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Sunday, October 4, 2026
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Ambulance New Rule 2026 : इमरजेंसी सेवा में बड़ा बदलाव, अब 20 मिनट के अंदर पहुंचेगी एंबुलेंस, नई NAS गाइडलाइन लागू; जान लें अपने मतलब की बात

Ambulance New Rule 2026 : किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में सबसे ज्यादा जरूरी होता है सही समय पर इलाज मिलना. कुछ मिनटों की देरी भी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है. इसी वजह से केंद्र सरकार ने पहली बार पूरे देश के लिए राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा (NAS) ऑपरेशनल गाइडलाइन 2026 जारी की है. इन नए नियमों का मकसद यह है कि हर व्यक्ति को जरूरत पड़ने पर जल्दी एंबुलेंस मिले, रास्ते में ही बेहतर इलाज शुरू हो जाए और पूरे देश में एंबुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता एक जैसी हो.

20 मिनट में पहुंचाने का लक्ष्य

नई गाइडलाइन के तहत सरकार ने पहली बार पूरे देश के लिए एंबुलेंस के पहुंचने का समय तय किया है. अब इमरजेंसी कॉल मिलने के बाद एंबुलेंस को औसतन 20 मिनट के अंदर घटनास्थल तक पहुंचने का लक्ष्य दिया गया है. वहीं, कंट्रोल रूम को कॉल मिलने के तीन मिनट के अंदर एंबुलेंस रवाना करनी होगी. अगर तय समय का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

फोन उठाने और कॉल का जवाब देने के भी बने नियम

नई व्यवस्था में सिर्फ एंबुलेंस भेजने पर ही नहीं, बल्कि कॉल सेंटर की जिम्मेदारी भी तय की गई है. अब 95 प्रतिशत इमरजेंसी कॉल 20 सेकंड के अंदर उठानी होंगी. अगर किसी कारण से कॉल छूट जाती है, तो उस व्यक्ति को वापस कॉल करना जरूरी होगा. इससे लोगों को मदद के लिए बार-बार फोन नहीं करना पड़ेगा और समय की बचत होगी.

हर एंबुलेंस में रहेगा प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ

अब हर एंबुलेंस में सिर्फ ड्राइवर नहीं होगा, बल्कि प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) भी मौजूद रहेगा. यह कर्मचारी मरीज को अस्पताल पहुंचने से पहले जरूरी प्राथमिक इलाज देगा. इससे मरीज की हालत को संभालने में मदद मिलेगी और इलाज शुरू होने में देरी नहीं होगी.

कंट्रोल रूम में भी रहेंगे डॉक्टर

नई गाइडलाइन के तहत अब कंट्रोल रूम में डॉक्टर भी मौजूद रहेंगे. जब एंबुलेंस किसी मरीज के पास पहुंचेगी, तब जरूरत पड़ने पर डॉक्टर फोन के जरिए EMT को मरीज की स्थिति के हिसाब से इलाज की सलाह देंगे. यानी अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज को बेहतर मेडिकल सहायता मिल सकेगी.

हर एंबुलेंस पर रहेगी जीपीएस से नजर

सभी एंबुलेंस में GPS सिस्टम लगाना जरूरी होगा. इससे कंट्रोल रूम हर समय एंबुलेंस की लोकेशन देख सकेगा और मरीज के पास सबसे नजदीकी एंबुलेंस भेजी जा सकेगी. इससे प्रोसेस टाइम कम होगा और लोगों को जल्दी मदद मिलेगी. साथ ही पूरी सेवा की रियल टाइम निगरानी भी की जाएगी.

बिना जांच के नहीं चलेगी कोई एंबुलेंस

सरकार ने एंबुलेंस की गुणवत्ता पर भी खास ध्यान दिया है. अब किसी भी निजी एंबुलेंस को सेवा में शामिल करने से पहले जिला स्तर की समिति उसकी जांच करेगी. अगर वाहन सभी तय मानकों को पूरा करेगा, तभी उसे मंजूरी मिलेगी. इससे खराब या जरूरी सुविधाओं के बिना चल रही एंबुलेंस पर रोक लगेगी. इन सब से अलग आगे चलकर एंबुलेंस सेवाओं को 112 इमरजेंसी नंबर से भी जोड़ा जाएगा, ताकि लोगों को एक ही नंबर पर सभी तरह की आपातकालीन मदद मिल सके.

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