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Wednesday, September 2, 2026
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बार-बार खाने या लंबे समय तक भूखे रहने की आदत? कहीं आप ‘ईटिंग डिसऑर्डर’ का शिकार तो नहीं!

ईटिंग डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की खाने-पीने की आदतें औरों जैसी नहीं होती हैं, बल्कि बेहद असामान्य हो जाती हैं. बार-बार जरूरत से ज्यादा खाना या लंबे समय तक भूखे रहना न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकता है.

ये आदतें न करें नदरअदांज-

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट दिखने और परफेक्ट बॉडी पाने की चाह कई बार लोगों को ऐसी आदतों की ओर धकेल देती है, जो धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती हैं. ऐसी ही एक समस्या है ईटिंग डिसऑर्डर, जिसे आमतौर पर सामान्य डाइटिंग या खाने की आदत समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है.

केवल भोजन से जुड़ी समस्या नहीं-

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि यह केवल भोजन से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि व्यक्ति की भावनाओं, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति से गहराई से जुड़ा विकार है. समय रहते इसके संकेतों को पहचानना और सही मदद लेना बेहद जरूरी है, ताकि इसके गंभीर परिणामों से बचा जा सके. नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने ईटिंग डिसऑर्डर को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है, मिशन के अनुसार, ईटिंग डिसऑर्डर कोई साधारण खाने की आदत नहीं है बल्कि यह एक खामोश लड़ाई है जिसमें व्यक्ति खुद से ही दूर होता जा रहा होता है. कैलोरी गिनते-गिनते कई लोग अपनी मुस्कान, सुकून और आत्मविश्वास खो बैठते हैं.

पतला दिखने वाला व्यक्ति स्वस्थ हो ये जरूरी नहीं-

ऐसे में मिशन आम लोगों से अपील करता है कि हर पतला दिखने वाला व्यक्ति स्वस्थ हो यह जरूरी नहीं होता. किसी को जज करने से पहले थोड़ी समझ और प्यार जरूर दें. एनएचएम ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर एक जागरूकता वीडियो भी पोस्ट किया है, जिसमें एनआईएमएचएएनएस बेंगलुरु की डॉ. लक्ष्मी श्रावंती विस्तार से जानकारी देती नजर आईं. डॉ. लक्ष्मी श्रावंती, चाइल्ड एंड एडोलिसेंट साइकियाट्री विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं.

इन्हें ज्यादा खतरा-

उन्होंने बताया, ईटिंग डिसऑर्डर मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर स्थितियां हैं, जिनमें व्यक्ति का भोजन और अपने शरीर की छवि यानी बॉडी इमेज के साथ संबंध अनहेल्दी हो जाता है. यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन युवाओं में ज्यादा देखी जाती है. ईटिंग डिसऑर्डर के मुख्य कारण में समाज का दबाव (पतला या खास तरीके से दिखने का), आत्मविश्वास की कमी, मूड स्विंग्स या भावनात्मक उतार-चढ़ाव, वजन या दिखावट को लेकर बुलिंग, ज्यादा डाइटिंग करना या बार-बार खाना छोड़ने की आदत शामिल है.

वजन में दिख सकते हैं बदलाव-

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, यह समस्या सिर्फ खाने की नहीं है. इसमें व्यक्ति इमोशनली डिस्ट्रेस, शर्म और अपराधबोध से भी गुजरता है. कई बार व्यक्ति खुद को दंडित करने जैसा महसूस करता है. इससे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित होता है. ईटिंग डिसऑर्डर में व्यक्ति का वजन बहुत कम या बढ़ सकता है. कुछ लोग भोजन से डरने लगते हैं तो कुछ लोग बार-बार खाते रहते हैं. यह समस्या अगर समय पर पहचानी न गई तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कुपोषण, हृदय संबंधी समस्याएं, हड्डियों की कमजोरी और यहां तक कि जीवन को खतरे में डाल सकती है.

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