गया है. इसे ‘आगमन’ कहा जाता है. लॉन्चिंग की अंतिम तारीख श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्चिंग पैड पर टेस्टिंग से जुड़े काम पूरे होने और मौसम, सुरक्षा व ‘रेंज क्लीयरेंस’ पर निर्भर करेगी. यह मिशन स्काईरूट एयरोस्पेस के लिए पहला इतना बड़ा मिशन है. यह कंपनी भारत की सबसे नई स्पेस टेक्नोलॉजी यूनिकॉर्न है, जिसकी अनुमानित कीमत $1.1 बिलियन से ज्यादा है. इसे ISRO के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका द्वारा शुरू किया गया है. हैदराबाद की यह कंपनी भारत के तेजी से बढ़ते प्राइवेट स्पेस सेक्टर की लीडर बनकर उभरी है. अब, जब इसका पहला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल पूरी तरह से असेंबल होकर फाइनल चेक का इंतजार करते हुए उड़ान के लिए तैयार है.

विक्रम रॉकेट की खासियत?

भारत के स्पेस प्रोग्राम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर, विक्रम-1 भारत का सबसे छोटा ऑर्बिटल रॉकेट है और देश का पहला प्राइवेट तौर पर डेवलप किया गया लॉन्च व्हीकल है जिसे सैटेलाइट को ऑर्बिट में भेजने के लिए बनाया गया है.  विक्रम-1 सात मंजिला लंबा, बहु-चरणीय ऑर्बिटल लॉन्चिंग व्हीकल है. इसे कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके और स्काईरूट के चर्चित 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन को शामिल करके बनाया गया है. इस रॉकेट को 350 किलोग्राम तक के पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट में रखने के लिए डिजाइन किया गया है.

विक्रम-1 असल में एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन मिशन है, इसके कुछ पेलोड स्पेस की दुनिया के बाहर भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. पहली बार, एक भारतीय रॉकेट से हीरे स्पेस में लॉन्च किए जाएंगे. कॉस्मॉस डायमंड्स द्वारा डेवलप किया गया कॉस्मिक ब्लूम नाम का एक खास पेलोड, विक्रम-1 पर उड़ेगा. पेलोड में एक एल्युमिनियम बेस प्लेट पर लगा एक डायमंड ज्वेलरी क्रिएशन है. यह चीज स्पेसफ्लाइट के साथ क्राफ्टमैनशिप को जोड़ती है, जो दिखाती है कि ऑर्बिट में आर्ट, लग्जरी और टेक्नोलॉजी कैसे मिल सकते हैं.

यह मिशन स्पेस में सोना भी ले जाएगा. आर्टिस्ट अजय कुमार मटेवाड़ा ने माइक्रोआर्ट नाम का एक अनोखा आर्टवर्क बनाया है जो रॉकेट पर उड़ेगा. इस छोटी मूर्ति में 18 कैरेट सोने का रॉकेट है जिसमें भारत के तीन सबसे बड़े साइंटिफिक विजनरी की छोटी मूर्तियां हैं. इसमें नोबेल प्राइज जीतने वाले वैज्ञानिक सर सी.वी. रमन, भारतीय स्पेस प्रोग्राम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई और पूर्व राष्ट्रपति और अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम शामिल हैं. इस आर्टवर्क की खास बात इसका साइज है. हर छोटी मूर्ति चावल के दाने से भी छोटी है. ये सब मिलकर साइंटिफिक लीडरशिप की तीन पीढ़ियों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने मॉडर्न इंडिया को बनाने में मदद की.

भारत के लिए यह क्यों बेहद अहम है?

दुनियाभर में छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने की मांग काफी बढ़ रही है. विक्रम रॉकेट के जरिए भारत दुनिया के देशों को सस्ता और ऑन डिमांड लॉन्चिंग ऑप्शन दे सकेगा. इस मिशन के बाद ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत बड़ा लीडर बन जाएगा. इसके अलावा भारत में सभी स्पेस मिशनों का जिम्मा भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO ही संभालती है. लेकिन अब निजी कंपनियों के आने के बाद ISRO बड़े मिशनों जैसे चंद्रयान और गगनयान पर फोकस कर पाएगा. वहीं छोटे और कमर्शियल मिशनों को प्राइवेट कंपनियां संभाल पाएंगी.

RELATED ARTICLES
New Delhi
broken clouds
25 ° C
26.1 °
25 °
100 %
0kmh
63 %
Tue
33 °
Wed
35 °
Thu
39 °
Fri
40 °
Sat
41 °

Most Popular