राजस्थान में गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद सोमवार से सरकारी स्कूलों में फिर से शिक्षण कार्य शुरू हो गया। 43 दिनों की छुट्टियों के बाद स्कूलों में एक बार फिर रौनक लौट आई। पहले दिन स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों का शिक्षकों ने उत्साह के साथ स्वागत किया। कई स्कूलों में बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें शुभकामनाएं दी।
स्कूल पहुंची बच्चों की रेलगाड़ी
पूरे राजस्थान के सरकारी स्कूलों में सोमवार से नियमित कक्षाएं शुरू हुईं। वहीं बीकानेर के राजकीय महारानी स्कूल में ग्रीष्मावकाश के बाद पहले दिन का माहौल खास रहा। यहां कक्षाएं अलग थीम (रेलगाड़ी के डिब्बों) के आधार पर तैयार की हुई हैं। ऐसे में स्कूल खुलते ही लगा कि रेलगाड़ी में यात्री आ गए हों। ये अनोखी व्यवस्था छात्राओं को काफी आकर्षित करती है। छात्राएं जब इन कक्षाओं के दरवाजों से झांक रही थीं तो ऐसा लग रहा था जैसे बच्चों की कोई खास रेलगाड़ी स्कूल पहुंच गई हो। शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराई जाएगी। इसके साथ ही खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
नए सत्र में स्कूलों में बनेंगे रोड सेफ्टी क्लब
सड़क सुरक्षा को लेकर अब नए सत्र से स्कूली बच्चों को भी जागरूकता अभियान से जोड़ा जाएगा। स्कूलों में रोड सेफ्टी क्लबों का गठन किया जाएगा, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी जाएगी और उन्हें समाज तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल नियमों की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी संयुक्त निदेशकों को निर्देश जारी किए हैं। योजना के तहत प्रत्येक स्कूल में 5 से 10 विद्यार्थियों को रोड सेफ्टी वालंटियर के रूप में चुना जाएगा। ये विद्यार्थी स्कूल के साथ-साथ घर और आसपास के क्षेत्रों में भी सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता गतिविधियां करेंगे। रोड सेफ्टी क्लबों के जरिए बच्चों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, तय गति सीमा में वाहन चलाने, मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए ड्राइविंग नहीं करने और यातायात संकेतों का पालन करने की जानकारी दी जाएगी। ट्रैफिक पुलिस भी स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद करेगी और सड़क हादसों के कारणों व उनके दुष्परिणामों के बारे में बताएगी।
